परिचय
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) से होती है। मिट्टी के पात्र में जौ (जवारे) बोए जाते हैं, उस पर जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल रखकर माँ दुर्गा का आवाहन किया जाता है। कई घरों में नौ दिन अखंड ज्योति जलती है। फिर नौ दिन रोज़ माँ के एक स्वरूप की पूजा, भोग और दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है, और अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करके व्रत पूरा किया जाता है।
नीचे पूरी सामग्री, घटस्थापना की क्रमवार विधि, रोज़ का भोग और मंत्र, कन्या पूजन की विधि और व्रत के नियम दिए गए हैं।
चैत्र नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि 2027 कब है?
वर्ष 2027 में चैत्र नवरात्रि बुधवार, 7 अप्रैल से गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 तक मनाई जाएगी। इस बार कोई तिथि क्षय या वृद्धि नहीं है, इसलिए नवरात्रि पूरे नौ दिन की है।
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 7 अप्रैल 2027, सुबह लगभग 05:21 बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 8 अप्रैल 2027, सुबह लगभग 04:29 बजे
- घटस्थापना मुहूर्त (नई दिल्ली): 7 अप्रैल, सूर्योदय (लगभग 06:05) से सुबह लगभग 07:25 तक
- दुर्गा अष्टमी: 14 अप्रैल 2027, बुधवार
- महानवमी / राम नवमी: 15 अप्रैल 2027, गुरुवार
- हिंदू नव वर्ष: 7 अप्रैल से विक्रम संवत 2084 की शुरुआत — इसी दिन गुड़ी पड़वा, उगादी और चेटी चंड भी हैं
2027 में घटस्थापना के समय की ज़रूरी बात
7 अप्रैल को सुबह लगभग 07:25 बजे से वैधृति योग शुरू हो रहा है। शास्त्रों में वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में घटस्थापना करना उचित नहीं माना गया है। इसलिए 2027 में कलश स्थापना सूर्योदय के बाद, सुबह 07:25 से पहले कर लेना सबसे शुद्ध है।
शहर के अनुसार सूर्योदय (घटस्थापना शुरू होने का समय) इस प्रकार है — दिल्ली 06:05, लखनऊ 05:51, कोलकाता 05:24, मुंबई 06:28, चेन्नई 06:01, बेंगलुरु 06:12, हैदराबाद 06:06। सभी शहरों में घटस्थापना लगभग 07:25 तक पूरी कर लें। कुछ पंचांग (जैसे Prokerala, उज्जैन) दिन के पहले एक-तिहाई भाग के आधार पर सुबह 06:17 से 10:25 तक का समय भी देते हैं — पर वैधृति से बचना हो तो 07:25 से पहले ही स्थापना करें।
नवरात्रि 2027 का पूरा कैलेंडर
- पहला दिन — 7 अप्रैल (बुधवार): प्रतिपदा — घटस्थापना, माँ शैलपुत्री
- दूसरा दिन — 8 अप्रैल (गुरुवार): द्वितीया — माँ ब्रह्मचारिणी
- तीसरा दिन — 9 अप्रैल (शुक्रवार): तृतीया — माँ चंद्रघंटा
- चौथा दिन — 10 अप्रैल (शनिवार): चतुर्थी — माँ कूष्मांडा
- पांचवां दिन — 11 अप्रैल (रविवार): पंचमी — माँ स्कंदमाता
- छठा दिन — 12 अप्रैल (सोमवार): षष्ठी — माँ कात्यायनी
- सातवां दिन — 13 अप्रैल (मंगलवार): सप्तमी — माँ कालरात्रि
- आठवां दिन — 14 अप्रैल (बुधवार): दुर्गा अष्टमी — माँ महागौरी (अष्टमी तिथि दोपहर लगभग 03:24 तक, संधि पूजा लगभग 03:00 से 03:48 तक)
- नौवां दिन — 15 अप्रैल (गुरुवार): महानवमी, राम नवमी — माँ सिद्धिदात्री (नवमी तिथि दोपहर लगभग 01:22 तक)
चैत्र नवरात्रि का महत्व
- सृष्टि का आरंभ: पुराणों के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। आदिशक्ति माँ दुर्गा की कृपा से सृष्टि चलती है, इसलिए नव वर्ष की शुरुआत शक्ति की उपासना से होती है।
- हिंदू नव वर्ष: इसी दिन से विक्रम संवत का नया वर्ष शुरू होता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक-आंध्र-तेलंगाना में उगादी और सिंधी समाज में चेटी चंड (झूलेलाल जयंती) मनाया जाता है।
- राम नवमी: नवरात्रि की नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे राम नवरात्रि भी कहते हैं। कई भक्त इन नौ दिनों में रामचरितमानस का पाठ करते हैं।
- ऋतु परिवर्तन और शुद्धि: यह नवरात्रि वसंत ऋतु में आती है (इसे वासंती नवरात्रि भी कहते हैं)। मौसम बदलने के समय नौ दिन का सात्विक व्रत शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है।
- साल की चार नवरात्रि: वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं — चैत्र, आषाढ़ (गुप्त), आश्विन (शारदीय) और माघ (गुप्त)। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख हैं, जिन्हें गृहस्थ लोग धूमधाम से मनाते हैं।
माँ दुर्गा के नौ स्वरूप
- 1. शैलपुत्री: पर्वतराज हिमालय की पुत्री। वृषभ पर सवार, हाथ में त्रिशूल और कमल। स्थिरता और दृढ़ संकल्प देती हैं।
- 2. ब्रह्मचारिणी: तपस्या की देवी। हाथ में जप माला और कमंडल। तप, संयम और धैर्य का वरदान देती हैं।
- 3. चंद्रघंटा: मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र। सिंह पर सवार। भय दूर करके साहस देती हैं।
- 4. कूष्मांडा: अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली। आरोग्य और ऊर्जा देती हैं।
- 5. स्कंदमाता: गोद में बाल कार्तिकेय (स्कंद)। संतान सुख और वात्सल्य देती हैं।
- 6. कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की पुत्री, महिषासुर का वध करने वाली। विवाह की बाधाएं दूर करती हैं।
- 7. कालरात्रि: सबसे उग्र स्वरूप, गधे पर सवार। नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं और भक्तों को शुभ फल देती हैं, इसलिए "शुभंकरी" भी कहलाती हैं।
- 8. महागौरी: अत्यंत गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र, वृषभ वाहन। पापों का नाश और सुख-सौभाग्य देती हैं।
- 9. सिद्धिदात्री: कमल पर विराजमान, सभी सिद्धियां देने वाली। मनोकामना पूर्ण करती हैं।
नवरात्रि की कथा — माँ दुर्गा और महिषासुर
दुर्गा सप्तशती (मार्कंडेय पुराण) के अनुसार महिषासुर नाम के असुर ने कठोर तप करके वरदान पाया था कि कोई देवता या पुरुष उसे नहीं मार सकेगा। वरदान के अहंकार में उसने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया।
तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई — माँ दुर्गा। शिव जी ने त्रिशूल, विष्णु जी ने चक्र, इंद्र ने वज्र, वरुण ने शंख और हिमालय ने सिंह वाहन दिया। सिंह पर सवार दस भुजाओं वाली माँ दुर्गा ने महिषासुर और उसकी असुर सेना से नौ दिन-रात तक युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर का वध करके देवताओं को भयमुक्त किया। इसी कारण माँ को महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध से पहले नौ दिन तक माँ दुर्गा की आराधना की थी। चैत्र नवरात्रि की नवमी को स्वयं भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए यह नवरात्रि शक्ति और मर्यादा दोनों की उपासना का पर्व है।
पूजा सामग्री
घटस्थापना (कलश स्थापना) के लिए
- मिट्टी का चौड़ा पात्र और साफ़ मिट्टी (जौ बोने के लिए)
- जौ (जवारे बोने के लिए)
- मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश
- गंगाजल और शुद्ध जल
- आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते
- जटा वाला नारियल और उसे लपेटने के लिए लाल कपड़ा / चुनरी
- कलश में डालने के लिए — सुपारी, सिक्का, अक्षत, हल्दी की गांठ, दूर्वा, पंचरत्न (वैकल्पिक)
- मौली (कलावा), रोली, कुमकुम
- कलश का ढक्कन (मिट्टी का दीया / सकोरा) और उसमें रखने के लिए चावल
माँ दुर्गा की पूजा के लिए
- माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर, लकड़ी की चौकी और लाल कपड़ा
- लाल चुनरी और श्रृंगार सामग्री — सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, काजल, आलता, कंघी, शीशा
- लाल फूल (गुड़हल विशेष प्रिय), फूलों की माला
- अक्षत, रोली, चंदन, कपूर, लौंग, इलायची, पान, सुपारी
- घी का दीपक और अखंड ज्योति के लिए बड़ा दीपक, पर्याप्त घी और लंबी बत्ती
- धूप-अगरबत्ती, गुग्गुल
- दुर्गा सप्तशती की पुस्तक, दुर्गा चालीसा
- फल, मिठाई, पंचमेवा
कन्या पूजन के लिए
- 9 कन्याएं (2 से 10 वर्ष) और 1 बालक (भैरव / लांगुर रूप में)
- हलवा, पूरी, काले चने का प्रसाद
- पैर धोने के लिए जल, लाल चुनरी, रोली, मौली
- उपहार और दक्षिणा
व्रत (फलाहार) के लिए
- फल, दूध, दही, मेवे, मखाने
- कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, समा के चावल, आलू, शकरकंद
- सेंधा नमक
पूजा विधि
चरण 1: एक दिन पहले की तैयारी (6 अप्रैल)
- घर और विशेषकर पूजा स्थान की अच्छी तरह सफ़ाई करें। पूजा स्थान घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में हो तो उत्तम है।
- सारी सामग्री जुटा लें और जौ को रात भर पानी में भिगो सकते हैं।
चरण 2: घटस्थापना (7 अप्रैल, सुबह 07:25 से पहले)
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ़ (लाल या पीले) वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान पर चौकी रखकर लाल कपड़ा बिछाएं और माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- हाथ में जल, अक्षत, फूल और सिक्का लेकर नौ दिन के व्रत और पूजा का संकल्प लें — "मैं (अपना नाम) अपने परिवार की सुख-समृद्धि और माँ की कृपा के लिए चैत्र नवरात्रि का व्रत और पूजन कर रहा/रही हूँ।"
- सबसे पहले श्री गणेश का पूजन करें — ॐ गं गणपतये नमः
- मिट्टी के पात्र में मिट्टी की परत बिछाकर जौ बोएं, ऊपर फिर मिट्टी डालें और हल्का जल छिड़कें।
- कलश के गले में मौली बांधें, उस पर रोली से स्वस्तिक बनाएं। कलश में गंगाजल मिला जल भरें और उसमें सुपारी, सिक्का, अक्षत, हल्दी की गांठ और दूर्वा डालें।
- कलश के मुख पर आम के 5 या 7 पत्ते रखें, ऊपर ढक्कन रखकर उसमें चावल भरें।
- लाल कपड़े या चुनरी में लिपटा नारियल मौली से बांधकर ढक्कन पर रखें (नारियल का मुख अपनी ओर रहे)।
- कलश को जौ वाले पात्र के बीच में या उसके पास स्थापित करें।
- कलश में सभी देवी-देवताओं और माँ दुर्गा का आवाहन करें।
चरण 3: अखंड ज्योति और पहली पूजा
- संकल्प लिया हो तो अखंड ज्योति प्रज्वलित करें — यह नौ दिन लगातार जलनी चाहिए, बीच में बुझनी नहीं चाहिए।
- माँ को लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री, लाल फूल, रोली, अक्षत अर्पित करें।
- माँ शैलपुत्री की पूजा करें, भोग लगाएं, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और आरती करें।
चरण 4: नौ दिन रोज़ की पूजा
- रोज़ सुबह-शाम स्नान करके माँ के उस दिन के स्वरूप की पूजा करें।
- नवार्ण मंत्र का जाप करें — ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे (कम से कम 1 माला)।
- संभव हो तो रोज़ दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, या पूरे नौ दिनों में बांटकर पढ़ें।
- जवारों में रोज़ थोड़ा जल डालें और सुबह-शाम आरती करें।
नौ दिन का भोग और मंत्र
- दिन 1 — शैलपुत्री: गाय का शुद्ध घी — ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
- दिन 2 — ब्रह्मचारिणी: शक्कर / मिश्री — ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
- दिन 3 — चंद्रघंटा: दूध या खीर — ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः
- दिन 4 — कूष्मांडा: मालपुआ — ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
- दिन 5 — स्कंदमाता: केला — ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
- दिन 6 — कात्यायनी: शहद — ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
- दिन 7 — कालरात्रि: गुड़ — ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
- दिन 8 — महागौरी: नारियल — ॐ देवी महागौर्यै नमः
- दिन 9 — सिद्धिदात्री: तिल और हलवा-पूरी-चना — ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
चरण 5: अष्टमी और संधि पूजा (14 अप्रैल)
- दुर्गा अष्टमी पर माँ महागौरी की विशेष पूजा करें। कई परिवार इसी दिन कन्या पूजन करते हैं।
- अष्टमी समाप्त होने और नवमी शुरू होने के 48 मिनट के समय को संधि काल कहते हैं। 2027 में संधि पूजा दोपहर लगभग 03:00 से 03:48 तक है। इस समय 108 दीपक और 108 कमल या लाल फूल चढ़ाने की परंपरा है।
चरण 6: नवमी, हवन और कन्या पूजन (15 अप्रैल)
- नवमी तिथि दोपहर लगभग 01:22 तक है, इसलिए हवन और कन्या पूजन सुबह से दोपहर तक कर लें।
- दुर्गा सप्तशती के मंत्रों या नवार्ण मंत्र से हवन करें।
- कन्या पूजन: 9 कन्याओं और 1 बालक को आदर से बुलाएं, उनके पैर धोएं, आसन पर बिठाएं, रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, कलाई पर मौली बांधें और चुनरी ओढ़ाएं।
- उन्हें हलवा, पूरी और काले चने का भोजन कराएं, फिर उपहार और दक्षिणा देकर पैर छूकर आशीर्वाद लें।
- इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव (राम नवमी) भी मनाएं।
चरण 7: पारण और कलश विसर्जन
- कन्या पूजन और हवन के बाद माँ का प्रसाद लेकर व्रत का पारण करें। कुछ परिवार दशमी (16 अप्रैल) की सुबह पारण करते हैं — अपनी परंपरा के अनुसार चलें।
- कलश का जल पूरे घर में छिड़कें और बचा जल किसी पौधे में डाल दें।
- कलश के नीचे रखे चावल पक्षियों को डाल दें और नारियल प्रसाद के रूप में बांटें।
- जवारे किसी पवित्र नदी, तालाब या गमले में विसर्जित करें। थोड़े जवारे तिजोरी या पूजा स्थान पर रखना शुभ माना जाता है।
व्रत के नियम
✅ नवरात्रि में क्या करें
- घटस्थापना शुभ मुहूर्त में ही करें — 2027 में सुबह 07:25 (वैधृति योग) से पहले।
- नौ दिन सुबह-शाम माँ की पूजा और आरती करें।
- अखंड ज्योति जलाई हो तो घर को कभी खाली न छोड़ें — कोई न कोई घर में रहे।
- सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- घर और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या रामचरितमानस का पाठ करें।
- अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन अवश्य करें — कन्याओं को माँ का रूप मानकर सम्मान दें।
- अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें — पूरे नौ दिन, या पहले और आखिरी दिन (जोड़े का व्रत)।
❌ नवरात्रि में क्या न करें
- नौ दिन लहसुन, प्याज़, मांस, मछली, अंडा और मदिरा का सेवन न करें — पूरे परिवार के लिए यह नियम माना जाता है।
- व्रत रखने वाले अनाज, चावल, दाल और साधारण नमक न खाएं — सेंधा नमक का प्रयोग करें।
- मान्यता है कि व्रत रखने वाले इन नौ दिनों में बाल, दाढ़ी और नाखून न काटें।
- अखंड ज्योति बुझने न दें और घर को ताला लगाकर न जाएं।
- कलश और जवारों को नौ दिन तक न हिलाएं।
- किसी का अपमान न करें, क्रोध और झूठ से बचें — विशेषकर किसी कन्या या स्त्री का अपमान बिल्कुल न करें।
- दिन में सोने से बचें।
- मधुमेह, ब्लड प्रेशर के रोगी, गर्भवती महिलाएं और बुज़ुर्ग निर्जला या कठोर व्रत न रखें — फलाहार या एक समय भोजन वाला व्रत रखें और डॉक्टर की सलाह लें।
चैत्र नवरात्रि — आरती
अम्बे तू है जगदम्बे काली: माँ दुर्गा, माँ काली आरती ( Maa Durga Maa Kali Aarti )
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जय अम्बे गौरी : आरती (Jai Ambe Gauri : Aarti)
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चन्द्रघण्टा माता आरती (Chandraghanta Mata Aarti)
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पार्वती माता की आरती (Parvati Mata Aarti)
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Hinglish
Chaitra Navratri 2027 kab hai? Budhvar 7 April se Guruvar 15 April 2027 tak — poore 9 din. Durga Ashtami 14 April, Ram Navami 15 April.
Ghatasthapana muhurat: 7 April ko suryoday ke baad subah lagbhag 07:25 se pehle (Delhi mein 06:05 se 07:25), kyunki 07:25 se Vaidhriti yog shuru ho raha hai.
Kalash sthapana: Mitti ke paatra mein jau boyein. Kalash mein gangajal, supari, sikka aur akshat daalein. Upar aam ke patte aur laal chunri mein lipta nariyal rakhein, phir Maa Durga ka aavahan karein.
9 devi: Shailputri, Brahmacharini, Chandraghanta, Kushmanda, Skandamata, Katyayani, Kalaratri, Mahagauri, Siddhidatri.
Mantra: "Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche".
Kanya pujan: Ashtami ya Navami ko 9 kanyaon aur 1 balak ko halwa, poori aur chana khilayein.
Niyam: 9 din lahsun-pyaaz, maans aur sharab na lein, vrat mein sendha namak lein. Akhand jyoti bujhne na dein.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चैत्र नवरात्रि 2027 कब से कब तक है?
चैत्र नवरात्रि 2027 बुधवार, 7 अप्रैल से गुरुवार, 15 अप्रैल तक है। इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिन की है।
घटस्थापना 2027 का शुभ मुहूर्त क्या है?
7 अप्रैल 2027 को सूर्योदय से सुबह लगभग 07:25 तक (दिल्ली में 06:05 से 07:25)। 07:25 से वैधृति योग शुरू हो रहा है, इसलिए स्थापना इससे पहले कर लें।
प्रतिपदा तिथि कब से कब तक है?
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 7 अप्रैल 2027 सुबह लगभग 05:21 से 8 अप्रैल सुबह लगभग 04:29 तक है।
दुर्गा अष्टमी 2027 कब है?
दुर्गा अष्टमी बुधवार, 14 अप्रैल 2027 को है। संधि पूजा दोपहर लगभग 03:00 से 03:48 तक है।
राम नवमी 2027 कब है?
राम नवमी (महानवमी) गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 को है। नवमी तिथि दोपहर लगभग 01:22 तक है।
वैधृति योग में घटस्थापना क्यों नहीं करते?
शास्त्रों में वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र को कलश स्थापना के लिए वर्जित माना गया है, इसलिए इनके शुरू होने से पहले स्थापना करना श्रेष्ठ है।
नवरात्रि में जौ (जवारे) क्यों बोते हैं?
जौ को सृष्टि का पहला अन्न और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जवारे जितने हरे-भरे उगते हैं, आने वाला वर्ष उतना ही सुखद होता है।
कन्या पूजन कब करें?
कन्या पूजन अष्टमी (14 अप्रैल) या नवमी (15 अप्रैल) को किया जाता है। 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं और 1 बालक को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है।
नवरात्रि व्रत का पारण कब करें?
ज़्यादातर परिवार नवमी को कन्या पूजन और हवन के बाद पारण करते हैं। कुछ परिवार दशमी की सुबह पारण करते हैं।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में क्या अंतर है?
चैत्र नवरात्रि वसंत में चैत्र शुक्ल पक्ष में आती है और इसकी नवमी को राम नवमी होती है। शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में आश्विन शुक्ल पक्ष में आती है और उसके बाद दशहरा मनाया जाता है।
नवरात्रि में क्या नहीं खाना चाहिए?
लहसुन, प्याज़, मांस, अंडा और मदिरा से दूर रहें। व्रत रखने वाले अनाज, चावल, दाल और साधारण नमक न खाएं।
हिंदू नव वर्ष 2027 कब है?
हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत 2084) चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, 7 अप्रैल 2027 से शुरू होगा। इसी दिन गुड़ी पड़वा और उगादी भी है।