होम / त्योहार / माघ पूर्णिमा
🌕
⏳ 120 दिन बाकी

माघ पूर्णिमा 2027: स्नान-दान का समय, पूजा विधि, सत्यनारायण कथा, दान और नियम

माघ पूर्णिमा माघ मास का अंतिम और सबसे पुण्यदायी दिन है। मान्यता है कि इस दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर गंगा में स्नान करते हैं, इसलिए गंगा, यमुना, संगम या किसी पवित्र नदी में स्नान, दान, भगवान विष्णु की पूजा और सत्यनारायण कथा का विशेष महत्व है। प्रयागराज के माघ मेले में महीने भर चलने वाला कल्पवास भी इसी दिन पूरा होता है। इस पेज पर 2027 की तिथि, स्नान का सही समय, पूजा विधि, दान की सूची, मंत्र और नियम विस्तार से दिए गए हैं।

📅
तारीख 20 फ़रवरी 2027, शनिवार
🌙
हिंदू तिथि माघ शुक्ल पूर्णिमा
⏰
शुभ मुहूर्त पूर्णिमा 20 फरवरी 08:00 AM से 21 फरवरी 04:53 AM | पूजा-दान 08:00 के बाद | चंद्रोदय (दिल्ली) 05:41 PM
🙏
पूज्य देवता भगवान विष्णु (सत्यनारायण), माँ लक्ष्मी, चंद्र देव
📖

परिचय

माघ पूर्णिमा पर सुबह पवित्र नदी में या घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। फिर भगवान विष्णु / सत्यनारायण की पूजा, कथा, और तिल, कंबल, अन्न और घी का दान किया जाता है। व्रत रखने वाले शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं और प्रदोष काल में दीपदान करते हैं।

नीचे पूरी सामग्री, क्रमवार पूजा विधि, क्या दान करें, मंत्र और ज़रूरी नियम दिए गए हैं।

✨

माघ पूर्णिमा का महत्व

माघ पूर्णिमा 2027 कब है?

वर्ष 2027 में माघ पूर्णिमा शनिवार, 20 फरवरी 2027 को है। इसे माघी पूर्णिमा भी कहते हैं।

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 20 फरवरी 2027, सुबह लगभग 08:00 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 21 फरवरी 2027, सुबह लगभग 04:53 बजे
  • स्नान-दान और पूर्णिमा व्रत: 20 फरवरी 2027, शनिवार
  • चंद्रोदय (नई दिल्ली): 20 फरवरी, शाम लगभग 05:41 बजे
  • प्रदोष काल (सत्यनारायण कथा, दीपदान): शाम 06:14 से 08:46 तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 12:57 तक
  • राहुकाल (इसमें पूजा-दान आरंभ न करें): सुबह 09:45 से 11:10 तक

2027 में स्नान के समय की ज़रूरी बात

इस बार पूर्णिमा तिथि सूर्योदय (दिल्ली 06:55) के बाद, सुबह 08:00 बजे शुरू हो रही है और अगले दिन सूर्योदय से पहले, सुबह 04:53 पर समाप्त हो रही है। यानी किसी भी दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा नहीं है (तिथि क्षय)। ऐसे में पंचांगों के अनुसार स्नान-दान और व्रत 20 फरवरी को ही किए जाएंगे, क्योंकि पूर्णिमा पूरे दिन इसी दिन रहेगी।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह लगभग 05:13 से 06:04) में स्नान की परंपरा निभाने वाले उसी समय स्नान कर सकते हैं, लेकिन संकल्प, पूजा और दान सुबह 08:00 बजे (पूर्णिमा शुरू होने) के बाद करना अधिक शास्त्र सम्मत रहेगा। पवित्र नदी में स्नान करने वाले 08:00 के बाद भी स्नान कर सकते हैं।

माघ पूर्णिमा का महत्व

  • देवताओं का गंगा स्नान: पौराणिक मान्यता है कि माघ मास में देवता मनुष्य रूप में पृथ्वी पर आकर प्रयागराज के संगम में स्नान करते हैं, और माघ पूर्णिमा पर यह पुण्य सबसे अधिक होता है।
  • भगवान विष्णु का गंगाजल में वास: शास्त्रों में कहा गया है कि माघ मास में भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं, इसलिए इस दिन गंगा स्नान, विष्णु पूजा और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।
  • कल्पवास की पूर्णता: प्रयागराज के माघ मेले में पौष पूर्णिमा से शुरू होने वाला एक महीने का कल्पवास माघ पूर्णिमा पर पूरा होता है। कल्पवासी अंतिम स्नान करके दान और हवन के साथ व्रत पूरा करते हैं।
  • दान का महापर्व: इस दिन किया गया दान अक्षय फल देने वाला माना जाता है। विशेषकर तिल, कंबल, गुड़, घी, अन्न और वस्त्र का दान।
  • गुरु रविदास जयंती: संत शिरोमणि गुरु रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा को हुआ था, इसलिए इस दिन उनकी जयंती पूरे देश में श्रद्धा से मनाई जाती है।
  • ललिता जयंती: दस महाविद्याओं में से एक माँ ललिता (त्रिपुर सुंदरी) की जयंती भी माघ पूर्णिमा पर मनाई जाती है।
  • पितरों की तृप्ति: इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने से उन्हें शांति मिलती है।

माघ पूर्णिमा की कथा

पद्म पुराण में माघ स्नान की महिमा से जुड़ी एक कथा आती है। प्राचीन काल में नर्मदा नदी के किनारे शुभव्रत नाम का एक विद्वान ब्राह्मण रहता था। वह शास्त्रों का ज्ञाता था, लेकिन उसका सारा जीवन केवल धन कमाने में बीत गया। उसने कभी दान-पुण्य, तीर्थ या भगवान का भजन नहीं किया।

बुढ़ापे में जब उसका शरीर रोगों से घिर गया, तब उसे पछतावा हुआ कि उसने जीवन भर परलोक के लिए कुछ नहीं कमाया। तभी उसे एक श्लोक याद आया, जिसमें माघ मास में स्नान की महिमा बताई गई थी। शुभव्रत ने उसी समय संकल्प लिया और कमज़ोर शरीर के बावजूद माघ मास में नर्मदा नदी में नियमित स्नान करने लगा।

कुछ ही दिनों के माघ स्नान और भगवान विष्णु के स्मरण के प्रभाव से उसके सारे पाप नष्ट हो गए। जब उसकी मृत्यु हुई, तो उसे लेने के लिए दिव्य विमान आया और उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति हुई।

शिक्षा: सच्चे मन से किया गया थोड़ा सा भी माघ स्नान और भगवान का स्मरण जीवन भर के पापों को धो देता है। इसलिए कहा जाता है कि पूरे माघ में स्नान न कर सकें तो कम से कम माघ पूर्णिमा पर स्नान-दान अवश्य करें।

माघ पूर्णिमा पर कहां स्नान करें

  • प्रयागराज संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन) — माघ मेले का मुख्य स्नान
  • हरिद्वार, वाराणसी, गढ़मुक्तेश्वर में गंगा घाट
  • उज्जैन में शिप्रा, ओंकारेश्वर / अमरकंटक में नर्मदा
  • पुष्कर सरोवर, नासिक में गोदावरी
  • नदी तक न जा सकें तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें — इसका भी पुण्य मिलता है।
🧺

पूजा सामग्री

स्नान और अर्घ्य के लिए

  • गंगाजल (घर पर स्नान के लिए)
  • काले तिल
  • तांबे का लोटा, लाल फूल, रोली, अक्षत (सूर्य अर्घ्य के लिए)
  • चांदी या स्टील का लोटा, दूध, सफेद फूल, अक्षत, मिश्री (चंद्र अर्घ्य के लिए)

विष्णु / सत्यनारायण पूजा के लिए

  • भगवान विष्णु या सत्यनारायण भगवान की प्रतिमा / तस्वीर, शालिग्राम (यदि हों)
  • लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, केले के पत्ते (सत्यनारायण मंडप के लिए)
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • पीला चंदन, रोली, अक्षत, तुलसी दल
  • पीले फूल, फूलों की माला
  • घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, कपूर
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल, दक्षिणा
  • सत्यनारायण व्रत कथा की पुस्तक

भोग

  • पंजीरी (आटे या धनिये की) — सत्यनारायण का मुख्य प्रसाद
  • केले, मौसमी फल
  • चरणामृत / पंचामृत
  • खीर, तिल के लड्डू

दान के लिए

  • काले तिल और तिल के लड्डू
  • कंबल, ऊनी वस्त्र
  • गुड़, घी
  • अन्न — चावल, गेहूं, दाल
  • फल, वस्त्र, जूते-चप्पल, दक्षिणा
🪔

पूजा विधि

चरण 1: स्नान (20 फरवरी)

  • सुबह जल्दी उठें। संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • घर पर हों तो नहाने के पानी में गंगाजल और थोड़े काले तिल मिलाकर स्नान करें। स्नान करते समय इस मंत्र का स्मरण करें:
    गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
  • स्नान के बाद साफ़ (पीले या सफेद) वस्त्र पहनें।

चरण 2: सूर्य अर्घ्य और संकल्प (सुबह 08:00 के बाद)

  • तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, रोली और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें — ॐ घृणि सूर्याय नमः
  • हाथ में जल, अक्षत, तिल और फूल लेकर संकल्प लें — "मैं (अपना नाम) माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की कृपा, पापों के नाश और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए स्नान, पूजा, व्रत और दान कर रहा/रही हूँ।"

चरण 3: भगवान विष्णु / सत्यनारायण पूजा

  • चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु या सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें। सत्यनारायण पूजा के लिए चौकी के चारों कोनों पर केले के पत्ते लगाकर मंडप बनाएं।
  • सबसे पहले श्री गणेश का पूजन करें — ॐ गं गणपतये नमः
  • भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से।
  • पीले वस्त्र, पीला चंदन, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप-दीप दिखाएं और पंजीरी, केले, पंचामृत का भोग लगाएं (भोग में तुलसी दल अवश्य रखें)।
  • मंत्र जाप करें — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार)।
  • सत्यनारायण व्रत कथा के पांचों अध्याय पढ़ें या सुनें। सत्यनारायण कथा दिन में या शाम को प्रदोष काल (06:14 से 08:46) में भी की जा सकती है।
  • "ॐ जय जगदीश हरे" आरती करें और प्रसाद बांटें।

चरण 4: दान

  • पूजा के बाद ज़रूरतमंदों और ब्राह्मणों को तिल, कंबल, गुड़, घी, अन्न, वस्त्र और फल का दान करें।
  • गाय को हरा चारा या गुड़-रोटी खिलाएं।
  • पितरों के निमित्त जल में काले तिल डालकर तर्पण करें।

चरण 5: शाम को चंद्र अर्घ्य और दीपदान

  • शाम को चंद्रोदय (दिल्ली में लगभग 05:41) के बाद, चंद्रमा दिखने पर दूध मिले जल, सफेद फूल, अक्षत और मिश्री से चंद्रमा को अर्घ्य दें — ॐ सों सोमाय नमः
  • प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पास और किसी नदी या जलाशय पर दीपदान करें।
  • माँ लक्ष्मी की भी पूजा करें — पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजा धन-समृद्धि देने वाली मानी जाती है।

चरण 6: व्रत का पारण

  • व्रत रखने वाले चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।
  • व्रत में दिन भर फलाहार कर सकते हैं — फल, दूध, मेवे और सेंधा नमक।
📋

व्रत के नियम

✅ माघ पूर्णिमा पर क्या करें

  • पवित्र नदी में, या घर पर गंगाजल और तिल मिले पानी से स्नान करें।
  • सूर्य को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • सत्यनारायण कथा पढ़ें या सुनें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार तिल, कंबल, अन्न, गुड़ और घी का दान करें।
  • शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और दीपदान करें।
  • दिन भर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें।
  • पितरों के निमित्त तर्पण करें।

❌ माघ पूर्णिमा पर क्या न करें

  • इस दिन तामसिक भोजन — मांस, मछली, अंडा, मदिरा, लहसुन-प्याज़ न खाएं।
  • देर तक न सोएं — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • किसी का अपमान, झूठ, क्रोध और विवाद न करें।
  • घर आए किसी ज़रूरतमंद या भिक्षुक को खाली हाथ न लौटाएं।
  • राहुकाल (सुबह 09:45 से 11:10) में पूजा या दान शुरू न करें।
  • भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल रखें, पर पूर्णिमा पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें — एक दिन पहले तोड़कर रख लें।
  • ठंडे मौसम में नदी स्नान करते समय सावधानी रखें। बुज़ुर्ग, बच्चे और बीमार लोग गहरे पानी में न जाएं और लंबे समय तक ठंडे पानी में न रहें।
🪔

माघ पूर्णिमा — आरती

🔤

Hinglish

Magh Purnima 2027 kab hai? Shanivar, 20 February 2027. Purnima tithi 20 February subah 08:00 se 21 February subah 04:53 tak. Snaan-daan aur vrat dono 20 February ko. Chandroday (Delhi) shaam lagbhag 05:41.

Dhyan dein: Purnima subah 08:00 se shuru ho rahi hai, isliye sankalp, puja aur daan 08:00 ke baad karein.

Puja vidhi: Gangajal aur kaale til wale paani se snaan karein aur Surya ko arghya dein. Bhagwan Vishnu / Satyanarayan ki puja karein: panchamrit, peele phool, tulsi aur panjeeri-kele ka bhog. Satyanarayan katha suniye. Til, kambal, gud, ghee aur anaaj ka daan karein. Shaam ko Chandrama ko arghya dekar vrat kholein aur deepdaan karein.

Isi din: Guru Ravidas Jayanti aur Lalita Jayanti bhi hai, aur Prayagraj Magh Mele ka kalpvas poora hota hai.

❓

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

माघ पूर्णिमा 2027 कब है?

माघ पूर्णिमा 2027 में शनिवार, 20 फरवरी को है।

पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?

माघ पूर्णिमा तिथि 20 फरवरी 2027 सुबह लगभग 08:00 से 21 फरवरी सुबह लगभग 04:53 तक है।

माघ पूर्णिमा पर स्नान कब करें?

स्नान-दान 20 फरवरी को ही होगा। पूर्णिमा सुबह 08:00 से शुरू हो रही है, इसलिए संकल्प, पूजा और दान 08:00 के बाद करना अधिक शास्त्र सम्मत है।

माघ पूर्णिमा 2027 पर चंद्रोदय कब है?

नई दिल्ली में 20 फरवरी को चंद्रोदय शाम लगभग 05:41 बजे है।

माघ पूर्णिमा पर क्या दान करें?

काले तिल, तिल के लड्डू, कंबल, ऊनी वस्त्र, गुड़, घी, अन्न, फल और दक्षिणा का दान करें।

माघ पूर्णिमा का क्या महत्व है?

मान्यता है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर आकर गंगा में स्नान करते हैं और भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं, इसलिए इस दिन स्नान, दान और पूजा का फल कई गुना मिलता है।

कल्पवास कब पूरा होता है?

प्रयागराज के माघ मेले में पौष पूर्णिमा से शुरू होने वाला एक महीने का कल्पवास माघ पूर्णिमा पर पूरा होता है।

क्या घर पर स्नान करने से भी पुण्य मिलता है?

हां, नदी तक न जा सकें तो नहाने के पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें और पवित्र नदियों का स्मरण करें।

माघ पूर्णिमा पर कौन सी जयंती है?

माघ पूर्णिमा पर संत गुरु रविदास जयंती और माँ ललिता (त्रिपुर सुंदरी) की जयंती मनाई जाती है।

माघ पूर्णिमा पर किसकी पूजा करें?

भगवान विष्णु / सत्यनारायण, माँ लक्ष्मी, सूर्य देव और चंद्र देव की पूजा की जाती है। साथ में पितरों का तर्पण भी किया जाता है।

माघ पूर्णिमा व्रत कैसे खोलें?

शाम को चंद्रमा को दूध मिले जल से अर्घ्य देकर, भगवान का प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।

📢 शेयर करें