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महागौरी माता आरती - पवित्रता और शांति की देवी की स्तुति

माँ महागौरी नवरात्रि के अष्टम दिन पूजित सौम्य स्वरूप हैं। उनकी आरती पापों के नाश, मन की शांति और जीवन में सौभाग्य का आशीर्वाद देती है। श्रद्धा से किया गया यह पाठ साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 1768
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परिचय

देवी महागौरी नवरात्रि के आठवें दिन की पूजनीय रूप हैं — वे शुद्धता, सौम्यता और दुःखहरण की प्रतिक हैं। महागौरी का ध्यान करने से पापों का नाश, मन की शान्ति और जीवन की समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। श्रद्धा‑भाव, दीप‑आरती और सरल वंदना से इनका पूजन करें; विशेषतः शनिवार को इनकी पूजा का विशेष महत्व बना माना जाता है। नीचे आरती को दोहा‑शैली में प्रस्तुत किया गया है — श्रद्धा सहित पढ़ें या गायें।

महागौरी माता आरती (Mahagauri Mata Aarti)

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॥ आरती — देवी महागौरी जी की (दोहा‑शैली) ॥

जय महागौरी, जग की माया, जय उमा भवानी, जय महामाया।
(जय महागौरी माता॥)

हरिद्वार‑कनखल के पासा, महागौरी तेरा वहाँ निवासा।
(जय महागौरी माता॥)

चन्द्रकली और ममता अम्बे, जय शक्ति, जय माता जगदम्बे।
(जय महागौरी माता॥)

भीमा देवी, विमला माता, कौशिक देवी, जग विख्याता।
(जय महागौरी माता॥)

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा, महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।
(जय महागौरी माता॥)

सती हवन कुंड में जलाया, उसी धुएँ ने रूप काली बनाया।
(जय महागौरी माता॥)

बना धर्म सिंह जो सवारी, शंकर ने त्रिशूल दिखलाया।
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया, शरण आने वाले का संकट मिटाया॥
(जय महागौरी माता॥)

शनिवार को तेरी पूजा जो करता, माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।
(जय महागौरी माता॥)

भक्त बोलो, सोच क्या रहे हो, महागौरी माँ तेरी हरदम जय हो।
(जय महागौरी माता॥)

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