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श्री जगन्नाथ आरती | Shree Jagannath (Puri) Aarti

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परिचय

पुरी के श्रीमंदिर में विराजमान श्री जगन्नाथ, बलीभद्रा और सुभद्रा त्रिमूर्ति के रूप में भक्तों के अतिप्रिय हैं। जगन्नाथ को विष्णु/कृष्ण का लोकजीवित रूप माना जाता है और यहाँ की रथयात्रा (Rath Yatra) पूरे विश्व में श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। आरती‑समय भक्ति, शंख‑ध्वनि और भजन‑कीर्तन से मंदिर का वातावरण गंगाजल‑सा पवित्र हो उठता है; भक्त यहाँ प्रेम, तर्पण और मोक्ष की कामना लेकर आते हैं।

श्री जगन्नाथ आरती | Shree Jagannath (Puri) Aarti

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॥ आरती — श्री जगन्नाथ महाराज ॥

जय जगन्नाथ महाराज, जय बालभद्र सखा प्यारे।
सुभद्रा माता संग तेरे, त्रिमूर्ति की रति न्यारे।
ओं नमो नारायणाय, हरि कृपा करो हमारी।
रथ की ध्वनि, भजन गायें, गूँजे मंदिर में पुनीत वाणी॥

तेरा चक्र, तेरी शंखनाद, जग में करे करुणा प्रकाश।
भक्तों का तू पालनकर्ता, हर संकट करो विहीन आज।
दीप जलाएँ, दिये चमकाएँ, पुष्प अर्पित मन से हम।
तुम कर दया, तुम कर उद्धार, कर दे जीवन उन्नम॥

रथयात्रा की धूप‑छाँव में, तेरी महिमा अनंत भारी।
जो तेरे चरणों में गिर पड़े, पावें पापों का क्षय सारी।
जय श्री जगन्नाथ महाराज — कर दे सबको कल्याण।
जय जय जगन्नाथ — हरि बोल, गोविंद बोल, जय श्री नाथ ध्वनि लहान॥