होम / Aarti / कालरात्रि माता आरती (Kalaratri Mata Aarti)

कालरात्रि माता आरती - भय और अज्ञान के नाश की आराधना

माँ कालरात्रि नवरात्रि के सप्तम दिन पूजित महाशक्ति हैं। उनकी आरती करने से भय, नकारात्मक शक्तियाँ और मानसिक दुर्बलता दूर होती है। भक्तों को साहस, सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करने वाली यह स्तुति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 2910
📖

परिचय

देवी कालरात्रि नवरात्रि के सप्तम दिन की आराध्या हैं — शिवपार्वती का भीषण, कालरूपी रूप जो अज्ञान, भय और दुष्ट शक्तियों का नाश कर सत्साधकों की रक्षा करती हैं। उनका रूप भयंकर पर उद्देश्य करुणामयी है: वे अंधकार से बुद्धि को प्रकाशित कर, भय हटाकर भक्तों में साहस, स्थिरता और संकटमोचन का आभास कराती हैं। श्रद्धा‑भक्ति, दीप‑आरती और ध्यान से इनकी पूजा करने पर मानसिक दृढता, रक्षक‑आश्वासन और अराजक‑बलों से मुक्ति की अनुभूति होती है — इसलिए नवरात्रि के सातवें दिन विशेष विधि से इनका पूजन किया जाता है।

कालरात्रि माता आरती (Kalaratri Mata Aarti)

PDF

॥ आरती — देवी कालरात्रि जी की (दोहा‑शैली) ॥

कालरात्रि जय‑जय महाकाली, काल के मुख से बचाने वाली।
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा, महाचंडी तेरा अवतारा॥
जय कालरात्रि माता॥

पृथ्वी आकाश पर सारा, महाकाली है तेरा पसारा।
खड्ग खप्पर धर रखे हाथ, दुष्टों का लहू चखने वाली॥
जय कालरात्रि माता॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा, सब जगह दिखे तेरा नजारा।
सभी देवता, सब नर‑नारी, गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
जय कालरात्रि माता॥

रक्तदन्ता, अन्नपूर्णा तू, कृपा कर दे हर दुःख हारा।
ना कोई चिंता, ना बीमारी, न रहे गम, न संकट भारी॥
जय कालरात्रि माता॥

जिसे माता करे बचाविनी, उस पर कदापि कष्ट न आवे।
महाकाली माँ जिसकी रक्षा, वह सुख‑सम्पन्न सदा वावे॥
जय कालरात्रि माता॥

तू भी भक्तों से प्रेम पुकार, हम सब कहें तेरी जयकार।
कालरात्रि माँ तेरी जय, कर दे कृपा, भजें तेरी धार॥
जय कालरात्रि माता॥

📢 शेयर करें