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शैलपुत्री माता आरती (Shailputri Mata Aarti)

Aarti Goddesses Aarti Navadurga Aarti Collection
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परिचय

शैलपुत्री माता नवरात्रि की पहली देवी हैं और इन्हें शक्ति का स्थिर, धरातलीय रूप माना जाता है। वे पर्वत की कन्या—शिला की पुत्री—हैं और साधना के प्रारम्भिक, ठोस आधार का प्रतीक हैं। पहले दिन उनकी पूजा करने का उद्देश्य मन‑चित्त को एकाग्र कर आध्यात्मिक मार्ग का आरंभ करना तथा जीवन में धैर्य, स्थिरता और आत्मिक बल प्राप्त करना है। शैलपुत्री की आराधना में सरलता और श्रद्धा का बड़ा महत्व है—घी का दीया, पुष्प, दूध/पयः, फल और जप/ध्यान से उनकी कृपा मिलती है। नीचे आरती को दोहा‑शैली में व्यवस्थित किया गया है—श्रद्धा के साथ पढ़िए या गायिए।

शैलपुत्री माता आरती (Shailputri Mata Aarti)

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॥ आरती — देवी शैलपुत्री जी (दोहा‑शैली) ॥

शैलपुत्री माँ बैल असवार, करें देवता जय‑जयकार।
शिव‑शंकर की प्रिय भवानी, तेरी महिमा किसी ने न जानी॥

पार्वती तू उमा कहलावें, जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें।
रिद्धि‑सिद्धि परवान करै तू, दया करै धनवान करै तू॥

सोमवार को शिव संग प्यारी, आरती जिसने तेरी उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो, सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो॥

घी का सुन्दर दीप जला के, गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें, प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥

जय गिरिराज किशोरी अम्बे, शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे।
मनोकामना पूर्ण कर दो, चमन सदा सुख‑सम्पत्ति भर दो॥