देवप्रयाग | गंगा का जन्म स्थल - पंच प्रयाग
देवप्रयाग पंच प्रयाग का पांचवां संगम। सबसे पवित्र। अलकनंदा और भागीरथी मिलकर गंगा बनती है। 618 मीटर ऊंचाई। रघुनाथ मंदिर 10,000 वर्ष पुराना...
पढ़ें →पंच प्रयाग उत्तराखंड में स्थित वे पांच पवित्र स्थल हैं जहां अलकनंदा नदी अन्य नदियों से मिलकर आगे बढ़ती है। ये पांच संगम स्थल हैं - विष्णुप्रयाग (अलकनंदा और धौलीगंगा का संगम), नंदप्रयाग (अलकनंदा और नंदाकिनी का संगम), कर्णप्रयाग (अलकनंदा और पिंडर का संगम), रुद्रप्रयाग (अलकनंदा और मंदाकिनी का संगम) और देवप्रयाग (अलकनंदा और भागीरथी का संगम - यहीं से गंगा नाम मिलता है)। देवप्रयाग सबसे पवित्र माना जाता है क्योंकि यहीं से गंगा का जन्म होता है। प्रत्येक प्रयाग का अपना धार्मिक महत्व है। पंच प्रयाग की यात्रा केदारनाथ और बद्रीनाथ जाते समय की जाती है। इन संगमों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
देवप्रयाग पंच प्रयाग का पांचवां संगम। सबसे पवित्र। अलकनंदा और भागीरथी मिलकर गंगा बनती है। 618 मीटर ऊंचाई। रघुनाथ मंदिर 10,000 वर्ष पुराना...
पढ़ें →रुद्रप्रयाग पंच प्रयाग का चौथा संगम। 895 मीटर ऊंचाई। अलकनंदा और मंदाकिनी मिलन। शिव ने नारद को संगीत सिखाया। रुद्रनाथ मंदिर यहां। केदा...
पढ़ें →कर्णप्रयाग पंच प्रयाग का तीसरा संगम। 840 मीटर ऊंचाई। अलकनंदा और पिंडर मिलन। कर्ण की तपोभूमि। उमा देवी मंदिर। बद्रीनाथ-केदारनाथ जंक्श...
पढ़ें →नंदप्रयाग पंच प्रयाग का दूसरा संगम। 900 मीटर पर। अलकनंदा और नंदाकिनी मिलन। राजा नंद के नाम पर। गोपाल मंदिर यहां। कर्णप्रयाग से 21 किमी। ...
पढ़ें →विष्णुप्रयाग पंच प्रयाग का पहला संगम है। 1,372 मीटर की ऊंचाई पर। अलकनंदा और धौलीगंगा का मिलन। सबसे ऊंचा प्रयाग। विष्णु मंदिर यहां है। जो...
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