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ब्रह्मचारिणी माता आरती - तप और संयम की देवी की आराधना

माँ ब्रह्मचारिणी नवरात्रि के द्वितीय दिन पूजित देवी हैं। उनकी आरती से आत्मसंयम, ज्ञान और कठिन कार्यों में सफलता मिलती है। श्रद्धा और विश्वास से किया गया यह पाठ जीवन को सही दिशा देता है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 1408
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परिचय

देवी ब्रह्मचारिणी नवरात्रि के दूसरे दिन पूजनीय हैं; वे तप, ब्रह्मचर्य और स्थिर भाव की प्रतिमा हैं। उनकी आराधना आत्म‑नियंत्रण, दृढता और ज्ञान की प्राप्ति के लिए की जाती है। श्रद्धा‑भाव से उनका जप और पूजा करने से संयम, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन के कठिन कार्यों में सफलता की प्राप्ति का विश्वास होता है। नीचे आरती को दोहा‑शैली में प्रस्तुत किया गया है — श्रद्धा से पढ़ें या गायें।

ब्रह्मचारिणी माता आरती (Brahmacharini Mata Aarti)

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॥ आरती — देवी ब्रह्मचारिणी जी की ॥

जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता, जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो, ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
जय ब्रह्मचारिणी माता॥

ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा, जिसको जपे सरल संसार।
जो जपे मन से तुझको भज, संकट छूटे और सुख उपकार॥
जय ब्रह्मचारिणी माता॥

जय गायत्री वेद की माता, जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए, कोई भी दुख सहने न पाए॥
जय ब्रह्मचारिणी माता॥

उसकी विरति रहे ठिकाने, जो तेरी महिमा को जाने।
रद्रक्षा की माला ले कर, जपे जो मन्त्र श्रद्धा दे कर॥
जय ब्रह्मचारिणी माता॥

आलस छोड़ करे गुणगाना, माँ तुम उसको सुख पहुँचाना।
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम, पूर्ण करो सब मेरे काम॥
जय ब्रह्मचारिणी माता॥

भक्त तेरे चरणों का पुजारी, रखना लाज मेरी महतारी।
श्रद्धा भाव से शीश निहोरो, दया कर माँ स्वीकार करो प्यारी॥
जय ब्रह्मचारिणी माता॥

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