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छठी मैया की आरती — जय छठी मैया

छठ महापर्व में संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के बाद घाट पर और घर में छठी मैया की आरती गाई जाती है। यहाँ छठी मैया की प्रचलित आरती पूरे बोल के साथ दी गई हैं, ताकि आप पूरी श्रद्धा से माँ की आराधना कर सकें।

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🌅 छठ पूजा (छठ महापर्व)
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परिचय

छठी मैया को षष्ठी देवी भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार वे प्रकृति का छठा अंश हैं और संतान की रक्षा करने वाली, उसे दीर्घायु और आरोग्य देने वाली देवी हैं। लोक मान्यता में उन्हें सूर्य देव की बहन माना जाता है, इसीलिए छठ महापर्व में सूर्य देव के साथ छठी मैया की पूजा की जाती है।

आरती कब करें: छठ में आरती मुख्य रूप से संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) और उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) के बाद घाट पर की जाती है। खरना की पूजा के बाद और कोसी भरते समय भी घर पर आरती गाई जाती है।

आरती की विधि: सूप में रखे घी के दीपक या कपूर से आरती करें। आरती को पहले छठी मैया और सूर्य देव के चरणों की ओर, फिर पूरे स्वरूप की ओर घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएं। आरती के बाद दीपक की लौ पर दोनों हाथ घुमाकर आंखों और माथे से लगाएं, फिर परिवार के सभी सदस्यों को आरती दें। आरती के बाद ठेकुआ और फल का प्रसाद बांटें।

नीचे छठी मैया की दोनों प्रचलित आरतियां दी गई हैं। आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कोई एक या दोनों आरतियां गा सकते हैं।

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छठी मैया की आरती (Chhathi Maiya Ki Aarti)

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छठ मैय्या की आरती | Chhathi Maiya Ki Aarti Lyrics

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

 

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥

 

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

 

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

 

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

 

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥

 

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

 

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

 

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

बोलो छठी मैया की जय! सूर्य देव की जय!

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