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कूष्माण्डा माता आरती - ऊर्जा और आरोग्य की देवी की स्तुति

माँ कूष्माण्डा नवरात्रि के चौथे दिन पूजित देवी हैं, जिनकी मुस्कान से सृष्टि का सृजन हुआ माना जाता है। उनकी आरती से स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मबल में वृद्धि होती है। श्रद्धा से किया गया यह पाठ जीवन में उत्साह भर देता है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 3530
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परिचय

श्री कूष्मण्डा माता नवरात्रि के चौथे दिन की पूजनीय देवी हैं। परंपरा में उन्हें ब्रह्मांड की सृष्टि के साथ जोड़ा जाता है — कहा जाता है कि उनकी मुस्कान से सृष्टि का जन्म हुआ; इसलिए वे जीवन में ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य और समृद्धि देने वाली मानी जाती हैं। कूष्मण्डा की आराधना करने से शारीरिक और मानसिक शक्ति, रोगनिवारण तथा अन्दर की उज्ज्वलता बढ़ती है; साधक उन्हें घी का दीप, पुष्प और भोग अर्पित कर मनोभाव से जप करते हैं। श्रद्धा‑भाव से पढ़ने पर यह आरती भक्तों में आशा, उत्साह और कार्यसिद्धि की भावना जगाती है।

कूष्माण्डा माता आरती (Kushmanda Mata Aarti)

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॥ आरती — देवी कूष्मण्डा जी की (दोहा‑शैली) ॥

कूष्मण्डा जय जग सुखदानी, मुझ पर दया करो महारानी।
पिङ्गला ज्वालामुखी निराली, शाकम्बरी माँ भोली भाली॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥

लाखों नाम निराले तेरे, भक्त कई मतवाले तेरे।
भीमा पर्वत पर है डेरा, स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥

सबकी सुनती हो जगदम्बे, सुख पहुँचती हो माँ अम्बे।
तेरे दर्शन का मैं प्यासा, पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥

माँ के मन में ममता भारी, क्यों ना सुनेगी अरज हमारी।
तेरे दर पर किया है डेरा, दूर करो माँ संकट मेरा॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥

मेरे कारज पूरे कर दो, मेरे तुम भंडारे भर दो।
तेरा दास तुझे ही ध्याए, भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥

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