होम / Aarti / कात्यायनी माता आरती (Katyayani Mata Aarti)

कात्यायनी माता आरती - साहस और विजय की देवी की स्तुति

माँ कात्यायनी नवरात्रि के छठे दिन पूजित शक्ति स्वरूप हैं। उनकी आरती करने से साहस, आत्मबल और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। श्रद्धा से की गई यह आराधना जीवन की कठिनाइयों को सरल बनाती है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 4593
📖

परिचय

देवी कात्यायनी नौ रूपों में से छठी प्रतिष्‍ठित मूर्ति हैं — वे साहस, संरक्षा और दृढ़ श्रद्धा की प्रतिक हैं। नवरात्रि के छठे दिन उनकी पूजा करने का अर्थ है जीवन में आत्मबल, विपत्ति से मुक्ति और मनोकामना‑सिद्धि की कामना। पारंपरिक रूप से कात्यायनी की अराधना विशेषकर बृहस्पतिवार को कर भाव, ध्यान और निष्ठा के साथ की जाती है; वे दुष्टों का संहार कर, भक्तों को स्थिरता और समृद्धि प्रदान करती हैं। श्रद्धा और भक्ति से पढ़ी गई यह आरती माँ की करुणा, दुःख निवारण और सर्वत्र कल्याण को स्मरण कराती है — इसे मनोभाव से गाइए या सुनाइए।

कात्यायनी माता आरती (Katyayani Mata Aarti)

PDF

॥ आरती — देवी कात्यायनी जी (दोहा‑शैली) ॥

जय जय अम्बे, जय कात्यायनी, जय जग माता, जग की महारानी।
(जय कात्यायनी माता॥)

बैजनाथ स्थान तुम्हारा, वहावर दाती नाम पुकारा।
(जय कात्यायनी माता॥)

कई नाम है, कई धाम है, यह स्थान भी तो सुखधाम है।
(जय कात्यायनी माता॥)

हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी, कही योगेश्वरी महिमा न्यारी।
(जय कात्यायनी माता॥)

हर जगह उत्सव होते रहते, हर मन्दिर में भगत हैं कहते।
(जय कात्यायनी माता॥)

कात्यायनी रक्षक काया की, ग्रंथि काटे मोह माया की।
(जय कात्यायनी माता॥)

झूठे मोह से छुड़ाने वाली, अपना नाम जपाने वाली।
(जय कात्यायनी माता॥)

बृहस्पतिवार को पूजा करिए, ध्यान कात्यायनी का धरिये।
(जय कात्यायनी माता॥)

हर संकट को दूर करेगी, भंडारे भरपूर करेगी।
(जय कात्यायनी माता॥)

जो भी माँ को भक्त पुकारे, कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
(जय कात्यायनी माता॥)

📢 शेयर करें