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मकर संक्रांति 2027: पुण्य काल, स्नान-दान विधि, सूर्य अर्घ्य, तिल-गुड़-खिचड़ी का महत्व और कथा

मकर संक्रांति वह पावन दिन है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं। इसी दिन से खरमास समाप्त होता है, दिन बड़े होने लगते हैं और सभी शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। यह देश का एकमात्र बड़ा त्योहार है जो चंद्रमा नहीं, सूर्य की गति पर आधारित है। इस पेज पर पुण्य काल, स्नान-दान और सूर्य पूजा की विधि, तिल-गुड़-खिचड़ी की परंपरा, कथाएं और देश भर में इस पर्व के अलग-अलग रूपों की पूरी जानकारी दी गई है।

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तारीख 15 जनवरी 2027, शुक्रवार
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हिंदू तिथि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (उत्तरायण आरंभ)
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शुभ मुहूर्त पुण्य काल 15 जनवरी सूर्योदय (~07:15 AM) से | स्नान-दान सुबह से दोपहर ~12:30 तक उत्तम
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पूज्य देवता सूर्य देव, शनि देव, भगवान विष्णु
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परिचय

मकर संक्रांति मुख्य रूप से सूर्य देव की उपासना का पर्व है। इस दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य, तिल-गुड़ और खिचड़ी का भोग व दान किया जाता है। उत्तर भारत में इसके बाद पतंग उड़ाने और तिल के लड्डू बांटने की परंपरा है।

नीचे पुण्य काल में की जाने वाली पूरी विधि — स्नान, सूर्य पूजा, दान और भोग — क्रम से दी गई है। नदी तक न जा सकें तो घर पर ही स्नान और पूजा करने का तरीका भी बताया गया है।

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मकर संक्रांति (उत्तरायण) का महत्व

मकर संक्रांति 2027 कब है?

वर्ष 2027 में मकर संक्रांति का पर्व शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं।

  • सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति क्षण): 14 जनवरी 2027, रात लगभग 09:06 बजे (सूर्यास्त के बाद)
  • पुण्य काल प्रारंभ: 15 जनवरी 2027, सुबह लगभग 07:15 बजे (सूर्योदय से)
  • महापुण्य काल: 15 जनवरी की सुबह, सूर्योदय के बाद के लगभग पहले दो घंटे (उज्जैन के अनुसार सुबह 07:14 से 09:02 तक)
  • स्नान-दान का सबसे उत्तम समय: 15 जनवरी की सुबह, सूर्योदय से दोपहर लगभग 12:30 बजे तक

पुण्य काल समाप्त होने के समय को लेकर पंचांगों में थोड़ा अंतर है, इसलिए स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान सुबह के समय ही कर लेना सबसे सुरक्षित और शुभ है। सूर्योदय का समय हर शहर में अलग होता है — अपने शहर के सूर्योदय से पुण्य काल की शुरुआत मानें।

14 जनवरी या 15 जनवरी — मकर संक्रांति किस दिन?

2027 में सूर्य 14 जनवरी की रात को, सूर्यास्त के बाद मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पंचांग का नियम है कि यदि संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो, तो उसका स्नान, दान और पूजन अगले दिन सूर्योदय से किया जाता है। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व, स्नान और दान 15 जनवरी, शुक्रवार को होगा। कुछ कैलेंडरों और ऑफिस छुट्टियों की सूची में 14 जनवरी लिखा मिल सकता है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से 15 जनवरी ही सही है।

इसी समय के अन्य पर्व (2027)

  • लोहड़ी (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली): गुरुवार, 14 जनवरी 2027
  • भोगी पोंगल (तमिलनाडु): गुरुवार, 14 जनवरी
  • थाई पोंगल (तमिलनाडु): शुक्रवार, 15 जनवरी
  • मट्टू पोंगल: शनिवार, 16 जनवरी
  • उत्तरायण (गुजरात), माघ बिहू (असम), खिचड़ी (उत्तर प्रदेश-बिहार), पौष संक्रांति (बंगाल): मकर संक्रांति के साथ

मकर संक्रांति का महत्व

"संक्रांति" का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना। वर्ष में बारह संक्रांतियां होती हैं, लेकिन मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं — यानी उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ने लगते हैं।

  • उत्तरायण — देवताओं का दिन: शास्त्रों में उत्तरायण के छह महीनों को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है। भगवद गीता में भी उत्तरायण को प्रकाश और शुभता का समय बताया गया है।
  • खरमास का समापन: धनु संक्रांति से शुरू हुआ लगभग एक महीने का खरमास (मलमास) मकर संक्रांति पर समाप्त होता है। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं।
  • प्रकृति और फसल का पर्व: इस समय रबी की फसल लहलहाती है और गन्ना, तिल, मूंगफली की नई फसल आती है। इसलिए यह किसानों के लिए धन्यवाद और खुशी का पर्व है।
  • दिन बड़े होने लगते हैं: सर्दी का प्रभाव कम होने लगता है और ऊर्जा व प्रकाश बढ़ता है।
  • दान का महापर्व: मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान सौ गुना होकर लौटता है।

मकर संक्रांति की पौराणिक कथाएं

1. सूर्य देव और शनि देव का मिलन

मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो सूर्य देव के पुत्र हैं। पिता-पुत्र के बीच मतभेद होने के कारण दोनों में दूरी थी। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव स्वयं अपने पुत्र शनि के घर (मकर राशि) एक महीने के लिए जाते हैं। शनि देव ने काले तिल से अपने पिता का स्वागत किया था, जिससे सूर्य देव प्रसन्न हुए। इसीलिए इस दिन तिल का विशेष महत्व है और यह पर्व पिता-पुत्र के रिश्तों में मधुरता का संदेश देता है।

2. भागीरथ और गंगा सागर

राजा भागीरथ ने अपने साठ हज़ार पूर्वजों (राजा सगर के पुत्रों) की मुक्ति के लिए कठोर तप करके माँ गंगा को पृथ्वी पर उतारा। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भागीरथ के पीछे-पीछे चलते हुए कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में मिल गईं और सगर पुत्रों का उद्धार हुआ। इसीलिए इस दिन पश्चिम बंगाल के गंगा सागर में स्नान का विशेष महत्व है — कहा जाता है "सारे तीर्थ बार-बार, गंगा सागर एक बार"।

3. भीष्म पितामह का देह त्याग

महाभारत में भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान था। बाणों की शैय्या पर लेटे हुए भी उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की और उत्तरायण में ही देह त्यागी, क्योंकि मान्यता है कि उत्तरायण में देह त्यागने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

4. भगवान विष्णु द्वारा असुरों का अंत

पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर असुरों के आतंक को समाप्त कर उनके सिरों को मंदार पर्वत के नीचे दबा दिया था। इसलिए यह दिन बुराई के अंत और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक भी है।

तिल, गुड़ और खिचड़ी का महत्व

  • तिल: शनि देव द्वारा सूर्य देव के स्वागत की कथा के कारण तिल इस पर्व का मुख्य अंग है। आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में तिल शरीर को गर्मी और ऊर्जा देता है।
  • गुड़: मिठास और रिश्तों में मधुरता का प्रतीक। महाराष्ट्र में तिल-गुड़ देते हुए कहा जाता है — "तिळगुळ घ्या, गोड गोड बोला" (तिल-गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो)।
  • खिचड़ी: उत्तर प्रदेश और बिहार में इस पर्व को "खिचड़ी" ही कहा जाता है। नए चावल और उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर पहले भगवान को भोग लगाया जाता है और फिर दान की जाती है। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में इस दिन बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की प्रसिद्ध परंपरा है।

देश भर में मकर संक्रांति के रूप

  • गुजरात — उत्तरायण: पूरा राज्य पतंगबाज़ी से रंगीन हो जाता है। अहमदाबाद का अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव प्रसिद्ध है। उंधियू और चिक्की खाई जाती है।
  • पंजाब-हरियाणा — लोहड़ी और माघी: संक्रांति से एक रात पहले अलाव जलाकर उसमें तिल, मूंगफली, रेवड़ी और मक्का डाली जाती है, और भांगड़ा-गिद्दा होता है। अगले दिन माघी मनाई जाती है।
  • तमिलनाडु — पोंगल: चार दिन का पर्व — भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल (गायों की पूजा) और कानुम पोंगल। नए चावल और दूध से "पोंगल" बनाकर उबाला जाता है।
  • असम — माघ बिहू (भोगाली बिहू): "मेजी" (अलाव) जलाई जाती है और सामूहिक भोज होता है।
  • उत्तर प्रदेश-बिहार — खिचड़ी: गंगा स्नान, खिचड़ी का भोग और दान, तिलकुट और दही-चूड़ा।
  • पश्चिम बंगाल — पौष संक्रांति: गंगा सागर मेला और "पीठे" (चावल के आटे की मिठाई)।
  • महाराष्ट्र: तिल-गुड़ के लड्डू बांटना और सुहागिन महिलाओं का "हल्दी-कुमकुम" कार्यक्रम।
  • कर्नाटक — सुग्गी / संक्रांति: "एल्लु-बेल्ला" (तिल, गुड़, नारियल, मूंगफली का मिश्रण) बांटा जाता है।
  • उत्तराखंड — घुघुतिया / उत्तरायणी: आटे और गुड़ के "घुघुते" बनाकर कौवों को खिलाए जाते हैं।
  • प्रयागराज — माघ मेला: संगम पर मकर संक्रांति का स्नान माघ मेले का प्रमुख स्नान पर्व होता है।
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पूजा सामग्री

स्नान और सूर्य अर्घ्य के लिए

  • गंगाजल (घर पर स्नान करने वालों के लिए)
  • काले तिल (नहाने के पानी में डालने और अर्घ्य के लिए)
  • तांबे का लोटा (सूर्य अर्घ्य के लिए)
  • लाल चंदन या रोली, अक्षत (साबुत चावल)
  • लाल फूल (गुड़हल / कनेर)
  • गुड़ का छोटा टुकड़ा (अर्घ्य के जल में)

पूजन सामग्री

  • लकड़ी की चौकी और लाल कपड़ा
  • सूर्य देव का चित्र या तांबे का सूर्य यंत्र
  • घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, कपूर
  • रोली, हल्दी, अक्षत, मौली
  • फूल और फूलमाला
  • भगवान विष्णु / शनि देव का चित्र (वैकल्पिक)

भोग और प्रसाद

  • खिचड़ी (नए चावल और काली उड़द की दाल)
  • तिल के लड्डू, तिल-गुड़ की गजक, रेवड़ी, तिलकुट
  • मूंगफली, गन्ना, गुड़
  • दही-चूड़ा (बिहार-पूर्वी उत्तर प्रदेश की परंपरा)
  • घी

दान के लिए

  • काले तिल और तिल के लड्डू
  • गुड़
  • कच्ची खिचड़ी (चावल + उड़द दाल), नमक, घी
  • कंबल और गर्म कपड़े
  • अन्न, फल, दक्षिणा
  • गाय के लिए हरा चारा और गुड़
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पूजा विधि

चरण 1: पुण्य काल में स्नान (15 जनवरी, सूर्योदय से)

  • 15 जनवरी को सूर्योदय से पहले उठें।
  • संभव हो तो गंगा, यमुना, संगम, गंगा सागर, नर्मदा या किसी पवित्र नदी / सरोवर में स्नान करें।
  • घर पर स्नान कर रहे हों तो नहाने के पानी में गंगाजल और थोड़े काले तिल मिला लें। मकर संक्रांति पर तिल मिले जल से स्नान का विशेष महत्व है।
  • स्नान करते समय यह मंत्र बोलें:
    गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
  • स्नान के बाद साफ़ या नए वस्त्र पहनें। पीले या लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

चरण 2: सूर्य देव को अर्घ्य (महापुण्य काल में — सूर्योदय के बाद पहले दो घंटे)

  • तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल चंदन या रोली, अक्षत, लाल फूल, काले तिल और गुड़ का छोटा टुकड़ा डालें।
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और लोटे को दोनों हाथों से छाती के सामने ऊंचा उठाकर धीरे-धीरे जल की धारा गिराते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल की धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें।
  • अर्घ्य देते समय यह मंत्र बोलें:
    ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
    या सरल मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नमः / ॐ सूर्याय नमः
  • अर्घ्य के बाद अपने स्थान पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें और सूर्य देव को प्रणाम करें।

चरण 3: सूर्य देव की पूजा और संकल्प

  • पूजा स्थान पर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सूर्य देव का चित्र या सूर्य यंत्र स्थापित करें।
  • हाथ में जल, अक्षत, तिल और फूल लेकर संकल्प लें — "मैं (अपना नाम) आज मकर संक्रांति के पुण्य काल में सूर्य देव की कृपा, आरोग्य, सुख-समृद्धि और पापों के नाश के लिए स्नान, पूजन और दान कर रहा/रही हूँ।"
  • सूर्य देव को रोली, लाल चंदन, अक्षत, लाल फूल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं।
  • सूर्य के 12 नाम का जाप करें: ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः।
  • संभव हो तो आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का पाठ करें।
  • सूर्य देव की आरती करें।

चरण 4: खिचड़ी और तिल-गुड़ का भोग

  • नए चावल और काली उड़द की दाल की खिचड़ी बनाएं और उसमें घी डालें।
  • खिचड़ी, तिल के लड्डू, गुड़ और गन्ने का भोग सूर्य देव और भगवान विष्णु को लगाएं।
  • भोग में तुलसी दल रखें (भगवान विष्णु के लिए)।

चरण 5: दान (पुण्य काल में ही)

  • भोग के बाद कच्ची खिचड़ी (चावल + उड़द दाल), काले तिल, गुड़, घी, नमक और तिल के लड्डू एक थाली में रखकर ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को दान करें।
  • सर्दी के मौसम को देखते हुए कंबल और गर्म कपड़ों का दान विशेष पुण्यदायी है।
  • गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाएं, पक्षियों को दाना डालें।
  • मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान सौ गुना फल देता है, इसलिए श्रद्धा से, बिना दिखावे के दान करें।

चरण 6: परिवार के साथ उत्सव

  • परिवार के साथ खिचड़ी (या दही-चूड़ा) का प्रसाद ग्रहण करें।
  • बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें और तिल-गुड़ के लड्डू बांटें — "तिल-गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो"।
  • दोपहर में पतंग उड़ाने की परंपरा है — सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
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व्रत के नियम

✅ मकर संक्रांति पर क्या करें

  • पुण्य काल (15 जनवरी की सुबह) में ही स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान करें।
  • नहाने के पानी में तिल डालें और तिल का दान अवश्य करें।
  • तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • खिचड़ी बनाकर भोग लगाएं और कच्ची खिचड़ी का दान करें।
  • ज़रूरतमंदों को कंबल और गर्म कपड़े दान करें।
  • गाय, पक्षियों और जीव-जंतुओं को भोजन दें।
  • बड़ों का आशीर्वाद लें और सबके साथ मीठा बोलें।
  • पतंग उड़ाते समय सूती धागे का प्रयोग करें और छत पर सावधानी बरतें।

❌ मकर संक्रांति पर क्या न करें

  • सुबह स्नान से पहले कुछ भी न खाएं।
  • इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • किसी का अपमान, झगड़ा और कटु वचन न बोलें — यह मधुरता का पर्व है।
  • दान मांगने आए व्यक्ति को खाली हाथ न लौटाएं।
  • चाइनीज़ / नायलॉन / कांच लगे मांझे का प्रयोग न करें — यह पक्षियों और लोगों के लिए जानलेवा है और कई राज्यों में प्रतिबंधित भी है।
  • बिजली के तारों के पास पतंग न उड़ाएं और बच्चों को छत की मुंडेर पर अकेला न छोड़ें।
  • सुबह-शाम के समय (जब पक्षी ज़्यादा उड़ते हैं) पतंग उड़ाने से बचें।
  • पेड़ों पर अटकी पतंग या मांझा निकालने के लिए असुरक्षित तरीके से न चढ़ें।
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मकर संक्रांति (उत्तरायण) — आरती

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Hinglish

Makar Sankranti 2027 kab hai? Shukravar, 15 January 2027. Surya 14 January ki raat lagbhag 09:06 baje Makar rashi mein pravesh karenge, isliye snaan-daan ka punya kaal 15 January subah lagbhag 07:15 baje (suryoday) se shuru hoga.

14 ya 15 January? Sankranti suryast ke baad ho rahi hai, isliye panchang ke niyam se snaan, daan aur puja agle din 15 January ko hogi. Lohri 14 January ko hai.

Puja vidhi: Subah gangajal aur kaale til wale paani se snaan karein. Taambe ke lote mein jal, roli, laal phool, til aur gud daalkar Surya dev ko arghya dein aur "Om Ghrini Suryaya Namah" bolein. Surya ke 12 naam ya Aditya Hridaya Stotra padhein.

Bhog aur daan: Naye chawal aur urad daal ki khichdi, til ke laddu aur gud ka bhog lagayein. Kachchi khichdi, til, gud, ghee aur kambal ka daan karein, gaay ko chaara aur gud khilayein.

Dhyan rakhein: Chinese ya kaanch wala manjha use na karein, bijli ke taaron ke paas patang na udayein aur bachchon ka dhyan rakhein.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मकर संक्रांति 2027 कब है?

मकर संक्रांति 2027 में शुक्रवार, 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

मकर संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को?

2027 में सूर्य 14 जनवरी की रात सूर्यास्त के बाद मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पंचांग के नियम के अनुसार सूर्यास्त के बाद संक्रांति होने पर स्नान-दान अगले दिन होता है, इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को है।

मकर संक्रांति 2027 का पुण्य काल क्या है?

पुण्य काल 15 जनवरी को सूर्योदय (लगभग 07:15 बजे) से शुरू होगा। स्नान, अर्घ्य और दान सुबह से दोपहर लगभग 12:30 बजे के बीच कर लेना सबसे उत्तम है। सूर्योदय के बाद के पहले लगभग दो घंटे महापुण्य काल माने जाते हैं।

सूर्य मकर राशि में कब प्रवेश करेंगे?

सूर्य 14 जनवरी 2027 को रात लगभग 09:06 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

लोहड़ी 2027 कब है?

लोहड़ी 2027 गुरुवार, 14 जनवरी को है।

पोंगल 2027 कब है?

भोगी पोंगल 14 जनवरी, थाई पोंगल 15 जनवरी और मट्टू पोंगल 16 जनवरी 2027 को है।

मकर संक्रांति पर तिल का दान क्यों करते हैं?

मान्यता है कि शनि देव ने अपने पिता सूर्य देव का स्वागत काले तिल से किया था। इसलिए इस दिन तिल से स्नान, तिल का भोग और तिल का दान करने से सूर्य और शनि दोनों की कृपा मिलती है।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों खाते हैं?

नए चावल और उड़द दाल की खिचड़ी नई फसल और सादगी का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश और बिहार में यह पर्व "खिचड़ी" के नाम से ही जाना जाता है और खिचड़ी का भोग व दान किया जाता है।

उत्तरायण का क्या अर्थ है?

उत्तरायण यानी सूर्य का उत्तर दिशा की ओर बढ़ना। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं, दिन बड़े होने लगते हैं और शास्त्रों में इस अवधि को देवताओं का दिन कहा गया है।

खरमास कब समाप्त होगा?

खरमास (मलमास) मकर संक्रांति पर समाप्त होता है। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं।

मकर संक्रांति पर क्या दान करें?

काले तिल, गुड़, कच्ची खिचड़ी (चावल और उड़द दाल), घी, नमक, कंबल, गर्म कपड़े और अन्न का दान करना शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते हैं?

मकर संक्रांति पर सुबह की धूप में समय बिताना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है और पतंग उड़ाना खुशी और उत्सव का प्रतीक है। गुजरात में उत्तरायण पर पतंगबाज़ी सबसे बड़ी परंपरा है।

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