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जय अम्बे गौरी – माता की महिमा

जय अम्बे गौरी आरती माँ दुर्गा की करुणा और शक्ति का गुणगान करती है। यह आरती भक्तों की रक्षा करती है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 1109
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परिचय

जय अम्बे गौरी की आरती माँ अम्बे (दुर्गा/गौरी) की महिमा और शक्ति‑पूजन का सुंदर भक्ति‑पाठ है। इसमें माता के शौर्य, करुणा और रक्षक स्वरूप का वर्णन है — दु:ख निवारण, समृद्धि और मनोकामना‑सिद्धि की प्रार्थना व्यक्त की जाती है। श्रद्धा‑भाव से आरती करने पर भक्तों को मानसिक शान्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक बल की अनुभूति होती है; इसे नवरात्रि, दुर्गा‑पूजा या किसी भी साधना‑समारोह में गाया जाता है।

जय अम्बे गौरी : आरती (Jai Ambe Gauri : Aarti)

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॥ आरती — जय अम्बे गौरी ॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि‑ब्रह्मा‑शिवरी॥
जय अम्बे गौरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दौं नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी॥

केहड़ी वाहन राजत, खड्ग‑खप्परधारी।
सुर‑नर‑मुनि‑जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र‑दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी॥

शुम्भ‑निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी॥

चण्ड‑मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु‑कैटभ दौं मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम‑निगम‑बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरौं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख‑सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी॥

भुजा चार अति शोभित, वर‑मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर‑नारी॥
जय अम्बे गौरी॥

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी॥

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख‑सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी॥

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