होम / त्योहार / बसंत पंचमी
🌼
⏳ 111 दिन बाकी

बसंत पंचमी 2027: सरस्वती पूजा मुहूर्त, विधि, सामग्री, मंत्र, कथा और नियम

बसंत पंचमी (वसंत पंचमी) विद्या, बुद्धि, वाणी और कला की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस है। माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का भी उत्सव है — खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं और लोग पीले वस्त्र पहनकर माँ सरस्वती की पूजा करते हैं। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए विद्यारंभ, विवाह और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किए जाते हैं। इस पेज पर 2027 का मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री, मंत्र, कथा और नियम विस्तार से दिए गए हैं।

📅
तारीख 11 फ़रवरी 2027, गुरुवार
🌙
हिंदू तिथि माघ शुक्ल पंचमी
⏰
शुभ मुहूर्त सरस्वती पूजा (दिल्ली) सुबह 07:02 से दोपहर 12:35 | पूरा दिन अबूझ मुहूर्त
🙏
पूज्य देवता माँ सरस्वती
📖

परिचय

बसंत पंचमी पर सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र पहने जाते हैं और पूर्वाह्न के शुभ समय में माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। माँ को पीले फूल, पीला चंदन, केसरिया भात और बेर अर्पित किए जाते हैं, और उनके चरणों में किताबें, कलम, वाद्य यंत्र रखकर विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है। छोटे बच्चों का विद्यारंभ भी इसी दिन कराया जाता है।

नीचे पूरी सामग्री, क्रमवार पूजा विधि, सरस्वती वंदना, मंत्र और ज़रूरी नियम दिए गए हैं।

✨

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी 2027 कब है?

वर्ष 2027 में बसंत पंचमी गुरुवार, 11 फरवरी 2027 को मनाई जाएगी। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी है।

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 11 फरवरी 2027, सुबह लगभग 03:05 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त: 12 फरवरी 2027, सुबह लगभग 03:18 बजे
  • सरस्वती पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली): 11 फरवरी, सुबह 07:02 (सूर्योदय) से दोपहर 12:35 तक
  • अभिजित मुहूर्त (नई दिल्ली): दोपहर 12:13 से 12:57 तक

सरस्वती पूजा सूर्योदय से मध्याह्न (दोपहर) तक, यानी पूर्वाह्न में करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। पूरा दिन पंचमी तिथि रहेगी, इसलिए 2027 में तिथि को लेकर कोई भ्रम नहीं है। मुहूर्त का समय शहर के सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट बदलता है — उज्जैन में मध्याह्न लगभग 12:41 पर है।

बसंत पंचमी का महत्व

  • माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस: मान्यता है कि इसी दिन माँ सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे सरस्वती जयंती और श्री पंचमी भी कहते हैं।
  • वसंत ऋतु का आगमन: यह दिन ऋतुराज वसंत के आने का संकेत है। खेतों में सरसों के पीले फूल, आम के पेड़ों पर बौर और प्रकृति में नई ऊर्जा दिखाई देती है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है — "ऋतूनां कुसुमाकरः" (ऋतुओं में मैं वसंत हूँ)।
  • अबूझ मुहूर्त: बसंत पंचमी को पूरा दिन शुभ माना जाता है। इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, नया व्यापार और विद्यारंभ किए जाते हैं।
  • विद्यारंभ (अक्षर अभ्यास): छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना सिखाने के लिए यह सबसे शुभ दिन है। बंगाल में इसे "हाते खोड़ी" कहते हैं।
  • पीले रंग का महत्व: पीला रंग वसंत, सरसों के फूल, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र पहने जाते हैं और पीले पकवान बनाए जाते हैं।
  • कामदेव और रति की पूजा: वसंत को कामदेव का मित्र माना जाता है। कई स्थानों पर इस दिन कामदेव और रति की पूजा भी होती है।

माँ सरस्वती के प्राकट्य की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार सृष्टि की रचना के समय भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने जीव-जंतुओं और मनुष्यों की रचना की। लेकिन ब्रह्मा जी अपनी रचना से संतुष्ट नहीं थे — चारों ओर मौन और उदासी छाई हुई थी। न कोई आवाज़ थी, न वाणी, न संगीत।

तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल लेकर पृथ्वी पर छिड़का। जल की बूंदें गिरते ही एक दिव्य प्रकाश के साथ चार भुजाओं वाली एक सुंदर देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा, दूसरे हाथ में वर मुद्रा, और अन्य दो हाथों में पुस्तक और माला थी। वे श्वेत वस्त्र पहने कमल पर विराजमान थीं और उनका वाहन हंस था।

ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा के तार छेड़े, संसार के सभी जीवों को वाणी मिल गई, जल में कलकल, हवा में सरसराहट और पक्षियों में चहचहाहट भर गई। तब ब्रह्मा जी ने उन्हें वाणी की देवी "सरस्वती" कहा। उन्हें वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादिनी और वाग्देवी भी कहा जाता है। वह दिन माघ शुक्ल पंचमी था, इसीलिए इस दिन माँ सरस्वती का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

श्रीराम और शबरी

लोक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम दंडकारण्य में शबरी की कुटिया में पहुंचे थे। शबरी ने प्रेम से चख-चखकर मीठे बेर भगवान को खिलाए। मान्यता है कि वह दिन बसंत पंचमी का था। आज भी गुजरात के डांग क्षेत्र में शबरी धाम पर लोग इस दिन श्रद्धा से जाते हैं।

देश भर में बसंत पंचमी

  • पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम: सबसे भव्य सरस्वती पूजा — पंडालों में माँ की प्रतिमाएं, विद्यालयों और कॉलेजों में सामूहिक पूजा। विद्यार्थी अपनी किताबें और कलम माँ के चरणों में रखते हैं।
  • पंजाब और हरियाणा: पीले कपड़े पहनकर पतंग उड़ाने का उत्सव, मीठे पीले चावल और सरसों का साग।
  • उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश: घरों और मंदिरों में सरस्वती पूजा, पीले पकवान और कई जगह इसी दिन होली का डांडा (होली की लकड़ी) गाड़ा जाता है — होली की तैयारी यहीं से शुरू होती है।
  • ब्रज: मथुरा-वृंदावन में बसंत पंचमी से ही 40 दिन के होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। बांके बिहारी मंदिर में इस दिन गुलाल उड़ाया जाता है।
  • दक्षिण भारत: इसे श्री पंचमी के रूप में मनाया जाता है। बासर (तेलंगाना) के ज्ञान सरस्वती मंदिर में बच्चों का अक्षराभ्यास कराने के लिए भारी भीड़ होती है।
🧺

पूजा सामग्री

पूजा के लिए

  • माँ सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर
  • लकड़ी की चौकी और पीला या सफेद कपड़ा
  • माँ के लिए पीली या सफेद चुनरी / वस्त्र
  • गंगाजल, जल से भरा कलश, आम के पत्ते
  • पीला चंदन, हल्दी, केसर, रोली, अक्षत
  • पीले फूल — गेंदा, सरसों के फूल, पीला गुलाब; सफेद कमल (यदि मिले)
  • आम का बौर (मंजरी) — वसंत का प्रतीक
  • घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, कपूर
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची, दक्षिणा

माँ के चरणों में रखने के लिए

  • बच्चों की किताबें, कॉपी, कलम, पेंसिल
  • वाद्य यंत्र — वीणा, हारमोनियम, तबला, बांसुरी, गिटार आदि (जो घर में हों)
  • कलाकार अपने ब्रश, रंग; लेखक अपनी डायरी
  • विद्यारंभ के लिए — स्लेट, चॉक या चावल/आटे से भरी थाली

भोग और प्रसाद

  • केसरिया भात / मीठे पीले चावल — बसंत पंचमी का मुख्य भोग
  • बेर (विशेष रूप से प्रिय), मौसमी फल — केला, अमरूद, गाजर
  • बूंदी के लड्डू या बेसन के लड्डू
  • मालपुआ, खीर, राजभोग, केसर वाली मिठाई
  • पंचामृत, मिश्री
  • बंगाल में खिचड़ी और लाबड़ा (मिली-जुली सब्ज़ी) का भोग
🪔

पूजा विधि

चरण 1: सुबह स्नान और तैयारी (11 फरवरी)

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। कई लोग नहाने से पहले शरीर पर हल्दी और बेसन का उबटन लगाते हैं।
  • पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान साफ़ करें, चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर माँ सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा स्थान उत्तर या पूर्व दिशा में हो तो उत्तम है।
  • प्रतिमा के पास जल से भरा कलश रखें।

चरण 2: संकल्प और गणेश पूजन (सुबह 07:02 से 12:35 के बीच)

  • हाथ में जल, अक्षत और पीले फूल लेकर संकल्प लें — "मैं (अपना नाम) विद्या, बुद्धि, वाणी और कला की प्राप्ति के लिए माँ सरस्वती का पूजन कर रहा/रही हूँ।"
  • सबसे पहले श्री गणेश का पूजन करें — ॐ गं गणपतये नमः
  • कलश का पूजन करें।

चरण 3: माँ सरस्वती का पूजन

  • माँ को गंगाजल से स्नान कराने का भाव रखते हुए जल के छींटे दें।
  • पीली या सफेद चुनरी अर्पित करें।
  • पीले चंदन, हल्दी और केसर का तिलक लगाएं, अक्षत चढ़ाएं।
  • पीले फूल, फूलों की माला और आम का बौर अर्पित करें।
  • माँ के चरणों में किताबें, कलम और वाद्य यंत्र रखें और उन पर भी रोली-अक्षत लगाएं।
  • धूप-दीप दिखाएं।

चरण 4: सरस्वती वंदना और मंत्र जाप

प्रसिद्ध सरस्वती वंदना का पाठ करें:

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

अर्थ: जो कुंद के फूल, चंद्रमा, बर्फ और मोतियों के हार जैसी श्वेत हैं, जो सफेद वस्त्र पहनती हैं, जिनके हाथ वीणा और वर मुद्रा से सुशोभित हैं, जो सफेद कमल पर विराजमान हैं, जिनकी ब्रह्मा, विष्णु और शिव सदा वंदना करते हैं — वे सब प्रकार की जड़ता (अज्ञान) दूर करने वाली भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें।

  • सरस्वती बीज मंत्र: ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः — 108 बार
  • सरस्वती गायत्री: ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
  • विद्यार्थी चाहें तो सरस्वती चालीसा या सरस्वती स्तोत्र का पाठ भी करें।

चरण 5: भोग और आरती

  • केसरिया भात, बेर, बूंदी के लड्डू और मौसमी फल का भोग लगाएं।
  • माँ सरस्वती की आरती करें — "जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता"।
  • प्रसाद सबको बांटें।

चरण 6: विद्यारंभ (अक्षर अभ्यास)

  • छोटे बच्चे (आम तौर पर 2 से 5 वर्ष) को गोद में लेकर माँ सरस्वती के सामने बिठाएं।
  • उसकी उंगली पकड़कर चावल या आटे से भरी थाली में, या स्लेट पर पहली बार "ॐ" या "श्री" लिखवाएं, फिर वर्णमाला के पहले अक्षर लिखवाएं।
  • बच्चे को माँ का आशीर्वाद दिलाएं और प्रसाद खिलाएं।

चरण 7: पूजा के बाद

  • कई परिवारों (विशेषकर बंगाल) में पूजा के दिन किताबें माँ के पास ही रहती हैं और अगले दिन विसर्जन / उत्तर पूजा के बाद उठाई जाती हैं — अपनी परंपरा के अनुसार चलें।
  • दिन भर पीले पकवान बनाएं और परिवार के साथ वसंत का आनंद लें।
  • ज़रूरतमंद बच्चों को किताबें, कॉपी, पेन दान करना इस दिन बहुत पुण्यदायी है।
📋

व्रत के नियम

✅ बसंत पंचमी पर क्या करें

  • सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
  • माँ सरस्वती की पूजा पूर्वाह्न में (2027 में सुबह 07:02 से दोपहर 12:35) करें।
  • माँ को पीले फूल, पीला चंदन, केसरिया भात और बेर अर्पित करें।
  • किताबें, कलम और वाद्य यंत्रों की पूजा करें।
  • छोटे बच्चों का विद्यारंभ कराएं।
  • ज़रूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा सामग्री का दान करें।
  • अच्छी और मधुर वाणी बोलें — माँ सरस्वती वाणी की देवी हैं।
  • शुभ कार्य (गृह प्रवेश, नया काम, सगाई) के लिए यह अबूझ मुहूर्त है — इसका लाभ उठाएं।

❌ बसंत पंचमी पर क्या न करें

  • इस दिन काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचें।
  • किसी से कटु वचन, झूठ या अपशब्द न बोलें।
  • किताबों, कॉपियों या कलम का अपमान न करें, उन्हें पैर न लगाएं और ज़मीन पर न फेंकें।
  • इस दिन पेड़-पौधे न काटें — वसंत प्रकृति के खिलने का उत्सव है।
  • मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज़ का सेवन न करें।
  • बंगाल की परंपरा में सरस्वती पूजा से पहले बेर नहीं खाए जाते — पहले माँ को अर्पित करके ही खाए जाते हैं।
  • पतंग उड़ाते समय चाइनीज़ / कांच वाला मांझा प्रयोग न करें — इससे पक्षियों और लोगों को गंभीर चोट लगती है। छत की मुंडेर पर सावधान रहें।
🪔

बसंत पंचमी — आरती

🔤

Hinglish

Basant Panchami 2027 kab hai? Guruvar, 11 February 2027. Panchami tithi 11 February subah 03:05 se 12 February subah 03:18 tak.

Saraswati puja muhurat: New Delhi mein subah 07:02 se dopahar 12:35 tak.

Puja vidhi: Peele ya safed kapde pehnein. Maa Saraswati ko peeli chunri, peela chandan, peele phool aur aam ka baur chadhayein. Unke charnon mein kitabein, kalam aur vadya yantra rakhein. Kesariya bhaat, ber aur boondi ke laddu ka bhog lagayein, phir aarti karein.

Mantra: "Om Aim Saraswatyai Namah" aur Saraswati Vandana "Ya Kundendu Tushar Haar Dhavala...".

Khaas baat: Ye abujh muhurat hai, is din bachchon ka vidyarambh, griha pravesh aur shaadi bina muhurat dekhe ho sakti hai.

Dhyan rakhein: Kaale kapde aur katu vachan se bachein. Patang udate samay chinese maanjha use na karein.

❓

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बसंत पंचमी 2027 कब है?

बसंत पंचमी 2027 में गुरुवार, 11 फरवरी को है।

पंचमी तिथि कब से कब तक है?

माघ शुक्ल पंचमी 11 फरवरी 2027 सुबह लगभग 03:05 से 12 फरवरी सुबह लगभग 03:18 तक है।

सरस्वती पूजा 2027 का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में सरस्वती पूजा का मुहूर्त 11 फरवरी सुबह 07:02 से दोपहर 12:35 तक है।

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?

मान्यता है कि माघ शुक्ल पंचमी को ही माँ सरस्वती प्रकट हुई थीं। साथ ही यह वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है।

बसंत पंचमी पर पीले कपड़े क्यों पहनते हैं?

पीला रंग वसंत ऋतु, सरसों के फूल, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है, और माँ सरस्वती को पीला रंग प्रिय माना जाता है।

माँ सरस्वती को क्या भोग लगाएं?

केसरिया भात (मीठे पीले चावल), बेर, बूंदी के लड्डू, मालपुआ, खीर और मौसमी फल का भोग लगाया जाता है।

सरस्वती पूजा का मंत्र क्या है?

सरस्वती बीज मंत्र "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" है। साथ में "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला" वंदना का पाठ किया जाता है।

क्या बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त है?

हां, बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, नया व्यापार और विद्यारंभ बिना पंचांग देखे किए जाते हैं।

विद्यारंभ कैसे कराएं?

बच्चे को माँ सरस्वती के सामने बिठाकर उसकी उंगली से चावल या आटे की थाली में या स्लेट पर पहली बार "ॐ" या "श्री" लिखवाएं, फिर वर्णमाला के अक्षर लिखवाएं।

बसंत पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?

काले कपड़े न पहनें, कटु वचन न बोलें, किताबों का अपमान न करें, पेड़ न काटें और मांस-मदिरा का सेवन न करें।

माँ सरस्वती का वाहन क्या है?

माँ सरस्वती का वाहन हंस है। वे श्वेत कमल पर विराजमान रहती हैं और उनके हाथों में वीणा, पुस्तक और माला होती है।

📢 शेयर करें