आरती संध्या

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विनायक जी की कहानी Vinayak Ji Ki Kahani ( Bhadrapad Mahina भाद्रपद महीना )

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एक ब्राह्मण था, जो नित्य प्रतिदिन सुबह उठकर गंगा जी में स्नान के लिए जाता और फिर बिंदायक जी की पूजा करता था, साथ ही बिंदायक जी की कहानियां सुनता था। उसकी पत्नी को इस पूजा करने से अच्छा नहीं लगता था, और वह गुस्से में हो जाती थी। वह कहती थी कि सुबह पहले काम करो, मैं झाड़ू निकालती हूँ और तुम कुछ नहीं करते हो।

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विनायक जी की कहानी Vinayak Ji Ki Kahani ( Jyesth Mahina ज्येष्ठ महीना )

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एक समय की बात है, एक ब्राह्मण और उनकी पत्नी थीं। उनके पास एक पुत्र था जिनका नाम था। वह छोटा सा बच्चा गणेश जी का बड़ा भक्त था। वह दिन-रात गणेश जी की सेवा में लगा रहता था, और घर के कामों में कभी भी ध्यान नहीं देता था। इससे उनकी पत्नी बहुत चिंतित हो जाती थी। वह अकेले ही घर का सारा काम करती थी और यह बात उसे बहुत दुखी करती थी।

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गणगोर बिंदायक जी की कहानी Gangaur Bindayak Ki Kahani ( Chetra Mahina चैत्र महीना )

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भगवान विष्णु माता लक्ष्मी जी से विवाह के लिए जाने लगे तब सारे देवी देवताओं को बारात में जाने के लिए बुलाया गया। जब सभी देवता गण जाने लगे तो उन्होंने बोला कि गणेश जी को तो नहीं लेकर जाएंगे क्योंकि गणेश जी बहुत ज्यादा खाते हैं और दुन्द दुन्दालो, सुन्ड सुन्डालो, उखला सा पांव, छाजला सा कान, मस्तक मोटो-लाजे, भीम कुमारी व मोटे मस्तक वाले हैं। इनको ले जाकर क्या करेंगे इसलिए गणेश जी को तो यहीं पर घर की रखवाली के लिए छोड़कर जाएंगे। ऐसा कह कर गणेश जी को छोड़कर सभी बरात में चले गए।

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विनायक जी की कहानी Vinayak Ki Kahani ( Vaishak Mahina वैशाख महीना )

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एक गांव में एक ब्राह्मण व उसकी पत्नी रहते थे । ब्राह्मण देव बड़े ही श्री गणेश भक्त थे। उसने अपने घर में ही एक छोटा-सा सुन्दर-सा भगवान श्री गणेश का मंदिर बना रखा था। मूर्ति स्थापित कर रखी थी । वह प्रतिदिन स्नानादि से निवृत होकर अराध्य देव की पूजा अर्चना, धूप दीप करते थे । घन्टों गणेश चालीसा, स्तुति आदि का पाठ किया करते थे। आरती के समय झालर घंटी आदि की आवाज से ब्राह्मणी बहुत परेशानहोती थी।

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बिंदायक जी की कहानी Bindayak Ji Ki Kahani ( Kartik Mahina कार्तिक महीना )

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एक अन्धी बुढ़िया माई के बेटाव बहू थे । वे लोग बहुत गरीब थे । बुढ़िया माई रोज गणेश जी की पूजा करती थी । एक दिन गणेश जी उससे प्रसन्न हुये ओर बोले कि मुझसे कुछ मांग, तब माई बोली कि मुझे कुछ भी मांगना नहीं आता है । तब गणेश जी बोले तेरे बेटे- -बहू से पूछ ले । तब वो अपने बेटे से पूछी ! तब बेटा बोला-कि मां धन मांग ले। बहू से पूछा तो उसने कहा पोता मांग लो। तब माई ने सोचा यह दोनों तो अपने मतलब की बात मांगने को कह रहे हैं । सो उसने पड़ौसन से पूछा ।

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तिल चौथ की कहानी Teel Choth Ki Kahani ( Magh Mahina माघ महीना )

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श्री शेषावतार 1008 श्री कल्लाजी भोग-भजन ( आरती ) Shri Sheshavatar 1008 Shri Kallaji Bhog-Bhajan (Aarti)

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श्री रघुवर भोग लगैया, जीमो रामा

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गणेश विनायक जी की कथा (Ganesh Vinayak Ji ki katha)

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बिंदायक जी की कहानी (Bindaayak Ji ki kahani)

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बिन्दायक जी की कहानी (Bindaayak Ji ki kahani)

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बिन्दायक जी की कहानी (Bindaayak Ji ki kahani)

विनायक जी की कहानी, Vinayak Ji Ki Kahani एक मेंढक और मेंढकी थे। मेंढकी रोज़ गणेश जी की कहानी कहती थी। एक दिन मेंढक बोला कि तू पराये पुरुष का नाम क्यों लेती है ?अगर तू लेगी तो मैं तुझे मारूंगा।
राजा की दासी आयी तो पतीले में डालकर अंगीठी पर चढ़ा दिया। जब दोनों सिकने लगे तो मेंढक बोला ,”मेंढकी बहुत कष्ट हो रहा है। तू गणेशजी को याद कर ,नहीं तो हम दोनों मर जायेंगे। “तब मेंढकी ने सात बार “विन्दायक जी -विन्दायक जी ” कहा ।

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बिन्दायक जी की कहानी (Bindaayak Ji ki kahani)

विनायक जी की कहानी, Vinayak Ji Ki Kahani एक गांव में एक भाई-बहिन रहते थे। बहिन का नियम था कि वह भाई का मुंह देखकर ही खाना खाती थी। बहिन की दूसरे गांव में शादी कर दी गई। वह ससुराल का सारा काम खत्म करके भाई का मुंह देखने आती। रास्ते में झाडियां ही झाडियां थी। उन्हीं झाड़ियों के बीच गणेश जी की मूर्ति और तुलसी माता का हरा-भरा पौधा भी था। वह रास्ते भर कहती जाती- ‘हे भगवान् मुझे अमर सुहाग और अमर पीहरवासा देना।

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बिन्दायक जी की कहानी (Bindaayak Ji ki kahani)

विनायक जी की कहानी, Vinayak Ji Ki Kahani एक विधवा मालिन थी। उसके चार साल का बच्चा उसकी सास उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार करती थी। एक दिन की बात सास ने पोते-बहू को घर से निकाल दिया। इधर-उधर भटकने के बाद मां-बे एक पेड़ के नीचे बैठ गए। वहां सामने ही बिन्दायकजी का मंदिर था। मंदिर से लौटते वक्त लोग उन्हें प्रसाद दे जाते। इससे उनका पेट भर जाता था। एक दिन मालिन ने सोचा कि यदि मैं जंगल से फूल लाकर बेचूं तो पैसे आने लगेंगे।

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बिन्दायक जी की कथा (Bindaayak Ji ki katha) ( Magh Mahina माघ महीना )

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माघ चौथ की कहानी (Magh Chauth Ki Kahani)

विनायक जी की कहानी, Vinayak Ji Ki Kahani ,माघ चौथ कथा, माघ चौथ व्रत की महत्व, माघ चौथ पूजा विधि, माघ चौथ के उपाय, माघ मास की कथा, माघ चौथ के त्योहार, Magh Chauth Ki Kahani, Magh Chauth Vrat Ki Mahatva, Magh Chauth Puja Vidhi, Magh Chauth Ke Upay, Magh Maas Ki Katha, Magh Chauth Ke Tyohar. एक साहूकार और एक साहूकारनी थे। वह धर्म पुण्य को नहीं मानते थे। इसके कारण उनके कोई बच्चा नहीं था। एक दिन साहूकारनी पडोसी के घर गयी। उस दिन सकट चौथ था, वहाँ पड़ोसन सकट चौथ की पूजा करके कहानी सुना रही थी।

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आंवला नवमी की कथा (Amla Navmi Katha)

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लक्ष्मी माता की कहानी (Laxmi Mata Ki Katha)

एक गांव में एक साहूकार रहता था। साहूकार के एक बेटी थी । वह हर रोज पीपल सींचने जाती थी । पीपल के वृक्ष में से लक्ष्मी जी प्रकट होती थी और चली जातीं । एक दिन लक्ष्मी जी ने साहूकार की बेटी से कहा – तू मेरी सहेली बन जा । तब लड़की ने कहा कि मैं अपने पिता

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तिल चौथ की कहानी ( Til chauth ki kahani ) ( Magh Mahina माघ महीना )

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करवा चौथ की कहानी ( Karwa Chauth Ki Kahani )

एक गाँव में एक साहुकार के सात बेटे और एक बेटी थी। सातों भाई और बहन में बहुत प्यार था। करवा चौथ के दिन सेठानी ने सातों बहुओं और बेटी के साथ करवा चौथ का व्रत रखा। सातों भाई हमेशा अपनी बहन के साथ ही भोजन करते थे। उस दिन भी भाईयो ने बहन को खाने के लिए बोला तो

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पंच भीखू की कहानी (Panch Bhikhu Ki Kahani)

किसी गाँव में एक साहूकार था और उसका एक बेटा व बहू भी थे. बहू कार्तिक माह में रोज सवेरे उठकर गंगा स्नान के लिए जाती थी. सुबह जल्दी जाते समय वह किसी भी पराए पुरुष का मुँह नही देखती थी. एक राजा का बेटा भी सुबह सवेरे गंगा स्नान के लिए जाता था. वह हैरान होता कि मैं इतनी

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Aarti (आरती )

कूष्माण्डा माता आरती (Kushmanda Mata Aarti)
शिवजी की आरती (Shivji Ki Aarti)
अम्बे तू है जगदम्बे काली: माँ दुर्गा, माँ काली आरती ( Maa Durga Maa Kali Aarti )
शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी (Sheshavtar Kallaji Rathod Pachisi)
मंगलवार आरती (Tuesday Aarti)
श्री रामचन्द्र आरती (Shri Ramchandra Aarti)
राधा माता की आरती (Radha Mata's Aarti)
कल्लाजी हेलो (kallaji helo)

Chalisa (चालीसा )

श्री राधा चालीसा (Shri Radha Chalisa)
श्री श्याम चालीसा (Shree Shyam Chalisa)
श्री राणी सती चालीसा (Shree Rani Sati Chalisa)
श्री कल्ला चमत्कार चालीसा (Shri Kalla ji Chalisa)
श्री कृष्ण चालीसा (Shree Krishna Chalisa)
श्री गोरखनाथ चालीसा (Shree Gorakhnath Chalisa)
श्री काली चालीसा (Shree Kali Chalisa)
श्री नर्मदा चालीसा (Shree Narmada Chalisa)

Mantra (मंत्र)

राम मंत्र (Rama Mantras)
महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjay Mantra)
विष्णु मंत्र (Vishnu Mantras)
वक्रतुंड मंत्र ( Vakratunda Mantra)
शिव मंत्र (Shiva Mantras)
श्री बजरंग बाण (Shri Bajrang Baan)
हनुमान मंत्र (Hanuman Mantras)
कल्लाजी राठौड़ मंत्र (Kallaji Rathod Mantra)

Bhajan (भजन)

श्री शेषावतार 1008 श्री कल्लाजी भोग-भजन ( आरती ) Shri Sheshavatar 1008 Shri Kallaji Bhog-Bhajan (Aarti)
कल्लाजी हेलो (kallaji helo)
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाये
कल्लाजी भजन (Kallaji Bhajan)
घर में पधारो गजानन जी मेरे घर में पधारो
श्री कल्लाजी का आह्वान (Kallaji's Aahvaan)
रंग मत डाले रे सांवरिया म्हाने गुजर मारे रे
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है
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