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अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो (पूर्ण लिरिक्स)

भक्ति संगीत की दुनिया में कृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग सबसे लोकप्रिय है। 'अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो' एक ऐसा भजन है जो हर कीर्तन और जगराते की शान है। फटे हाल में पहुँचे सुदामा और उन्हें सीने से लगाने वाले भगवान कृष्ण की यह गाथा आज भी उतनी ही जीवंत लगती है। चलिए, इस भजन के माध्यम से भक्ति के सागर में डूबते हैं।

Bhajan Kanhaiya ji Bhajan Krishna ji Bhajan
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परिचय

जब सुदामा द्वारका के महल के बाहर खड़े थे, तब उनके पास न जूते थे और न ही तन पर सही कपड़ा। यह भजन उसी दृश्य को बयां करता है। इसे सुनकर भक्त भाव-विभोर हो जाते हैं। नीचे इस भजन के शुद्ध और पूर्ण लिरिक्स दिए गए हैं।

This legendary bhajan describes the simplicity of Sudama and the magnanimity of Lord Krishna. It is widely sung across India during Krishna Janmashtami and other religious gatherings. Read the complete Hindi lyrics of this soul-stirring devotional song.

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो (पूर्ण लिरिक्स)

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शीश पगा न झगा तन पे, प्रभु जानै को आहि बसै केहि ग्रामा।

धोती फटी-सी लटी दुपटी, अरु पाँय उपानह को नहिं नामा॥

 

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, कि दर पे सुदामा गरीब आ गया है।

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, कि दर पे सुदामा गरीब आ गया है।

भटकते-भटकते न जाने कहाँ से, तुम्हारी डगर पे नसीब आ गया है।

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, कि दर पे सुदामा गरीब आ गया है।

 

न सर पे है पगड़ी, न तन पे है जामा, बता दो कन्हैया को नाम है सुदामा।

न सर पे है पगड़ी, न तन पे है जामा, बता दो कन्हैया को नाम है सुदामा।

इक बार मोहन से जाकर के कह दो, कि मिलने सखा बदनसीब आ गया है।

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, कि दर पे सुदामा गरीब आ गया है।

 

सुनते ही दौड़े चले आये मोहन, लगाया गले से सुदामा को मोहन।

सुनते ही दौड़े चले आये मोहन, लगाया गले से सुदामा को मोहन।

हुआ रुक्मिणी को बहुत ही अचम्भा, ये मेहमान कैसा अजीब आ गया है।

हुआ रुक्मिणी को बहुत ही अचम्भा, ये मेहमान कैसा अजीब आ गया है।

 

बराबर में अपने सुदामा बिठाए, चरण आंसुओं से प्रभु ने धुलाये।

बराबर में अपने सुदामा बिठाए, चरण आंसुओं से प्रभु ने धुलाये।

न घबराओ प्यारे ज़रा तुम सुदामा, ख़ुशी का समां तेरे करीब आ गया है।

न घबराओ प्यारे ज़रा तुम सुदामा, ख़ुशी का समां तेरे करीब आ गया है।

 

कहा कृष्ण ने देख सुदामा की हालत, कहाँ रह गए थे तुम इतनी मुद्दत।

छिपाते हो क्यों अपनी बगल में पोटलिया, क्या भाभी ने भेजा नहीं कुछ भी तोहफा?

देखकर के चावल की मुट्ठी वो सूखी, प्रभु को ज़माने का याद आ गया है।

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, कि दर पे सुदामा गरीब आ गया है।

भटकते-भटकते न जाने कहाँ से, तुम्हारी डगर पे नसीब आ गया है। तुम्हारी डगर पे नसीब आ गया है।