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ब्रह्म गायत्री मन्त्र (Brahma Gayatri Mantra)

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ब्रह्म गायत्री मन्त्र (Brahma Gayatri Mantra)

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ब्रह्म गायत्री मन्त्र

ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात् ।।

ॐ नारायणा विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ।।

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।।

ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ।।

ॐ वेदाङ्गनाथाय विद्महे हिरण्य गर्भाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ।।

ॐ अन्जनी जयाय विद्महे वायु पुत्राय धीमहि तन्नो वीर प्रचोदयात् ।।

ॐ जानकीनाथाय विद्महे सीता वल्लभाय धीमहि तन्नो श्रीराम प्रचोदयात् ।।

ॐ बटुक नाथाय विद्महे द्वारपालाय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात् ।।

ॐ कात्यायनी च विद्महे कन्याकुमारी च धीमहि तन्नो दुर्गे प्रचोदयात् ।।

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात् ।

ॐ अचल सुताय विद्महे कृष्णा वल्लभाय धीमहि सन्नो कल्ला प्रचोदयात् ।

 

ॐ नाना सुगन्धि पुष्पाणी यथा कालो भवानी च। पुष्पांजलीं मयादत्त गृहाण परमेश्वरः मंत्र पुष्पांजली समर्पयामी ।।

प्रदक्षिणा मन्त्रौ

ये तीर्थानिप्प्रचरन्तिसृकाहस्तानि- षङ्गिणः तेषार्हं सहस्रयोजने ऽवधन्वानितन्मसि ।।

सप्तास्या- सन्न्परिधयस्त्रिःसप्त समिधः कृताः।।

देवायद्यज्ञन्तन्वा- नाऽअबध्न- न्पुरुषम्पशुम् ।।

बीज मन्त्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नागेश्वराय श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ ।

इस मन्त्र के जाप करने से सभी प्रकार के कष्टों का
निवारण होता है ।