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करवा चौथ आरती

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परिचय

करवा चौथ हिंदू परंपरा का उन व्रतों में से एक है जो विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु, सुख और समृद्धि के लिए रखा जाता है। यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को किया जाता है — महिलाएँ निर्जला व्रत रखकर दिन भर उपवास, प्रार्थना, व्रत कथा सुनना और संध्या में चौथी पर चाँद देखने का अनुष्ठान निभाती हैं। रात्रि में चांद देखने के बाद पैतृक रीति के अनुसार पति या परिवार के द्वारा पानी/भोजन से व्रत तोड़ा जाता है। करवा (एक मिट्टी/लोहे का पात्र) और पूजन‑सामग्री (दीप, मेवा, सिंदूर, चावल, चंदन) का विशेष महत्व है; करवा पर रखे गए दीप‑फूल और भोग के साथ महिला अपनी अराधना करती हैं। श्रद्धा, संयम और पारिवारिक प्रेम के साथ माना जाए तो यह व्रत सम्बंधों में स्नेह और समर्पण की भावना को प्रबल करता है।

करवा चौथ आरती

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॥ करवा चौथ आरती ॥

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नैया।। ओम जय करवा मैया।

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नैया।।

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे, दुख सारे हरती।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नैया।।

होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नैया।।

करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूर्ण, सब विधि सुख पावे।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नैया।।