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बुधवार आरती - गणेश जी की विशेष कृपा और बुद्धि की प्राप्ति

बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश की आरती करने से व्यापार में लाभ और शिक्षा में सफलता मिलती है। विघ्नहर्ता गणेश जी सभी बाधाओं को हर लेते हैं। आराधना पर बुधवार की विशेष आरती और दूर्वा अर्पण की विधि दी गई है। सच्चे मन से यह पाठ करने पर बुद्धि प्रखर होती है और रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 173
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परिचय

बुधवार पर परंपरा अनुसार श्रीकृष्ण और गणेश जी दोनों की आराधना का विशेष महत्त्व है — कृष्ण से प्रेम और भक्ति, गणेश से बाधा निवारण और शुभारम्भ की सिद्धि की प्रार्थना होती है। नीचे दोनों आरतियों को श्रद्धा‑भाव से पढ़ने के लिये व्यवस्थित किया गया है — ध्यान व भक्ति सहित पाठ करें या गायें।

बुधवार आरती (Wednesday Aarti)

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॥ आरती — श्री कृष्ण जी की ॥

आरती युगल किशोर की कीजै, तन‑मन‑धन न्यौछावर कीजै॥
गौरश्याम मुख निखरन लीजै, हरि का स्वरूप नयन भरे पीजै॥

रवि‑शशि कोटि बदन की शोभा, ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
ओढ़े नील‑पीत पट साड़ी, कुञ्जबिहारी गिरिवरधारी॥

फूलन की सेज, फूलन की माला, रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला॥
कंचन थाल, कपूर की बाती, हरि आये निर्मल भई छाती॥

श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी, आरती करें सकल ब्रजनारी॥
नन्दनन्दन बृजभान किशोरी, परमानन्द स्वामी अविचल जोरी॥

 

 

॥ आरती — श्री गणेश जी की ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ 

एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूषक की सवारी॥ 

पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥ 

अँधे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ 

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

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