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श्री सीता जी की आरती (Aarti of Shri Sita ji)

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परिचय

सीता माता, माता जनक की पुत्री और भगवान राम की प्रिया — मर्यादा और समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं। उनका चरित्र त्याग, धैर्य, सत्य और पतिव्रता धर्म का आदर्श प्रस्तुत करता है। जिन घरों में सीता‑राम की भक्ति होती है, वहाँ नारी‑सम्मान, पारिवारिक धर्म और सत्य की प्रतिष्ठा बनी रहती है। आरती में उनका स्तवन करने से मन में शान्ति, साहस और अनुकम्पा का वास होता है; साथ ही यह हमें अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने और कठिनाइयों में धैर्य रखने की प्रेरणा देती है। आरती पाठ करते समय मन को शुद्ध रखें, दीप‑लक्ष्मी जैसे सज्जा कर, और अंत में चरण‑कमल पर पुष्प/प्रसाद अर्पित करें — इससे आराधना का भाव गहरा होता है और आशीर्वाद की अनुभूति मिलती है।

श्री सीता जी की आरती (Aarti of Shri Sita ji)

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श्री सीता जी की आरती

आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की।
आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की।

जगत जननी, जग की विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी, दिनोधारिणी, सीता मैय्या भक्तन हितकारी की।
आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की।

श्री शिरोमणि, पति हित कारिणी, पति सेवा विटर वन‑वन चारिणी,
पति हित, पति वियोग स्वीकारिणी, त्याग धर्म मूर्ति धरी की।
आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की।

विमल कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पवन मति आई,
सुमिरत काटत कष्ट दुःख दाई, शरणागत जन भय हरी की।
आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की।

आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की।