परिचय
Gangaur songs are an important part of Rajasthan's traditional folk culture. During Gangaur fast, women sing these melodious songs while worshipping Mata Gauri. These songs beautifully portray the divine love of Mata Parvati and Lord Shiva, wishes for marital bliss, and family relationships. These folk songs sung in Rajasthani language have been passed down through generations. "Gaur-Gaur Ganpati", "Khelan Do Gangaur", "Isar Pooje Parvati" are famous Gangaur songs. Singing these songs brings special devotion and joy to the worship.
गणगौर के गीत | राजस्थानी गणगौर लोकगीत संग्रह
**गणगौर गीतों का महत्व:**
गणगौर के गीत केवल गीत नहीं हैं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर हैं। ये गीत माताओं और दादी-नानी द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी बेटियों को सिखाए जाते हैं। गणगौर व्रत के समय इन गीतों को गाना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
इन गीतों में माता गौरी की महिमा, भगवान शिव की आराधना, सुहाग की कामना, पारिवारिक रिश्तों का वर्णन और राजस्थानी संस्कृति की झलक मिलती है।
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**गीत १ - गौर-गौर गणपति**
गौर-गौर गणपति
ईशर पूजे पार्वती
पार्वती का आला टीला
पूजन करो गणगौर
राज करे गणगौर
ओ माई रे गौर, ओ माई रे गौर
खेरे री गौर, खेरे री गौर
पाटन री गौर, पाटन री गौर
पूजो गौर पार्वती
म्हारी गौर, म्हारी गौर
राज करे गणगौर
दूध की कटोरी, बाजरे की रोटी
ईशर पूजे गौर
म्हारी गौर, म्हारी गौर
राज करे गणगौर
ओ माई रे गौर
**अर्थ:** हे माता गौरी! भगवान शिव आपकी पूजा करते हैं। आपके ऊंचे टीले पर हम आपकी पूजा करते हैं। आप राज करें। आप हमारी माता हैं। भगवान शिव दूध और बाजरे की रोटी से आपकी पूजा करते हैं।
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**गीत २ - खेलन दो गणगौर**
खेलन दो गणगौर
आली-गली म्हारी गणगौर
थारी गौर, म्हारी गौर
सबकी प्यारी गणगौर
रंग दो थारी गणगौर
संवर दो थारी गणगौर
जोबन दो थारी गणगौर
सुहाग दो थारी गणगौर
राज करे गणगौर
म्हारी गणगौर ने सोलह सिंगार
ईसर जी ने बारह सिंगार
सासु जी ने आठ सिंगार
ननद जी ने चार सिंगार
राज करे गणगौर
गली-गली में गणगौर
डोली में बैठी गणगौर
पालकी में गणगौर
घोड़े पर सवार गणगौर
राज करे गणगौर
**अर्थ:** हे माता गणगौर, हमें खेलने दो। गली-गली में हमारी गणगौर है। आप सबकी प्यारी हैं। आपको रंग दें, श्रृंगार करें, जवानी और सुहाग दें। हमारी गणगौर को सोलह श्रृंगार हैं, भगवान शिव को बारह, सास को आठ और ननद को चार श्रृंगार हैं।
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**गीत ३ - ईसर पूजे पार्वती**
ईसर पूजे पार्वती
पार्वती पूजे महादेव
दोनों बैठे कैलाश में
पार्वती ने पूछ्या महादेव
जोड़ा जगा दे महादेव
सुहाग जगा दे महादेव
बहु जगा दे महादेव
बेटा जगा दे महादेव
राज करे गणगौर
गौरा-गौरा गणपति
ईसर-गौरी दोनों मिल के
पूजो सबकी गणगौर
म्हारी गौर, थारी गौर
राज करे गणगौर
पीहर की गौर, ससुराल की गौर
मायके की गौर, घर की गौर
सब मिल के पूजो गणगौर
राज करे गणगौर
**अर्थ:** भगवान शिव माता पार्वती की पूजा करते हैं और माता पार्वती महादेव की पूजा करती हैं। दोनों कैलाश में बैठे हैं। हे महादेव, जोड़ा जगाओ, सुहाग जगाओ, बहू और बेटा दो। सब मिलकर गणगौर की पूजा करें।
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**गीत ४ - दूध की कटोरी**
दूध की कटोरी, बाजरे की रोटी
बाजरे की रोटी, गुड़ की डली
ईसर पूजे गौर
माई रे गौर, माई रे गौर
घी की कटोरी, मीठी पूड़ी
खांड की डली, पान का बीड़ा
ईसर पूजे गौर
म्हारी गौर, म्हारी गौर
सोने की थाली, चांदी का कटोरा
मोती की माला, हीरे की बिंदी
ईसर पूजे गौर
राज करे गौर
आंखों में काजल, माथे पर टीका
हाथों में मेंहदी, चूड़ी में खनक
ईसर पूजे गौर
राज करे गौर
**अर्थ:** दूध की कटोरी, बाजरे की रोटी, गुड़ की डली से भगवान शिव माता गौरी की पूजा करते हैं। घी की कटोरी, मीठी पूड़ी, चीनी और पान से पूजा करते हैं। सोने की थाली, चांदी के कटोरे, मोती की माला और हीरे की बिंदी से माता को सजाते हैं।
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**गीत ५ - म्हारी गणगौर सोने री थाळी में**
म्हारी गणगौर सोने री थाळी में
सोने री थाळी में, चांदी के कटोरे में
ईसर जी रूपो री थाळी में
रूपो री थाळी में, सोने के कटोरे में
सासु जी की कांच री थाळी में
कांच री थाळी में, मिट्टी के कटोरे में
ननद री मिट्टी री थाळी में
मिट्टी री थाळी में, टूटे-फूटे कटोरे में
देवर जी की पीतल की थाळी में
पीतल की थाळी में, कांसे के कटोरे में
जेठ जी की तांबे की थाळी में
तांबे की थाळी में, लोहे के कटोरे में
राज करे गणगौर
म्हारी गौर, थारी गौर
सबकी प्यारी गणगौर
**अर्थ:** हमारी गणगौर सोने की थाली में हैं, भगवान शिव चांदी की थाली में हैं। सास की कांच की थाली में, ननद की मिट्टी की थाली में हैं। यह पारिवारिक रिश्तों का प्रेमपूर्ण वर्णन है।
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**गीत ६ - गणगौर का श्रृंगार**
सोलह सिंगार करो गणगौर का
पहला सिंगार मेंहदी लगाओ
दूजा सिंगार काजल लगाओ
तीजा सिंगार बिंदी लगाओ
चौथा सिंगार सिंदूर भरो
पांचवां सिंगार चूड़ी पहनाओ
छठा सिंगार कंगन पहनाओ
सातवां सिंगार नथ पहनाओ
आठवां सिंगार बाली पहनाओ
नौवां सिंगार हार पहनाओ
दसवां सिंगार टीका लगाओ
ग्यारहवां सिंगार कांच री पोशाक
बारहवां सिंगार लहंगा पहनाओ
तेरहवां सिंगार ओढ़नी ओढ़ाओ
चौदहवां सिंगार कंघी करो
पंद्रहवां सिंगार फूल लगाओ
सोलहवां सिंगार शीशा दिखाओ
राज करे गणगौर
म्हारी गौर सोलह सिंगार
**अर्थ:** माता गणगौर का सोलह श्रृंगार करो - मेहंदी, काजल, बिंदी, सिंदूर, चूड़ी, कंगन, नथ, बाली, हार, टीका, पोशाक, लहंगा, ओढ़नी, कंघी, फूल और शीशा।
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**गीत ७ - गणगौर री सवारी**
गणगौर री सवारी जा री
घोड़े पे सवार जा री
पालकी में बैठी जा री
डोली में जा री गौर
आगे-आगे बाजा बाजे
पीछे-पीछे गौर
बीच में ईसर जी
राज करे गणगौर
रंग-बिरंगे फूल चढ़े
सोने के आभूषण पहने
चांदी के कड़े पहने
हीरे की बिंदी लगाए
राज करे गणगौर
गली-गली घूमे गौर
नगर-नगर घूमे गौर
शहर-शहर घूमे गौर
गांव-गांव घूमे गौर
राज करे गणगौर
**अर्थ:** माता गणगौर की सवारी निकल रही है। वे घोड़े पर सवार हैं, पालकी में बैठी हैं। आगे बाजा बज रहा है, पीछे गणगौर हैं, बीच में भगवान शिव हैं। वे गली-गली, शहर-शहर घूम रही हैं।
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**गीत ८ - गौरा रे गौरा**
गौरा रे गौरा गणपति
थारो कांगो परणवाऊं
सोने को कांगो, चांदी की कंघी
हीरे की बिंदी लगाऊं
मेंहदी रो रंग चढ़ाऊं
काजल री रेख लगाऊं
सिंदूर को टीको करूं
चूड़ी को झणकार करूं
लहंगो को घेर बढ़ाऊं
ओढ़नी को पल्लू संभालूं
नथड़ी की झलक दिखाऊं
बाली की खनक सुनाऊं
राज करे गणगौर
म्हारी गौर, थारी गौर
सबकी प्यारी गणगौर
**अर्थ:** हे माता गौरी, मैं आपका श्रृंगार करूंगी। सोने की कंघी से बाल संवारूंगी, हीरे की बिंदी लगाऊंगी। मेहंदी का रंग चढ़ाऊंगी, काजल लगाऊंगी, सिंदूर का टीका करूंगी।
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**गीत ९ - गणगौर माता आओ**
गणगौर माता आओ
म्हारे घर पधारो
दूध-दही का भोग लगाऊं
मीठे पकवान खवाऊं
घेवर-फीणी लाई हूं
गुड़-घी की बाटी बनाई हूं
खांड-मिश्री लाई हूं
फल-फूल चढ़ाऊं
सोने का सिंहासन दूं
चांदी का छत्र लगाऊं
मोती की माला पहनाऊं
हीरे का ताज पहनाऊं
म्हारे मन की मुराद पूरी करो
सुहाग का वरदान दो
घर में सुख-शांति लाओ
राज करे गणगौर
**अर्थ:** हे गणगौर माता, हमारे घर आओ। मैं आपको दूध-दही का भोग लगाऊंगी, मीठे पकवान खिलाऊंगी। घेवर, फीणी, बाटी बनाई है। आप हमारी मुरादें पूरी करो, सुहाग का वरदान दो।
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**गीत १० - ईसर-गौरी जोड़ी**
ईसर-गौरी की जोड़ी न्यारी
सबसे प्यारी, सबसे न्यारी
कैलाश में राज करे
दुनिया में नाम करे
शिव जी त्रिशूल धारी
गौरी माता श्रृंगार वाली
दोनों की जोड़ी प्यारी
सुहाग की साखी न्यारी
जिसने पूजी ईसर-गौरी
उसका भाग जगा दो
जिसने मानी ईसर-गौरी
उसका सुहाग बचा लो
राज करे गणगौर
ईसर-गौरी की जय हो
माता गौरी की जय हो
शिव शंकर की जय हो
**अर्थ:** भगवान शिव और माता गौरी की जोड़ी सबसे प्यारी और अनोखी है। वे कैलाश में राज करते हैं। शिव त्रिशूल धारण करते हैं, गौरी श्रृंगार करती हैं। जिसने उनकी पूजा की, उसका भाग्य जगा दो और सुहाग बचा लो।
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**गीत ११ - आली-गली री गणगौर**
आली-गली री गणगौर
गली-गली में फिरती गौर
घर-घर में पूजा होवे
मन-मन में बसती गौर
सास की दुलारी गौर
ननद की सहेली गौर
देवर की भाभी गौर
जेठ की बहु गौर
पति की साथिन गौर
बच्चों की माता गौर
घर की लक्ष्मी गौर
परिवार की सुख गौर
राज करे गणगौर
म्हारी गौर, थारी गौर
सबकी मानी गणगौर
**अर्थ:** गली-गली में गणगौर फिरती हैं। वे सास की दुलारी, ननद की सहेली, देवर की भाभी, जेठ की बहू, पति की साथी, बच्चों की माता और घर की लक्ष्मी हैं।
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**गीत १२ - गणगौर का विसर्जन**
गणगौर री बिदाई आई
माता गौर जा री
नदी किनारे जा री
तालाब में समा री
अठारह दिन पूजा करी
आज बिदा हो री गौर
फिर आना अगले साल
राज करे गणगौर
रो-रो के विदा करूं
हंस-हंस के बुलाऊं
साल-साल पूजा करूं
मन-मन में बसाऊं
माता तुम फिर आना
घर में सुख लाना
सुहाग का दान देना
राज करे गणगौर
**अर्थ:** गणगौर की विदाई का समय आ गया। माता गौरी जा रही हैं, नदी-तालाब में विसर्जित हो रही हैं। अठारह दिन पूजा की, आज विदा हो रही हैं। रोते हुए विदा कर रही हूं, अगले साल फिर बुलाऊंगी।
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**गणगौर गीत गाने के नियम:**
१. गीत शुद्ध उच्चारण से गाएं
२. भक्ति भाव से गाएं
३. समूह में मिलकर गाने से अधिक आनंद आता है
४. ताली बजाकर या मंजीरे के साथ गाएं
५. पूजा के समय अवश्य गाएं
६. बड़ी-बुजुर्ग महिलाओं से सीखें
**विशेष बातें:**
- ये गीत राजस्थानी लोक संस्कृति की धरोहर हैं
- माता-दादी से बेटियों को सिखाए जाते हैं
- गणगौर के समय पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है
- ये गीत सुहाग, प्रेम और परिवार के बंधन को दर्शाते हैं
🙏 गौर-गौर गणपति 🙏
🙏 राज करे गणगौर 🙏
🙏 जय माता गौरी 🙏