परिचय
This divine Saturday Trayodashi Vrat Katha is a powerful medium for poverty removal, regaining lost kingdom, position attainment, and wealth acquisition. When Saturday falls on Trayodashi tithi, worshipping Lord Shiva removes poverty and brings wealth. Whoever observes this fast properly, prosperity comes in their life.
शनिवार प्रदोष व्रत कथा | शनि प्रदोष पूजा विधि
🙏 शनिवार प्रदोष व्रत कथा 🙏
गर्गाचार्य जी ने कहा - "हे महामते! अब हम शनि प्रदोष विधि सुनने की इच्छा रखते हैं।"
सूत जी बोले - "पुरातन कथा है कि एक निर्धन ब्राह्मण की स्त्री दरिद्रता से दुखी हो शांडिल्य ऋषि के पास गई।"
"उसने कहा - 'हे महामुने! मैं अत्यंत दुखी हूं। दुख निवारण का उपाय बताएं। मेरे दोनों पुत्र आपकी शरण में हैं। ज्येष्ठ पुत्र का नाम धर्म है जो राजपुत्र है और लघु पुत्र का नाम शुचिव्रत है। हम दरिद्र हैं।'"
"ऋषि ने शिव प्रदोष व्रत करने को कहा। तीनों प्राणी प्रदोष व्रत करने लगे। कुछ समय बाद प्रदोष व्रत आया। तीनों ने व्रत का संकल्प लिया।"
"छोटा लड़का शुचिव्रत तालाब पर स्नान करने गया तो मार्ग में स्वर्ण कलश धन से भरपूर मिला। उसे लेकर वह घर आया। प्रसन्न होकर माता से बोला - 'माँ! यह धन मार्ग से प्राप्त हुआ है।'"
"माता ने धन देखकर शिव महिमा का वर्णन किया। राजपुत्र को बुलाकर बोली - 'देखो पुत्र, यह धन शिवजी की कृपा से प्राप्त हुआ है। प्रसाद के रूप में आधा-आधा बांट लो।'"
"राजपुत्र ने शिव-पार्वती का ध्यान किया और बोला - 'यह धन आपके पुत्र का है, मैं अधिकारी नहीं। मुझे भगवान शंकर और माता पार्वती जब देंगे तब लूंगा।'"
"एक दिन दोनों भाइयों का प्रदेश भ्रमण का विचार हुआ। वहां उन्होंने अनेक गंधर्व कन्याओं को क्रीड़ा करते देखा। राजपुत्र स्त्रियों के बीच पहुंचा।"
"एक सुंदरी राजकुमार को देख मोहित हो गई। उसका नाम अंशुमति था। वह बिद्रविक नामक गंधर्व की पुत्री थी। उसने मोतियों का हार राजकुमार के गले में डाल दिया।"
"तीसरे दिन गंधर्वराज अपनी कन्या को लेकर आया। उसने कहा - 'मैं कैलाश गया था। शंकर जी ने कहा कि धर्मगुप्त नाम का राजपुत्र मेरा परम भक्त है। तुम उसकी सहायता करो।'"
"गंधर्वराज ने कन्या का विधिवत विवाह कर दिया। विशेष धन और सुंदर गंधर्व कन्या पाकर राजपुत्र प्रसन्न हुआ। भगवत कृपा से वह समयोपरांत अपने शत्रुओं को दमन करके राज्य का सुख भोगने लगा।"
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏
📌 व्रत के लाभ:
- राज्य प्राप्ति
- पद प्राप्ति
- दरिद्रता निवारण
- धन-संपत्ति
**प्रदोष का अर्थ:**
'प्रदोष' शब्द का अर्थ है सूर्यास्त के उपरांत और रात्रि प्रारंभ होने से पूर्व का समय। शास्त्रों में कहा गया है कि यह समय भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत उत्तम है। इसी काल में भगवान शंकर का पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
**व्रत की विधि:**
त्रयोदशी तिथि के दिन व्रती को संपूर्ण दिन निराहार रहना चाहिए। सायंकाल जब सूर्यास्त में तीन घड़ी का समय शेष हो, तब स्नान आदि से निवृत्त होकर श्वेत वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात संध्यावंदन करने के उपरांत शिवजी की पूजा आरंभ करें।
पूजा स्थल को स्वच्छ जल से धोकर वहां मंडप बनाएं। पांच रंगों के पुष्पों से कमल की आकृति बनाकर कुश का आसन बिछाएं। आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। इसके पश्चात भगवान महादेव का ध्यान करें।
**ध्यान स्वरूप:**
करोड़ों चंद्रमाओं के समान कांतियुक्त, त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चंद्र धारण करने वाले, पिंगल वर्ण की जटाएं धारण किए हुए, नीलकंठ, अनेक रुद्राक्ष मालाओं से सुशोभित, वरद हस्त, त्रिशूलधारी, सर्पों के कुंडल पहने हुए, व्याघ्र चर्म धारण किए हुए, रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
**उद्यापन की विधि:**
प्रातःकाल स्नान आदि कार्यों से निवृत्त होकर रंगीन वस्त्रों से मंडप सजाएं। फिर उस मंडप में शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करके विधिपूर्वक पूजन करें। तदुपरांत शिव-पार्वती के निमित्त खीर से अग्नि में हवन करना चाहिए।
हवन के समय 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः' मंत्र से १०८ बार आहुति दें। इसी प्रकार 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के उच्चारण से भगवान शंकर के निमित्त आहुति प्रदान करें। हवन समाप्ति पर किसी धार्मिक व्यक्ति को सामर्थ्य अनुसार दान दें।
तदुपरांत ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा से संतुष्ट करें। व्रत पूर्ण हुआ, ऐसा वाक्य ब्राह्मणों से कहलवाएं। ब्राह्मणों की अनुमति प्राप्त कर अपने परिजनों के साथ भगवान शंकर का स्मरण करते हुए भोजन ग्रहण करें।
इस प्रकार उद्यापन करने से व्रती को पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति होती है तथा आरोग्य लाभ होता है। इसके अतिरिक्त शत्रुओं पर विजय मिलती है एवं समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। यह स्कंद पुराण में वर्णित है।
**त्रयोदशी व्रत का महत्व:**
त्रयोदशी अर्थात प्रदोष व्रत करने वाला मनुष्य सदैव सुखी रहता है। इस व्रत के प्रभाव से समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस व्रत को करने से विधवा स्त्रियों को अधर्म से विरक्ति होती है और सुहागिन स्त्रियों का सुहाग सदा अटल रहता है। बंदी को कारागार से मुक्ति मिलती है।
जो स्त्री-पुरुष जिस कामना से यह व्रत करते हैं, उनकी समस्त कामनाएं कैलाशपति भगवान शंकर पूर्ण करते हैं। सूत जी कहते हैं कि त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गायों के दान का फल प्राप्त होता है।
इस व्रत को जो विधि-विधान और तन-मन-धन से करता है, उसके समस्त दुख दूर हो जाते हैं। सभी स्त्रियों को ग्यारह त्रयोदशी या संपूर्ण वर्ष की २६ त्रयोदशी पूर्ण करने के उपरांत उद्यापन करना चाहिए।
**प्रदोष व्रत में वार का महत्व:**
त्रयोदशी तिथि पर जो भी वार पड़ता है, उसी दिन के अनुसार व्रत करना चाहिए तथा उसी दिन की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। विशेष रूप से रवि, सोम और शनि प्रदोष व्रत अवश्य करने चाहिए। इन सभी से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।
**विभिन्न वारों के प्रदोष व्रत:**
१. **रविवार प्रदोष व्रत** - दीर्घायु और आरोग्यता प्राप्ति के लिए रवि प्रदोष व्रत करना चाहिए।
२. **सोमवार प्रदोष व्रत** - ग्रह दशा निवारण की कामना हेतु सोम प्रदोष व्रत करें।
३. **मंगलवार प्रदोष व्रत** - रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य प्राप्ति हेतु मंगल प्रदोष व्रत करें।
४. **बुधवार प्रदोष व्रत** - सर्व कामना सिद्धि के लिए बुध प्रदोष व्रत करें।
५. **बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत** - शत्रु विनाश के लिए गुरु प्रदोष व्रत करें।
६. **शुक्रवार प्रदोष व्रत** - सौभाग्य और स्त्री समृद्धि के लिए शुक्र प्रदोष व्रत करें।
७. **शनिवार प्रदोष व्रत** - खोया हुआ राज्य एवं पद प्राप्ति की कामना हेतु शनि प्रदोष व्रत करें।
**व्रत का फल:**
प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
• सभी पापों से मुक्ति
• धन-संपत्ति की प्राप्ति
• संतान सुख
• आरोग्य लाभ
• शत्रुओं पर विजय
• मनोकामना पूर्ति
• कारागार से मुक्ति
• सुहाग की स्थिरता
• राज्य और पद की प्राप्ति
**महत्वपूर्ण निर्देश:**
- व्रत के दिन निराहार रहें
- प्रदोष काल में पूजा करें
- श्वेत वस्त्र धारण करें
- बेल पत्र अवश्य चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें
- ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दें
- कथा का श्रवण अवश्य करें