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श्री लक्ष्मीनारायण स्तोत्र / नमो नारायण (short stotras) | Lakshmi‑Narayana — मंत्र व पाठ

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परिचय

श्री लक्ष्मीनारायण का संक्षिप्त जप श्री विष्णु‑नारायण और लक्ष्मी‑देवी के सम्मिलित आशीर्वाद के लिये किया जाता है। छोटे‑स्तोत्र और समर्पण‑मंत्र किसी भी पूजा, आरम्भ या ध्यान से पहले उच्चारित कर ऊर्जा‑केन्द्र को स्थिर करते हैं। नीचे कुछ सर्वाधिक प्रयोगित शॉर्ट मंत्र दिए जा रहे हैं — इन्हें आप पूजा/जप में सीधा उपयोग कर सकते हैं।

श्री लक्ष्मीनारायण स्तोत्र / नमो नारायण (short stotras) | Lakshmi‑Narayana — मंत्र व पाठ

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ॐ नमो नारायणाय ॥

Transliteration: Om Namo Nārāyaṇāya

Meaning (भावार्थ):

  • ॐ — आद्यध्वनि/आत्मिक अभिवादन।
  • नमो — नमन/प्रणाम।
  • नारायणाय — परमपालक नारायण (भगवान विष्णु) को।
    पूरा अर्थ: “मैं परम नारायण को नमन/समर्पित हूँ” — समर्पण व आराधना का मूल मंत्र।

उपयोग:

  • पूजा/भजन/संकल्प से पहले समर्पण‑मंत्र के रूप में 3×/7×/108× जप करें।
  • नए कार्य आरम्भ, मानसिक शांति या संकट में आश्रय हेतु सरल और प्रभावी।
  • ब्रह्ममुहूर्त या किसी भी शुभ समय पर माला (108) से जप लाभप्रद।

 

नमो नारायण ॥

Transliteration: Namo Nārāyaṇa

Meaning (भावार्थ):

  • सरल नमन‑वाक्य: “नारायण को नमन्।”
  • भाव: त्वरित समर्पण, शीघ्र श्रद्धा‑प्रस्तुति।

उपयोग:

  • चर्चित/सारांश जप के रूप में — यदि समय कम हो तो 21×/27× जप करें।
  • पूजा‑समापन पर या ध्यान में वापसी हेतु कहा जा सकता है।
  • सरलता के कारण कार्य के बीच मानसिक केन्द्रन के लिये उपयुक्त।

 

Lakshmi‑Narayana short salutation

श्री लक्ष्मीनारायण नमोऽस्तुते ॥

Transliteration: Śrī Lakṣmī‑Nārāyaṇa Namo'stute

Meaning (भावार्थ):

  • श्री लक्ष्मीनारायण — लक्ष्मी और नारायण के संयुक्त रूप का सन्दर्भ (वैभव व पालन‑रक्षक)।
  • नमोऽस्तुते — तुझे नमन् / प्रणाम।
    पूर्ण भाव: “हे श्री लक्ष्मीनारायण! तुझे मेरा नमन / समर्पण।” — वैभव व संरक्षण दोनों की प्रार्थना।

उपयोग:

  • घर/व्‍यवसाय में समृद्धि‑प्रार्थना और वैभव के लिए 11×/21× जप करें।
  • लक्ष्मी‑पूजा या दैनिक आराधना में अष्टक/सूक्त के पहले‑बाद यह समर्पण उपयोगी रहता है।
  • दीप/प्रसाद अर्पण के साथ उच्चारण करने से पारंपरिक अनुशासन बढ़ता है।

 

Lakshmi‑Narayana bija‑style short invocation — प्रयोगात्मक पर साधारण 

ॐ श्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायणाय नमः ॥

Transliteration: Om Śrīṃ Śrīṃ Lakṣmī‑Nārāyaṇāya Namaḥ

Meaning (भावार्थ):

  • श्रीं — श्री/समृद्धि का बीज‑ध्वनि।
  • लक्ष्मीनारायणाय नमः — लक्ष्मी‑नारायण को नमन।
    भावार्थ: “श्री (समृद्धि) के साथ मैं लक्ष्मीनारायण को प्रणाम करता/करती हूँ।”

उपयोग:

  • यदि आप समृद्धि‑साधना कर रहे हैं तो 11×/21× इस बीज‑संयोजित मन्त्र का जप लाभकारी माना जाता है।
  • परंपरा/गुरु निर्देशानुसार बीज‑जप की संख्या अपनाएँ; बीजों के साथ संयोजन करने पर शुद्धता व भावना महत्वपूर्ण होती है।

अतिरिक्त उपयोग‑सुझाव (संक्षेप में):

  • जप‑गणना: सामान्यतः 11/21/108 के सेट; नियमितता सबसे अधिक महत्वपूर्ण।
  • समय: ब्रह्ममुहूर्त/प्रातः श्रेष्ठ; लेकिन आरम्भ‑कार्य से पहले भी प्रभावी।
  • विधि: स्वच्छ स्थान, संकल्प लें, माला से जप करें और अंत में प्रणाम व प्रसाद अर्पित करें।
  • क्या अपेक्षा करें: तुरंत — शान्ति और केन्द्रता; नियमितता से — आन्तरिक स्थिरता, अवसरों में वृद्धि और पारिवारिक‑कल्याण के संकेत।