परिचय
Maha Shivratri fast is one of the most sacred and fruitful fasts in Hinduism. This fast is observed on Chaturdashi of Krishna Paksha in Falgun month. On this day, the auspicious marriage of Lord Shiva and Goddess Parvati took place. Fasting on Shivratri night, staying awake at night, and worshipping Shivling is very beneficial. During the four Prahar puja, offering water, milk, curd, ghee, honey on Shivling and offering Bel leaves pleases Lord Shiva. The devotee who observes this fast with devotion has all sins destroyed and obtains desired fruits.
महा शिवरात्रि व्रत कथा | शिवरात्रि पूजा विधि और महत्व
🙏 महा शिवरात्रि व्रत कथा 🙏
**महा शिवरात्रि का परिचय:**
महा शिवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। यह व्रत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। 'शिवरात्रि' का अर्थ है 'शिव की रात्रि'। इस रात भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
**शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है:**
धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं:
१. **भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह:** इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ था। यह दिन दिव्य मिलन का प्रतीक है।
२. **समुद्र मंथन और विष पान:** समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष से संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने इसी रात विष पान किया था। विष को कंठ में रोक लेने से उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।
३. **महादेव का तांडव नृत्य:** इसी रात भगवान शिव ने ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार का तांडव नृत्य किया था।
४. **ज्योतिर्लिंग का प्रकट होना:** इसी दिन पहली बार शिवलिंग के रूप में ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ था।
**शिवरात्रि व्रत की विधि:**
**१. व्रत का संकल्प:**
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवजी के सामने संकल्प लें कि मैं आज पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से शिवरात्रि का व्रत करूंगा।
**२. उपवास के नियम:**
- पूरे दिन निराहार रहें या फलाहार करें
- कुछ भक्त केवल जल ग्रहण करते हैं
- तामसिक भोजन का त्याग करें
- रात्रि जागरण अवश्य करें
**३. पूजा सामग्री:**
- शिवलिंग या शिव प्रतिमा
- जल, दूध, दही, घी, शहद
- बेल पत्र (अत्यंत महत्वपूर्ण)
- धतूरा, आक के फूल
- चंदन, अक्षत, पुष्प
- धूप, दीप
- फल, मिठाई
- रुद्राक्ष माला
**४. चार प्रहर की पूजा:**
शिवरात्रि की रात को चार प्रहर में बांटा जाता है और प्रत्येक प्रहर में विशेष पूजा की जाती है:
**प्रथम प्रहर (संध्या काल - रात 6 से 9 बजे):**
- शिवलिंग को जल से स्नान कराएं
- दूध अर्पित करें
- बेल पत्र चढ़ाएं
- "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें
**द्वितीय प्रहर (रात 9 से 12 बजे):**
- शिवलिंग पर दही अर्पित करें
- धूप-दीप जलाएं
- रुद्राभिषेक करें
- शिव स्तोत्र का पाठ करें
**तृतीय प्रहर (रात 12 से 3 बजे):**
- शिवलिंग पर घी अर्पित करें
- धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं
- शिव चालीसा का पाठ करें
- भजन-कीर्तन करें
**चतुर्थ प्रहर (रात 3 से 6 बजे - प्रातःकाल):**
- शिवलिंग पर शहद अर्पित करें
- पंचामृत से अभिषेक करें
- आरती करें
- प्रसाद वितरित करें
**५. विशेष पूजा विधि:**
- सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करें
- शिवलिंग को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें
- बेल पत्र अवश्य चढ़ाएं (तीन-तीन पत्तों वाले)
- सफेद फूल, धतूरा, आक के फूल चढ़ाएं
- चंदन का तिलक लगाएं
- धूप-दीप से आरती करें
- भोग लगाएं (फल, मिठाई)
- परिक्रमा करें
**६. मंत्र जाप:**
शिवरात्रि पर इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी है:
- **ॐ नमः शिवाय** (सबसे महत्वपूर्ण)
- **महामृत्युंजय मंत्र:** ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
- **शिव पंचाक्षर स्तोत्र**
- **शिव तांडव स्तोत्र**
**शिवरात्रि की कथा:**
**पहली कथा - शिकारी की कथा:**
प्राचीन काल में एक शिकारी था। एक बार वह शिकार की खोज में वन में भटक गया। रात होने लगी तो उसने एक बेल के पेड़ पर चढ़कर रात बिताने का निश्चय किया। संयोग से उस पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित था जो पत्तों से ढका हुआ था।
शिकारी को नींद नहीं आ रही थी और वह बेल के पत्ते तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता रहा। वे पत्ते शिवलिंग पर गिरते रहे। अनजाने में ही उसने रात भर जागरण किया और शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाए।
प्रातःकाल जब यमदूत उसके प्राण लेने आए तो शिवजी के गणों ने उन्हें रोक दिया। शिवजी ने कहा कि इसने अनजाने में ही सही, लेकिन शिवरात्रि का व्रत किया है, रात्रि जागरण किया है और मुझे बेल पत्र अर्पित किए हैं। अतः यह मेरी शरण में है।
शिकारी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने भगवान शिव की शरण ली और सच्चे मन से भक्ति करने लगा। अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
**दूसरी कथा - समुद्र मंथन:**
देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया। मंथन से चौदह रत्न निकले। इनमें से सबसे पहले हलाहल विष निकला। यह विष इतना भयंकर था कि पूरे संसार को नष्ट कर सकता था।
सभी देवता घबरा गए और भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने उन्हें भगवान शिव की शरण में जाने को कहा। सभी देवता भगवान शिव के पास गए और प्रार्थना की।
भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए वह विष पी लिया। माता पार्वती ने भगवान शिव का कंठ दबा दिया जिससे विष उनके कंठ में ही रुक गया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।
देवताओं ने भगवान शिव की स्तुति की और उन्हें धन्यवाद दिया। तभी से शिवरात्रि पर विशेष पूजा का विधान है।
**तीसरी कथा - शिव-पार्वती विवाह:**
माता सती के आत्मदाह के बाद उन्होंने हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया। फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ।
इसी दिन को महा शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। यह दिन दिव्य प्रेम और मिलन का प्रतीक है।
**शिवरात्रि व्रत के लाभ:**
१. **पाप नाश:** सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
२. **मोक्ष प्राप्ति:** इस व्रत को करने से मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है।
३. **मनोकामना पूर्ति:** सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
४. **सुखी वैवाहिक जीवन:** विवाहित जोड़ों को सुखी जीवन मिलता है।
५. **उत्तम वर की प्राप्ति:** कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है।
६. **धन-संपत्ति:** जीवन में धन-वैभव की वृद्धि होती है।
७. **स्वास्थ्य लाभ:** शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
८. **शत्रु नाश:** शत्रुओं का नाश होता है।
९. **संतान प्राप्ति:** निःसंतान दंपत्ति को संतान सुख मिलता है।
१०. **आध्यात्मिक उन्नति:** जीवन में आध्यात्मिक उन्नति होती है।
**शिवरात्रि व्रत में क्या करें:**
- सूर्योदय से पहले उठें
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारें
- शिव मंदिर जाएं
- शिवलिंग पर जल, दूध चढ़ाएं
- बेल पत्र अवश्य चढ़ाएं
- रुद्राभिषेक करें या करवाएं
- रात्रि जागरण करें
- शिव भजन-कीर्तन सुनें
- शिव चालीसा, शिव पुराण का पाठ करें
- "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें
- सात्विक भोजन ग्रहण करें (अगले दिन)
**शिवरात्रि व्रत में क्या न करें:**
- मांसाहार का सेवन न करें
- शराब या नशीले पदार्थों का सेवन न करें
- क्रोध न करें
- झूठ न बोलें
- किसी का अहित न सोचें
- व्यर्थ की बातें न करें
- सोना नहीं चाहिए (रात्रि जागरण)
**महत्वपूर्ण निर्देश:**
- शिवरात्रि का व्रत पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से करें
- बेल पत्र शिव को अत्यंत प्रिय है, अवश्य चढ़ाएं
- रात्रि जागरण का विशेष महत्व है
- चार प्रहर की पूजा करें
- "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहें
- अगले दिन प्रातःकाल पारण करें
- ब्राह्मणों को भोजन और दान दें
**शिवरात्रि पर विशेष:**
महा शिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन मास में आती है, लेकिन प्रति माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। फिर भी महा शिवरात्रि का सर्वाधिक महत्व है।
इस दिन सभी शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। लाखों भक्त शिव मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं। काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, केदारनाथ, अमरनाथ जैसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है।
🙏 हर हर महादेव 🙏
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏
**व्रत का पारण:**
अगले दिन प्रातःकाल सूर्योदय के बाद पूजा करके व्रत का पारण करें। पहले ब्राह्मणों को भोजन कराएं, फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें। शिव का स्मरण करते हुए सात्विक भोजन करें।