परिचय
Basoda or Sheetala Ashtami is a special festival dedicated to Mata Sheetala, celebrated on Chaitra Krishna Ashtami. Sheetala Mata is the goddess who protects from smallpox, fever and infectious diseases. The most unique tradition of this day is that all food is cooked the previous day (Saptami) and no stove is lit on Ashtami. Only cold or stale food is eaten. That's why it is called Basoda (festival of stale food). Mata Sheetala is worshipped with cold water, cold food and flowers. Observing this fast prevents diseases in the family and maintains the blessings of Mata.
बसोड़ा शीतला अष्टमी | शीतला माता पूजा विधि और कथा
**बसोड़ा क्या है:**
बसोड़ा, जिसे शीतला अष्टमी भी कहते हैं, माता शीतला को समर्पित एक पवित्र त्योहार है। यह चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है, जो होली के लगभग सात-आठ दिन बाद आता है।
'बसोड़ा' शब्द 'बासी' से बना है, क्योंकि इस दिन केवल बासी या ठंडा भोजन खाया जाता है। 'शीतला' का अर्थ है 'शीतलता देने वाली' या 'ठंडक देने वाली'।
**शीतला माता कौन हैं:**
माता शीतला स्वास्थ्य और शीतलता की देवी हैं। उन्हें चेचक (माता), खसरा, बुखार और अन्य संक्रामक रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है।
**शीतला माता का स्वरूप:**
- माता शीतला गधे (गर्दभ) पर सवार होती हैं
- हाथ में कलश (पानी का घड़ा) होता है
- सूप (winnowing fan) धारण करती हैं
- झाड़ू या नीम की डाल होती है
- शीतल जल से भरा कलश धारण करती हैं
माता शीतला को ठंडी चीजों से पूजा जाती है - ठंडा पानी, ठंडा भोजन, ठंडे फूल आदि।
**बसोड़ा कब मनाते हैं:**
बसोड़ा दो दिन का त्योहार है:
**सप्तमी (एक दिन पहले):**
- इस दिन सारा खाना बना लिया जाता है
- सभी प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं
- घर की सफाई की जाती है
- अगले दिन के लिए तैयारी की जाती है
**अष्टमी (मुख्य दिन):**
- चूल्हा बिल्कुल नहीं जलाया जाता
- केवल ठंडा/बासी खाना खाया जाता है
- शीतला माता की पूजा की जाती है
- मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं
**बसोड़ा क्यों मनाते हैं:**
**१. बीमारियों से रक्षा:**
शीतला माता चेचक, खसरा, बुखार जैसी बीमारियों से बचाती हैं। होली के बाद मौसम बदलता है और संक्रामक रोग फैलने का खतरा रहता है। इसलिए माता की पूजा करके उनकी कृपा मांगी जाती है।
**२. स्वच्छता का संदेश:**
चूल्हा न जलाने से घर में गर्मी और धुआं नहीं होता। यह स्वच्छता और शीतलता का प्रतीक है।
**३. आराम का दिन:**
यह महिलाओं के लिए आराम का दिन है। एक दिन बिना खाना बनाए आराम कर सकती हैं।
**शीतला माता की कथा:**
**कथा १ - माता शीतला का प्राकट्य:**
प्राचीन काल में एक गांव में चेचक की भयंकर महामारी फैल गई। बहुत सारे लोग बीमार हो गए और कई लोगों की मृत्यु हो गई। गांव के लोग बहुत परेशान थे।
गांव के एक ब्राह्मण ने माता की आराधना की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता शीतला प्रकट हुईं। उन्होंने अपने हाथ में शीतल जल का कलश लेकर पूरे गांव में जल का छिड़काव किया।
माता के शीतल जल के स्पर्श से सभी रोगी स्वस्थ हो गए। तभी से लोग माता शीतला की पूजा करने लगे और उन्हें रोगों से बचाने वाली देवी के रूप में पूजा जाने लगा।
**कथा २ - शीतला माता और राजा की कहानी:**
एक समय की बात है, एक राज्य में राजा के पुत्र को चेचक निकल आया। राजा ने सभी वैद्यों को बुलाया लेकिन कोई इलाज काम नहीं आया। राजकुमार की हालत बिगड़ती जा रही थी।
राजा की रानी बहुत चिंतित थी। उसने माता शीतला की पूजा शुरू की। उसने व्रत रखा और पूरी श्रद्धा से माता की आराधना की।
माता शीतला रानी की भक्ति से प्रसन्न हुईं। उन्होंने राजकुमार को स्वस्थ कर दिया। राजा और रानी ने माता शीतला का भव्य मंदिर बनवाया और तभी से हर साल बसोड़ा का पर्व धूमधाम से मनाया जाने लगा।
**कथा ३ - बासी भोजन की परंपरा:**
एक बार की बात है, एक गांव में शीतला माता की भक्त एक गरीब महिला रहती थी। उसके घर में छोटे-छोटे बच्चे थे। शीतला अष्टमी के दिन वह माता की पूजा करना चाहती थी, लेकिन उसके पास पूजा के लिए कुछ भी नहीं था।
उसके पास पिछले दिन का बचा हुआ बासी खाना था। उसने वही बासी खाना माता को भोग लगाया और पूरे मन से प्रार्थना की।
माता शीतला उसकी सच्ची भक्ति से बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने उस महिला को दर्शन दिए और कहा - "बेटी, मुझे तुम्हारी श्रद्धा पसंद है। आज से बासी भोजन मुझे बहुत प्रिय है। जो भी मुझे ठंडा या बासी भोजन अर्पित करेगा, मैं उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करूंगी।"
तभी से बसोड़ा के दिन बासी भोजन खाने और माता को अर्पित करने की परंपरा चल पड़ी।
**बसोड़ा पूजा विधि:**
**सप्तमी के दिन (एक दिन पहले):**
**१. खाना बनाना:**
सप्तमी के दिन सारा खाना बना लें जो अगले दिन खाना है:
- पूरी (तली हुई रोटी)
- आलू की सब्जी
- चने की सब्जी
- हलवा या सूजी का शीरा
- खीर या मीठी चीजें
- पापड़
- अचार
- दही (अगर मौसम ठंडा हो)
**२. घर की सफाई:**
- पूरे घर की सफाई करें
- चूल्हे/रसोई को साफ करें
- पूजा स्थल सजाएं
**३. सामान तैयार करना:**
अगले दिन की पूजा का सामान तैयार रखें।
**अष्टमी के दिन (मुख्य दिन):**
**पूजा सामग्री:**
- शीतला माता की तस्वीर या मूर्ति
- कलश (ताम्बे या मिट्टी का) - ठंडे पानी से भरा
- फूल (विशेषकर सफेद फूल)
- नीम के पत्ते
- चंदन
- रोली, अक्षत
- धूप, दीप
- नारियल
- बासी भोजन (पूरी, सब्जी, हलवा)
- मिठाई
- फल
- गुड़
- घी
- सूप (winnowing fan)
- नए कपड़े का टुकड़ा
**पूजा की विधि:**
**१. प्रातःकाल:**
- सुबह जल्दी उठें
- स्नान करें
- साफ कपड़े पहनें
- चूल्हा बिल्कुल न जलाएं
**२. पूजा स्थल तैयार करना:**
- शीतला माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें
- सामने कलश रखें (ठंडे पानी से भरा)
- कलश पर नारियल रखें
- नीम के पत्ते रखें
**३. पूजा प्रारंभ:**
- माता को जल अर्पित करें (ठंडा जल)
- फूल चढ़ाएं
- चंदन लगाएं
- रोली, अक्षत चढ़ाएं
- धूप-दीप दिखाएं
**४. भोग लगाना:**
- बासी पूरी, सब्जी, हलवा माता को अर्पित करें
- मिठाई, फल चढ़ाएं
- ठंडा पानी चढ़ाएं
**५. मंत्र पाठ:**
**शीतला माता मंत्र:**
ॐ शीतलायै नमः
या
शीतले त्वं जगद्धात्री, शीतला त्वं जगत्प्रिया।
शीतलेन स्वरूपेण, सर्वदा पालय प्रभो॥
**६. आरती:**
शीतला माता की आरती करें:
**शीतला माता की आरती:**
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
तुम को निस दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा सुरी गणा॥
मैया शीतला माता...
शंकर करें सुमिरन, नारद करे निर्गुणा।
नारद करे निर्गुणा, सहस नाम शत धाम॥
मैया शीतला माता...
भक्त जना पर शीश, निज कर दै वरदाना।
भव से उबार देइ, त्रिभुवन शरण आना॥
मैया शीतला माता...
**७. प्रसाद वितरण:**
आरती के बाद बासी भोजन का प्रसाद सभी को वितरित करें।
**८. मंदिर दर्शन:**
शीतला माता के मंदिर में दर्शन के लिए जाएं।
**बसोड़ा में क्या-क्या बनाएं:**
**मुख्य व्यंजन:**
**१. पूरी:**
- गेहूं के आटे की पूरी
- मैदा की पूरी
- बेसन की पूरी
**२. सब्जियां:**
- आलू की सूखी सब्जी (मसाले वाली)
- चने की सब्जी
- गोभी-आलू की सब्जी
- मटर-पनीर
- आलू-टमाटर की सब्जी
**३. मीठे व्यंजन:**
- हलवा (सूजी या आटे का)
- खीर
- गुड़ की खीर
- लड्डू
- मालपुआ
- गुझिया
**४. अन्य चीजें:**
- पापड़ (भुने हुए)
- आम का अचार
- नींबू का अचार
- चटनी
- दही (अगर ठंडा मौसम हो)
- रायता
**५. पेय:**
- ठंडाई
- शरबत
- नींबू पानी
- मीठा दूध
**विशेष बातें:**
**सावधानियां:**
- सप्तमी के दिन सुबह से खाना बनाना शुरू करें
- ऐसा खाना बनाएं जो अगले दिन भी ठीक रहे
- अष्टमी के दिन बिल्कुल चूल्हा न जलाएं
- केवल ठंडा भोजन करें
- चाय-कॉफी भी न बनाएं
**क्या न करें:**
- आग से संबंधित कोई काम न करें
- गर्म खाना न बनाएं
- गर्म पानी न गर्म करें
**बसोड़ा के लाभ:**
१. **स्वास्थ्य लाभ:**
- चेचक और संक्रामक रोगों से सुरक्षा
- बुखार से बचाव
- त्वचा रोगों से रक्षा
- परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ रहते हैं
२. **धार्मिक लाभ:**
- माता शीतला की कृपा
- घर में शांति
- बीमारियां दूर रहती हैं
- मनोकामना पूर्ति
३. **सामाजिक लाभ:**
- महिलाओं को आराम मिलता है
- परिवार साथ में खाता है
- पड़ोसियों में प्रसाद बांटने से संबंध मजबूत होते हैं
४. **पर्यावरण लाभ:**
- एक दिन ईंधन की बचत
- धुआं नहीं होता
- पर्यावरण को आराम मिलता है
**शीतला माता के मंदिर:**
भारत में कई प्रसिद्ध शीतला माता के मंदिर हैं:
- गुरुग्राम, हरियाणा
- गुड़गांव
- राजस्थान के विभिन्न शहर
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
**विशेष जानकारी:**
- बसोड़ा मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है
- राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार में यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है
- कुछ जगहों पर इसे 'बासोड़ा' या 'बसौड़ा' भी कहते हैं
- यह होली के बाद का पहला बड़ा त्योहार है
**महत्वपूर्ण बातें:**
- सप्तमी के दिन अच्छे से खाना बनाएं
- अष्टमी के दिन आग से दूर रहें
- पूरे परिवार के साथ मिलकर पूजा करें
- बासी भोजन को प्रेम से ग्रहण करें
- शीतला माता का ध्यान करें
- मंदिर में जरूर जाएं
- पड़ोसियों और गरीबों में प्रसाद बांटें
🙏 जय माता शीतला 🙏
🙏 शीतलायै नमः 🙏