परिचय
शिव ताण्डव स्तोत्र | Shiva Tandava Stotram — स्तोत्र, पाठ व जप
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले ।
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ॥
दमददमददमद् निनाद वद्धमार्वयम् ।
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥
Transliteration: Jaṭāṭavī gala‑jjala pravāha pāvita sthale |
Gale avalambya lambitāṃ bhujaṅga‑tunga mālikām ||
Damad damad damad damad nināda avad amarvayam |
Chakāra chaṇḍa tāṇḍavam tanotu naḥ Śivaḥ Śivam ||
Meaning (सारांश / भावार्थ):
- जटाटवी‑गलज्जलप्रवाह‑पावितस्थले — जिनकी जटाओं से प्रचुर जल का प्रवाह होता है और जो जल‑प्रवाह जटाओं को पवित्र करता है।
- गले‑अवलम्ब्य लम्बिता‑भुजंगतुंगमालिकाम् — उनके गले में सर्प‑माला लटकी हुई है।
- दमददमद… निनादवद्धमार्वयम् — दम‑दम की गर्जन/ढोल‑सी ध्वनि गूँजती है।
- चकार चण्डताण्डवं — उन्होंने उग्र, भयंकर ताण्डव किया।
- तनोतु नः शिवः शिवम् — (हे शिव) वह हमारा कल्याण/शिवत्व प्रदान करे।
पूरे श्लोक का भाव: शिव की जटाएं, सर्प‑माला, तेज और ताण्डव की गर्जन का जीवंत चित्रण है; यह पद भक्त से प्रार्थना करता है कि शिव का ताण्डव हम पर कल्याणकारी हो।
उपयोग (How to use) — विस्तृत, प्रैक्टिकल टिप्स
- कब जप/पाठ करें
- सोमवार और महाशिवरात्रि पर विशेष; पर किसी भी संकट, भय, मानसिक अशांति या वीरता‑वर्धन हेतु कभी भी कर सकते हैं।
- ब्रह्ममुहूर्त/प्रातः श्रेष्ठ; शाम‑समय में भी समूह पाठ लाभदायी होता है।
- कितनी बार जप करें (गणना)
- आरम्भिक: 3× या 7× समर्पण‑वाक्य के रूप में।
- नियमित: 21×/27× (शुरूआत में) → स्थिर अभ्यास पर 108× दैनिक प्रभावी।
- तीव्र साधना: 40‑दिन (108× प्रतिदिन) या 9‑दिन (Navaratri में) विशेष रूप से करें।
- यदि समय कम: केवल पहला पद 3×/11× जप कर भी शांति मिलती है।
- साधना‑विधि (स्टेप‑बाय‑स्टेप)
- स्वच्छ स्थान, हल्का दीप व धूप, गणेश–शिव का स्मरण; संभव हो तो शिवलिंग/मूर्ति सामने रखें।
- संकल्प (उद्देश्य) लें — उदाहरण: “मन की शान्ति/कठिन परीक्षा/बाधा‑निवारण।”
- बैठकर माला (108) से मंत्र‑जप; उच्चारण शुद्ध रखें। धीमी, स्थिर श्वास के साथ करें।
- पाठ के बाद 3× “ॐ नमः शिवाय” अथवा “हनुमते नमः” न कहें; परंपरा अनुसार “तपोभूमिषु” इत्यादि समापन‑श्लोक भी होते हैं।
- जप के बाद थोड़ा शान्त ध्यान रखें और प्रणाम करें।
- लय और उच्चारण के टिप्स
- “दमद दमद…” का लयात्मक उच्चारण स्तोत्र का मुख्या आकर्षण है — इसे rhythmic तरीके से बोलें।
- शुद्ध सन्दर्भ में संस्कृत उच्चारण रखें; यदि अनिश्चित हो तो transliteration पढ़ें या audio‑guide सुनें।
- धीमी शुरुआत करें, फिर गति बढ़ाएँ; समूह में पठित करने से प्रभाव तेज होता है।
- लाभ (Usefulness) — साध्य और अनुभवात्मक फायदे
- मानसिक साहस, आतंरिक दृढ़ता और भय‑निवृति में वृद्धि।
- मानसिक विक्षेप कम होना, ध्यान‑शक्ति में सुधार।
- पारंपरिक मान्यता: संकटों का नाश, कष्टों से रक्षण और गुरु/देवता‑आशीर्वाद।
- शास्त्रीय कथा: रावण के द्वारा रचित होने के कारण स्तोत्र में विशेष प्रभाव बताया जाता है, पर परिणाम श्रद्धा और नियमितता पर निर्भर है।
- सावधानियाँ और व्यवहारिक बातें
- भावकठोरता और सम्मान के साथ पढ़ें; केवल शब्दों का दोहराव ही पर्याप्त नहीं, मन की भक्ति जरूरी है।
- गंभीर मानसिक समस्या/रोग के समय केवल जप पर निर्भर न रहें; चिकित्सीय सलाह लें।
- विधि‑विवाद होने पर अपने गुरु/पुजारी की परम्परा का पालन करें।
- अभ्यास‑योजना (Quick plans)
- 7‑दिन स्टार्ट‑अप: दिन 1–3 = 21×, दिन 4–7 = 108×; प्रत्येक दिन 5‑10 मिनट ध्यान।
- 40‑दिन चैलेंज: हर दिन 108×; परिवर्तन नोट करने के लिए journal रखें (मानसिक स्थिति, बाधाएँ)।
- संकट चिकित्सा: कठिनाई के वक्त 11×/21× शांतचित्त से, तुरन्त लाभ अनुभव हो सकता है।
- ऑडियो/ताल और साधनाकाल के सुझाव
- धीमी‑मध्यम टेम्पो पर रिकॉर्डेड recitation सुनकर practice करें (tempo ~ 60–70 BPM initial).
- “Damad damad…” भाग को rhythmic तरीके से तालबद्ध करें — इससे मानसीकता और शरीर का parasympathetic calm बनता है।
- समूह‑पाठ से ऊर्जा और सामूहिक प्रभाव बढ़ता है।