होम / Mantra / शिव ताण्डव स्तोत्र | Shiva Tandava Stotram — स्तोत्र, पाठ व जप

शिव ताण्डव स्तोत्र | Shiva Tandava Stotram — स्तोत्र, पाठ व जप

Dev Mantra God Mantra Mantra
📖

परिचय

शिव ताण्डव स्तोत्र एक तीव्र, लयबद्ध और भावपूर्ण संस्कृत स्तोत्र है जिसे परम्परा के अनुसार रावण ने भगवान शिव के ताण्डव‑नृत्य का वर्णन करते हुए रचा था। यह स्तोत्र शक्ति, त्रासद घटनाओं का निवारण और भक्त के मन में स्थिरता व साहस जगाने के लिए पठनीय माना जाता है। नीचे प्रमुख आरम्भिक श्लोक (सबसे प्रसिध्द) दिया गया है साथ में transliteration, अर्थ और विस्तृत उपयोग‑निर्देश।

शिव ताण्डव स्तोत्र | Shiva Tandava Stotram — स्तोत्र, पाठ व जप

PDF

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले ।
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ॥
दमददमददमद् निनाद वद्धमार्वयम् ।
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥

Transliteration: Jaṭāṭavī gala‑jjala pravāha pāvita sthale |
Gale avalambya lambitāṃ bhujaṅga‑tunga mālikām ||
Damad damad damad damad nināda avad amarvayam |
Chakāra chaṇḍa tāṇḍavam tanotu naḥ Śivaḥ Śivam ||

Meaning (सारांश / भावार्थ):

  • जटाटवी‑गलज्जलप्रवाह‑पावितस्थले — जिनकी जटाओं से प्रचुर जल का प्रवाह होता है और जो जल‑प्रवाह जटाओं को पवित्र करता है।
  • गले‑अवलम्ब्य लम्बिता‑भुजंगतुंगमालिकाम् — उनके गले में सर्प‑माला लटकी हुई है।
  • दमददमद… निनादवद्धमार्वयम् — दम‑दम की गर्जन/ढोल‑सी ध्वनि गूँजती है।
  • चकार चण्डताण्डवं — उन्होंने उग्र, भयंकर ताण्डव किया।
  • तनोतु नः शिवः शिवम् — (हे शिव) वह हमारा कल्याण/शिवत्व प्रदान करे।

पूरे श्लोक का भाव: शिव की जटाएं, सर्प‑माला, तेज और ताण्डव की गर्जन का जीवंत चित्रण है; यह पद भक्त से प्रार्थना करता है कि शिव का ताण्डव हम पर कल्याणकारी हो।

उपयोग (How to use) — विस्तृत, प्रैक्टिकल टिप्स

  1. कब जप/पाठ करें
  • सोमवार और महाशिवरात्रि पर विशेष; पर किसी भी संकट, भय, मानसिक अशांति या वीरता‑वर्धन हेतु कभी भी कर सकते हैं।
  • ब्रह्ममुहूर्त/प्रातः श्रेष्ठ; शाम‑समय में भी समूह पाठ लाभदायी होता है।
  1. कितनी बार जप करें (गणना)
  • आरम्भिक: 3× या 7× समर्पण‑वाक्य के रूप में।
  • नियमित: 21×/27× (शुरूआत में) → स्थिर अभ्यास पर 108× दैनिक प्रभावी।
  • तीव्र साधना: 40‑दिन (108× प्रतिदिन) या 9‑दिन (Navaratri में) विशेष रूप से करें।
  • यदि समय कम: केवल पहला पद 3×/11× जप कर भी शांति मिलती है।
  1. साधना‑विधि (स्टेप‑बाय‑स्टेप)
  • स्वच्छ स्थान, हल्का दीप व धूप, गणेश–शिव का स्मरण; संभव हो तो शिवलिंग/मूर्ति सामने रखें।
  • संकल्प (उद्देश्य) लें — उदाहरण: “मन की शान्ति/कठिन परीक्षा/बाधा‑निवारण।”
  • बैठकर माला (108) से मंत्र‑जप; उच्चारण शुद्ध रखें। धीमी, स्थिर श्वास के साथ करें।
  • पाठ के बाद 3× “ॐ नमः शिवाय” अथवा “हनुमते नमः” न कहें; परंपरा अनुसार “तपोभूमिषु” इत्यादि समापन‑श्लोक भी होते हैं।
  • जप के बाद थोड़ा शान्त ध्यान रखें और प्रणाम करें।
  1. लय और उच्चारण के टिप्स
  • “दमद दमद…” का लयात्मक उच्चारण स्तोत्र का मुख्या आकर्षण है — इसे rhythmic तरीके से बोलें।
  • शुद्ध सन्दर्भ में संस्कृत उच्चारण रखें; यदि अनिश्चित हो तो transliteration पढ़ें या audio‑guide सुनें।
  • धीमी शुरुआत करें, फिर गति बढ़ाएँ; समूह में पठित करने से प्रभाव तेज होता है।
  1. लाभ (Usefulness) — साध्य और अनुभवात्मक फायदे
  • मानसिक साहस, आतंरिक दृढ़ता और भय‑निवृति में वृद्धि।
  • मानसिक विक्षेप कम होना, ध्यान‑शक्ति में सुधार।
  • पारंपरिक मान्यता: संकटों का नाश, कष्टों से रक्षण और गुरु/देवता‑आशीर्वाद।
  • शास्त्रीय कथा: रावण के द्वारा रचित होने के कारण स्तोत्र में विशेष प्रभाव बताया जाता है, पर परिणाम श्रद्धा और नियमितता पर निर्भर है।
  1. सावधानियाँ और व्यवहारिक बातें
  • भावकठोरता और सम्मान के साथ पढ़ें; केवल शब्दों का दोहराव ही पर्याप्त नहीं, मन की भक्ति जरूरी है।
  • गंभीर मानसिक समस्या/रोग के समय केवल जप पर निर्भर न रहें; चिकित्सीय सलाह लें।
  • विधि‑विवाद होने पर अपने गुरु/पुजारी की परम्परा का पालन करें।
  1. अभ्यास‑योजना (Quick plans)
  • 7‑दिन स्टार्ट‑अप: दिन 1–3 = 21×, दिन 4–7 = 108×; प्रत्येक दिन 5‑10 मिनट ध्यान।
  • 40‑दिन चैलेंज: हर दिन 108×; परिवर्तन नोट करने के लिए journal रखें (मानसिक स्थिति, बाधाएँ)।
  • संकट चिकित्सा: कठिनाई के वक्त 11×/21× शांतचित्त से, तुरन्त लाभ अनुभव हो सकता है।
  1. ऑडियो/ताल और साधनाकाल के सुझाव
  • धीमी‑मध्यम टेम्पो पर रिकॉर्डेड recitation सुनकर practice करें (tempo ~ 60–70 BPM initial).
  • “Damad damad…” भाग को rhythmic तरीके से तालबद्ध करें — इससे मानसीकता और शरीर का parasympathetic calm बनता है।
  • समूह‑पाठ से ऊर्जा और सामूहिक प्रभाव बढ़ता है।