बसोड़ा शीतला अष्टमी | शीतला माता पूजा विधि और कथा
बसोड़ा या शीतला अष्टमी चैत्र कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है। यह माता शीतला का त्योहार है। एक दिन पहले खाना बना लेते हैं और अष्टमी के दिन ...
पढ़ें →सही पूजा विधि जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पूजा करना। प्रत्येक देवी-देवता की अपनी विशेष पूजा विधि होती है। यहां विभिन्न पूजाओं की संपूर्ण विधि, आवश्यक सामग्री, मंत्र और पूजा का सही समय मिलेगा। घर पर पारंपरिक तरीके से पूजा करें।
बसोड़ा या शीतला अष्टमी चैत्र कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है। यह माता शीतला का त्योहार है। एक दिन पहले खाना बना लेते हैं और अष्टमी के दिन ...
पढ़ें →गणगौर राजस्थान का प्रमुख त्योहार है जो माता गौरी को समर्पित है। यह चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। होली के बाद से 18 दिन तक यह व्रत ...
पढ़ें →महा शिवरात्रि का व्रत फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस रात चार प्रह...
पढ़ें →प्रदोष व्रत त्रयोदशी पर किया जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है। प्रदोष यानी शाम का समय जब सूरज डूब जाता है। इस समय भगवान शिव की पूजा करने स...
पढ़ें →शनिवार त्रयोदशी व्रत की यह कथा एक निर्धन ब्राह्मणी की है। उसके दो पुत्र थे - धर्म और शुचिव्रत। शांडिल्य ऋषि की सलाह पर उन्होंने प्रदोष...
पढ़ें →शुक्रवार त्रयोदशी व्रत की यह कथा तीन मित्रों की है। एक सेठ पुत्र ने शुक्रास्त में अपनी पत्नी को विदा करा लिया। मार्ग में बैलगाड़ी टूट...
पढ़ें →बृहस्पतिवार त्रयोदशी व्रत की यह कथा देवताओं और वृत्रासुर के युद्ध की है। वृत्रासुर पूर्व में चित्ररथ नामक राजा था जिसे माता पार्वती ...
पढ़ें →बुधवार त्रयोदशी व्रत की यह कथा एक व्यक्ति की है जिसका नया विवाह हुआ था। उसने बुधवार को अपनी पत्नी को विदा करा लिया। परिवार ने मना किया ...
पढ़ें →मंगलवार प्रदोष व्रत की यह कथा एक वृद्धा की है जो हनुमान जी का व्रत रखती थी। उसका पुत्र मंगलिया था। एक साधु ने वृद्धा की परीक्षा लेने के ...
पढ़ें →सोमवार प्रदोष व्रत की यह कथा एक विधवा ब्राह्मणी की है जो भिक्षा मांगकर अपना और पुत्र का पेट भरती थी। एक दिन उसे विदर्भ का राजकुमार मिल...
पढ़ें →रविवार प्रदोष व्रत की यह कथा एक निर्धन ब्राह्मण के पुत्र के बारे में है। उसकी माता प्रदोष व्रत करती थी। एक दिन पुत्र गंगा स्नान करने ग...
पढ़ें →श्री सत्यनारायण व्रत कथा पांच भागों में एक पूर्ण आध्यात्मिक कथा है। देवर्षि नारद ने मानवों के कल्याण के लिए भगवान विष्णु से यह व्रत व...
पढ़ें →संतोषी माता व्रत की यह कथा एक स्त्री की है जिसके सात देवर थे और वह घर में उपेक्षित थी। उसका पति परदेश चला गया था। एक दिन उसने वन में कुछ स...
पढ़ें →बृहस्पतिवार व्रत की यह कथा एक निर्धन ब्राह्मण और उनकी पुत्री के बारे में है। ब्राह्मण बहुत गरीब था और उसकी पत्नी अस्वच्छ रहती थी। उन्...
पढ़ें →बृहस्पतिवार व्रत की यह कथा एक दानी राजा और उसकी रानी की है। राजा नियमित रूप से दान-पुण्य करता था और बृहस्पतिवार का व्रत रखता था, परंतु र...
पढ़ें →वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को सुहागिन स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है। इस व्रत में वट वृक्ष क...
पढ़ें →होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की भक्ति से होलिका भस्म हुई। जानें इसका महत्व, पूजा विधि और व्रत की परं...
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