करवा चौथ की कहानी ( Karwa Chauth Ki Kahani )
एक गाँव में एक साहुकार के सात बेटे और एक बेटी थी। सातों भाई और बहन में बहुत प्यार था। करवा चौथ के दिन सेठानी ने सातों बहुओं और बेटी के सा...
पढ़ें →भारतीय संस्कृति में व्रत और उपवास का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक, दोनों ही दृष्टि से बहुत महत्व है। व्रत केवल निराहार रहना नहीं, बल्कि ईश्वर के समीप जाने का एक संकल्प है। मान्यता है कि किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसकी कथा को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सुना या पढ़ा जाए। "आराधना" पोर्टल पर हमने आपके लिए श्री सत्यनारायण कथा, संकष्टी चतुर्थी, एकादशी और करवा चौथ जैसी सभी महत्वपूर्ण व्रत कथाएं उपलब्ध कराई हैं। यहाँ कथाओं के साथ-साथ व्रत के नियम, पूजन सामग्री, आवश्यक विधि और उद्यापन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया गया है। ये कथाएं हमें धैर्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। हमारे इस संग्रह के माध्यम से आप अपनी धार्मिक यात्रा को और अधिक समृद्ध बना सकते हैं और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को सुदृढ़ कर सकते हैं।
एक गाँव में एक साहुकार के सात बेटे और एक बेटी थी। सातों भाई और बहन में बहुत प्यार था। करवा चौथ के दिन सेठानी ने सातों बहुओं और बेटी के सा...
पढ़ें →किसी गाँव में एक साहूकार था और उसका एक बेटा व बहू भी थे. बहू कार्तिक माह में रोज सवेरे उठकर गंगा स्नान के लिए जाती थी. सुबह जल्दी जाते समय...
पढ़ें →प्राचीन समय में एक गाँव था जिसमें दो बहने रहा करती थी. एक बहन का नाम गंगा था तो दूसरी बहन का नाम जमुना था. एक बार दोनों बहने एक साहूकार के ...
पढ़ें →कार्तिक महीने में सब औरतें तुलसी माता को सींचने जाती । सब तो सींच कर आतीं परन्तु एक बुढ़िया आती और कहती कि हे तुलसी माता ! सब की दाता मैं ...
पढ़ें →गणेश जी की खीर कथा (Ganesh ji Ki Kheer Katha) एक बार गणेश जी एक छोटे बालक के रूप में चिमटी में चावल और चमचे में दूध लेकर निकले। वो हर किसी से कह रहे थे कि ...
पढ़ें →एक गूज़री थी । उसने अपनी बहू से कहा कि तू दूध – दही बेच आ । तो वह दूध – दही बेचने गई । कार्तिक महीना था । वहां पर सब औरतें पीपल सींचने आत...
पढ़ें →जाटका—भाटका की कहानी | विश्राम देवता की कहानी | नगर बसेरा की कहानी विश्राम देवता के समय किसी गाँव में एक भाटका और एक जाटका रहते थे; दो...
पढ़ें →एक लपसी था और एक तपसी था। तपसी हमेशा भगवान की तपस्या में लीन रहता था। लपसी रोज़ सवा सेर की लपसी बनाकर भगवान का भोग लगाकर ग्रहण कर लेता थ...
पढ़ें →एक मेंढक और एक मेंढकी थे। मेंढकी रोज गणेशजी का नाम लेती थी। एक दिन मेंढक ने कहा, "तू पराये पुरुष का नाम क्यों लेती है? अगर तू नाम लेगी तो...
पढ़ें →एक साहूकार की दो बेटियाँ थीं। दोनों बेटियाँ पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। बड़ी बेटी पूर्ण व्रत करती थी, पर छोटी बेटी अधूरा व्रत रखती थी। ...
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