भादवा चौथ माता की व्रत कथा | Bhadwa Chauth Mata ki vrat katha
एक समय की बात है, एक ब्राह्मण था जिसकी एक संतान और बहू थी। उनका जीवन मुश्किल में था क्योंकि ब्राह्मण और उसका बेटा किसी खास काम से नहीं ज...
पढ़ें →भारतीय संस्कृति में व्रत और उपवास का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक, दोनों ही दृष्टि से बहुत महत्व है। व्रत केवल निराहार रहना नहीं, बल्कि ईश्वर के समीप जाने का एक संकल्प है। मान्यता है कि किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसकी कथा को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सुना या पढ़ा जाए। "आराधना" पोर्टल पर हमने आपके लिए श्री सत्यनारायण कथा, संकष्टी चतुर्थी, एकादशी और करवा चौथ जैसी सभी महत्वपूर्ण व्रत कथाएं उपलब्ध कराई हैं। यहाँ कथाओं के साथ-साथ व्रत के नियम, पूजन सामग्री, आवश्यक विधि और उद्यापन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया गया है। ये कथाएं हमें धैर्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। हमारे इस संग्रह के माध्यम से आप अपनी धार्मिक यात्रा को और अधिक समृद्ध बना सकते हैं और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को सुदृढ़ कर सकते हैं।
एक समय की बात है, एक ब्राह्मण था जिसकी एक संतान और बहू थी। उनका जीवन मुश्किल में था क्योंकि ब्राह्मण और उसका बेटा किसी खास काम से नहीं ज...
पढ़ें →एक ब्राह्मण था, जो नित्य प्रतिदिन सुबह उठकर गंगा जी में स्नान के लिए जाता और फिर बिंदायक जी की पूजा करता था, साथ ही बिंदायक जी की कहानिय...
पढ़ें →एक समय की बात है, एक ब्राह्मण और उनकी पत्नी थीं। उनके पास एक पुत्र था जिनका नाम था। वह छोटा सा बच्चा गणेश जी का बड़ा भक्त था। वह दिन-रात ग...
पढ़ें →भगवान विष्णु माता लक्ष्मी जी से विवाह के लिए जाने लगे तब सारे देवी देवताओं को बारात में जाने के लिए बुलाया गया। जब सभी देवता गण जाने लग...
पढ़ें →एक गांव में एक ब्राह्मण व उसकी पत्नी रहते थे । ब्राह्मण देव बड़े ही श्री गणेश भक्त थे। उसने अपने घर में ही एक छोटा-सा सुन्दर-सा भगवान श्...
पढ़ें →एक अन्धी बुढ़िया माई के बेटाव बहू थे । वे लोग बहुत गरीब थे । बुढ़िया माई रोज गणेश जी की पूजा करती थी । एक दिन गणेश जी उससे प्रसन्न हुये ओर...
पढ़ें →तिल चौथ की कहानी – किसी शहर में एक सेठ – सेठानी रहते थे । उनके कोई भी संतान नहीं थी । इससे दोनों जने दुःखी रहते थे । एक बार सेठानी ने पड...
पढ़ें →एक गाँव में माँ-बेटी रहती थीं। एक दिन वह अपनी माँ से कहने लगी कि गाँव के सब लोग गणेश मेला देखने जा रहे हैं, मैं भी मेला देखने जाऊँगी। माँ ...
पढ़ें →एक छोटो सो छोरो आपका घरां से लड़ कर निकलगो और बोल्यो कि आज तो बिन्दायकजी स मिलकर ही घरां पाछो जाऊँगा । छोरो जातो-जातो बावनी-उजाड़ म चल्य...
पढ़ें →एक बार की बात है, एक गरीब और दृष्टिहीन बुढ़िया थी। उनके साथ उनका बेटा और बहू भी रहते थे। बुढ़िया हमेशा भगवान श्री गणेश की पूजा करती थी। ...
पढ़ें →एक मेंढक और मेंढकी थे। मेंढकी रोज़ गणेश जी की कहानी कहती थी। एक दिन मेंढक बोला कि तू पराये पुरुष का नाम क्यों लेती है ?अगर तू लेगी तो मैं त...
पढ़ें →एक गांव में एक भाई-बहिन रहते थे। बहिन का नियम था कि वह भाई का मुंह देखकर ही खाना खाती थी। बहिन की दूसरे गांव में शादी कर दी गई। वह ससुराल ...
पढ़ें →एक विधवा मालिन थी। उसके चार साल का बच्चा उसकी सास उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार करती थी। एक दिन की बात सास ने पोते-बहू को घर से निकाल दिया। ...
पढ़ें →एक शहर में देवरानी जेठानी रहती थी । देवरानी गरीब थी और जेठानी अमीर थी । देवरानी गणेश जी की भक्त थी। देवरानी का पति जंगल से लकड़ी काट कर ब...
पढ़ें →एक साहूकार और एक साहूकारनी थे। वह धर्म पुण्य को नहीं मानते थे। इसके कारण उनके कोई बच्चा नहीं था। एक दिन साहूकारनी पडोसी के घर गयी। उस द...
पढ़ें →एक राजा था, उसका प्रण था वह रोज सवा मन आंवले दान करके ही खाना खाता था। इससे उसका नाम आंवलया राजा पड़ गया। एक दिन उसके बेटे बहू ने सोचा कि र...
पढ़ें →एक गांव में एक साहूकार रहता था। साहूकार के एक बेटी थी । वह हर रोज पीपल सींचने जाती थी । पीपल के वृक्ष में से लक्ष्मी जी प्रकट होती थी और च...
पढ़ें →एक शहर में देवरानी जेठानी रहती थी । देवरानी गरीब थी और जेठानी अमीर थी । देवरानी गणेश जी की भक्त थी। देवरानी का पति जंगल से लकड़ी काट कर ब...
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