पावन व्रत कथाएं एवं पूजन विधि - संकल्प, धर्म और सौभाग्य

भारतीय संस्कृति में व्रत और उपवास का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक, दोनों ही दृष्टि से बहुत महत्व है। व्रत केवल निराहार रहना नहीं, बल्कि ईश्वर के समीप जाने का एक संकल्प है। मान्यता है कि किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसकी कथा को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सुना या पढ़ा जाए। "आराधना" पोर्टल पर हमने आपके लिए श्री सत्यनारायण कथा, संकष्टी चतुर्थी, एकादशी और करवा चौथ जैसी सभी महत्वपूर्ण व्रत कथाएं उपलब्ध कराई हैं। यहाँ कथाओं के साथ-साथ व्रत के नियम, पूजन सामग्री, आवश्यक विधि और उद्यापन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया गया है। ये कथाएं हमें धैर्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। हमारे इस संग्रह के माध्यम से आप अपनी धार्मिक यात्रा को और अधिक समृद्ध बना सकते हैं और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को सुदृढ़ कर सकते हैं।

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Vinayak Ji Ki Kahani विनायक जी की कहानी ( Bhadrapad Mahina भाद्रपद महीना )

एक ब्राह्मण था, जो नित्य प्रतिदिन सुबह उठकर गंगा जी में स्नान के लिए जाता और फिर बिंदायक जी की पूजा करता था, साथ ही बिंदायक जी की कहानिय...

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गणगोर बिंदायक जी की कहानी Gangaur Bindayak Ki Kahani ( Chetra Mahina चैत्र महीना )

भगवान विष्णु माता लक्ष्मी जी से विवाह के लिए जाने लगे तब सारे देवी देवताओं को बारात में जाने के लिए बुलाया गया। जब सभी देवता गण जाने लग...

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बिंदायक जी की कहानी Bindayak Ji Ki Kahani ( Kartik Mahina कार्तिक महीना )

एक अन्धी बुढ़िया माई के बेटाव बहू थे । वे लोग बहुत गरीब थे । बुढ़िया माई रोज गणेश जी की पूजा करती थी । एक दिन गणेश जी उससे प्रसन्न हुये ओर...

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माघ चौथ की कहानी (Magh Chauth Ki Kahani)

एक साहूकार और एक साहूकारनी थे। वह धर्म पुण्य को नहीं मानते थे। इसके कारण उनके कोई बच्चा नहीं था। एक दिन साहूकारनी पडोसी के घर गयी। उस द...

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आंवला नवमी की कथा (Amla Navmi Katha)

एक राजा था, उसका प्रण था वह रोज सवा मन आंवले दान करके ही खाना खाता था। इससे उसका नाम आंवलया राजा पड़ गया। एक दिन उसके बेटे बहू ने सोचा कि र...

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