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कामाख्या देवी आरती - शक्तिपीठ की दिव्य ऊर्जा और कृपा

कामाख्या माता शक्ति और सृजन की प्रतीक हैं। उनकी आरती का गान करने से साधक को आत्मिक बल प्राप्त होता है। आराधना पोर्टल पर माँ कामाख्या की आरती विधि-विधान और अर्थ सहित दी गई है। पूरी श्रद्धा से यह पाठ करने पर साधक की सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं और आध्यात्मिक जागृति मिलती है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 4868
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परिचय

कामाख्या देवी भारत की प्रमुख शक्ति‑पीठों में एक हैं — कामरूप (असम) की प्राचीन मंदिर परंपरा में इन्हें योनिरूप देवता के रूप में पूजा जाता है। कामाख्या माता शक्ति, कामना‑सिद्धि और सृष्टि‑उत्पत्ति के प्रतीक मानी जाती हैं; उनकी आराधना में विशेष रूप से नारी‑शक्ति, स्त्रीत्व और जीवन‑ऊर्जा का सम्मान नज़र आता है। अम्बुबाची (Ambubachi) मेले में श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं और माता की विशेष कृपा तथा व्रत‑कर्मों का पालन करते हैं। आरती करते समय श्रद्धा, शुद्ध मन और साधारण साफ‑सफाई रखें; दीप‑पुष्प और हल्दी/कुमकुम का चढ़ावा किया जाता है। नीचे आपकी दी हुई आरती को पठनीय, भावपूर्ण रूप में व्यवस्थित कर दिया गया है — श्रद्धा से पढ़ें या गायें।

कामाख्या देवी आरती | Kamakhya Devi Aarti

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॥ आरती — कामाख्या देवी की ॥

आरती कामाख्या देवी की, जगत् उधारक सुर सेवी की ॥
आरती कामाख्या देवी की …

गावत वेद पुराण कहानी, योनिरुप तुम हो महारानी ॥
सुर ब्रह्मादिक आदि बखानी, लहे दरस सब सुख लेवी की ॥
आरती कामाख्या देवी की …

दक्ष सुता जगदम्ब भवानी, सदा शंभु अर्धांग विराजिनी ॥
सकल जगत् को तारन करनी, जै हो मातु सिद्धि देवी की ॥
आरती कामाख्या देवी की …

तीन नयन कर डमरु विराजे, टीको गोरोचन को साजे ॥
तीनों लोक रूप से लाजे, जै हो मातु! लोक सेवी की ॥
आरती कामाख्या देवी की …

रक्त पुष्प कंठन वनमाला, केहरि वाहन खंग विशाला ॥
मातु करे भक्तन प्रतिपाला, सकल असुर जीवन लेवी की ॥
आरती कामाख्या देवी की …

कहैं गोपाल मातु बलिहारी, जाने नहिं महिमा त्रिपुरारी ॥
सब सत होय जो कहयो विचारी, जै जै सबहिं करत देवी की ॥
आरती कामाख्या देवी की …

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