होम / Aarti / श्री विश्वकर्मा आरती (Shri Vishwakarma Aarti)

श्री विश्वकर्मा आरती - सृजन और शिल्पकला के देवता की वंदना

भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के महान शिल्पकार माने जाते हैं। उनकी आरती से कार्यसिद्धि, कौशल और व्यवसायिक उन्नति की कामना की जाती है। कारीगरों और शिल्पियों के लिए यह आराधना विशेष फलदायी है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 4761
📖

परिचय

श्री विश्वकर्मा आरती विश्वकर्मा‑देव की पूजा और शिल्पकला‑संपन्नता की स्तुति है; इसे श्रृद्धा से पढ़ने से शिल्पकला, निर्माणकौशल और कार्यसिद्धि की कामना व्यक्त होती है। यह आरती विशेषकर शिल्पियों, कारीगरों और इंजीनियरों द्वारा सफल परियोजना और व्यवसायिक समृद्धि के लिए की जाती है।

श्री विश्वकर्मा आरती (Shri Vishwakarma Aarti)

PDF

॥ श्री विश्वकर्मा आरती ॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो, प्रभु विश्वकर्मा।
सुदामा की विनय सुनी और कंचन महल बनाये।
सकल पदारथ देकर प्रभु जी दुखियों के दुख टारे।
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

विनय करी भगवान कृष्ण ने, द्वारिकापुरी बनाओ।
ग्वाल बालों की रक्षा की, प्रभु की लाज बचायो।
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

रामचन्द्र ने पूजन की तब, सेतु बाँध रचि डारो।
सब सेना को पार कराया, प्रभु लंका विजय करावो।
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

श्री कृष्ण की विजय सुनो, प्रभु आके दर्शन दिखावो।
शिल्प‑विद्या का दो प्रकाश, मेरा जीवन सफल बनावो।
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

📢 शेयर करें