एकादशी आरती (Ekadashi Aarti)
॥ आरती — एकादशी माता की ॥ ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता॥ विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥ ॐ जय एकादशी… तेर...
पढ़ें →आरती हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा का पवित्र अंग है जिसे दीपक या कपूर की लौ से किया जाता है। प्रात:काल और संध्याकाल की आरती का विशेष महत्व है। आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और नकारात्मकता दूर होती है। यहां विभिन्न देवी-देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा।
॥ आरती — एकादशी माता की ॥ ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता॥ विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥ ॐ जय एकादशी… तेर...
पढ़ें →॥ श्री भैरव आरती ॥ सुनो जी भैरव लाड़िले, कर जोड़ कर विनती करूँ। कृपा तुम्हारी चाहिए, मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ। मैं चरण छुता आपके, अर...
पढ़ें →॥ श्री गिरिराज आरती ॥ ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज। संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज॥ ॐ जय जय जय गिरिराज...॥ इन्द्रादि...
पढ़ें →॥ श्री पुरुषोत्तम देव की आरती ॥ जय पुरुषोत्तम देवा, स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा। महिमा अमित तुम्हारी, सुर‑मुनि करें सेवा॥ जय पुरुषोत...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शिवशंकर जी की ॥ हर हर हर महादेव! सत्य, सनातन, सुन्दर, शिव सबके स्वामी। अविकारी अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥ हर हर हर महादेव! ...
पढ़ें →॥ कला जी राठौड़ आरती — श्री कल्लाजी राठौड़ ॥ जय राठौड़ कला, स्वामी जय राठौड़ कला। विघ्न हरण कल्याणी, गौरी शंभू लला ।।जय।। क्षत्रिय पदम ...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शनि देव की ॥ जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा। अखिल सृष्टि में कोटि‑कोटि जन करें तुम्हारी सेवा। जय शनि देवा&hellip...
पढ़ें →॥ आरती — श्री संतोषी माता की ॥ जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख सम्पत्ति दाता॥ जय संतोषी माता॥ सुन्दर चीर स...
पढ़ें →॥ आरती — श्री बृहस्पति जी की ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा। छिन‑छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा॥ तुम पूर...
पढ़ें →॥ आरती — श्री कृष्ण जी की ॥ आरती युगल किशोर की कीजै, तन‑मन‑धन न्यौछावर कीजै॥ गौरश्याम मुख निखरन लीजै, हरि का स्वरूप नयन भरे पीजै॥ र...
पढ़ें →॥ आरती — श्री हनुमानजी की ॥ आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके। अंज...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शिवजी की ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतु...
पढ़ें →॥ आरती — श्री सूर्य जी की ॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्द...
पढ़ें →॥ आरती — श्री राणी सती जी की ॥ जय श्री राणी सती मैया, जय जगदम्ब सती जी। अपने भक्तजनों की दूर करो विपती॥ जय श्री राणी सती मैया। अपनि अ...
पढ़ें →॥ आरती — श्री जाहरवीर जी की ॥ जय जय जाहरवीर हरे, जय जय गूगा वीर हरे। धरती पर आ करके, भक्तों के दुख दूर करे॥ जय जय जाहरवीर हरे॥ जो कोई भ...
पढ़ें →॥ गोरख आरती — दोहा‑शैली (Shree Gorakhnath Aarti) ॥ जय गोरख देवा, जय गोरख देवा। कर कृपा मम ऊपर, नित्य करूँ सेवा॥ जय गोरख देवा॥ शीश जटा अति‑सुन्दर, भा...
पढ़ें →॥ आरती — श्री साईं बाबा जी की (दोहा‑शैली) ॥ आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की। जा की कृपा विपुल सुखकारी, दुःख शोक, संकट, भ...
पढ़ें →॥ आरती — देवी सिद्धिदात्री जी की (दोहा‑शैली) ॥ जय सिद्धिदात्री माँ, तू सिद्धि की दाता। तु भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता॥ जय सिद्ध...
पढ़ें →