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गुरुवार आरती - बृहस्पति देव और श्री हरि की पावन स्तुति

गुरुवार की आरती करने से शिक्षा, बुद्धि और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। गुरु देव की कृपा से जीवन में मान-सम्मान और सुख की प्राप्ति होती है। आराधना पोर्टल पर उपलब्ध गुरुवार की आरती शुद्ध हिंदी में है। पूरी श्रद्धा से यह पाठ करने पर परिवार में सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 231
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परिचय

गुरुवार का दिन बृहस्पति‑देव को समर्पित माना जाता है, जो वेदों में ज्ञान, धर्म, शिक्षा, न्याय और वैभव के प्रवर्तक ग्रहीय देवता माने गए हैं। पारंपरिक रूप से इस दिन व्रत, दान‑पुण्य और गुरु‑पूजा का विशेष महत्व होता है — विद्यार्थी, गृहस्थ और व्यवसायी सभी बृहस्पति की कृपा पाने हेतु शुक्रवार‑व्रत या गुरुवार‑व्रत रखते हैं। भरा‑पूर भोग, पीला वस्त्र, हल्दी‑कुमकुम, चने/कदली फल और घी का दीप अर्पित करना शुभ माना जाता है; साथ में “ॐ बृहस्पतये नमः” जैसा छोटा मंत्र जपने से मन में स्थिरता और सच्ची श्रद्धा आती है। बृहस्पति की आराधना से विद्या‑वृद्धि, करियर में सफलता, वैवाहिक/परिवारिक शुभता और ऋण‑दोषों का निवारण होने की परंपरागत मान्यता है। श्रद्धा‑भाव से आरती, पाठ और दान‑कर्म मिलाकर यदि नियमित किया जाये तो जीवन में सत्कार्य सिद्धि और बौद्धिक उन्नति के संकेत देखने को मिलते हैं।

गुरुवार आरती (Thursday Aarti)

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॥ आरती — श्री बृहस्पति जी की ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन‑छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
जगत्पिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तन‑मन‑धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बन्धन हारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, सन्तन सुखकारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे,
जेष्टानन्द बन्दसो सो निश्चय पावे॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

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