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राणी सती की आरती (Aarti of Queen Sati)

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परिचय

श्री रानी सती (राणी सती मैया) का स्थानिक और लोक‑श्रद्धा में विशेष महत्त्व है—वे भक्तों की रक्षा करने वाली, संकट निवारक और धर्मपरायण देवी के रूप में पूजी जाती हैं। उनकी आरती श्रद्धा‑भाव से गायी या पढ़ी जाती है; घर‑मंदिर या भजन‑सभा में इसका पाठ भक्तों में विश्वास, शान्ति और आशिर्वाद का अनुभव जगाता है।

राणी सती की आरती (Aarti of Queen Sati)

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॥ आरती — श्री राणी सती जी की ॥

जय श्री राणी सती मैया, जय जगदम्ब सती जी।
अपने भक्तजनों की दूर करो विपती॥
जय श्री राणी सती मैया।

अपनि अनन्त ज्योति अखण्डित, मंडित चहुँककूंभा।
दुरजन दलन खडग की, विद्युतसम प्रतिभा॥
जय श्री राणी सती मैया।

मरकत मणि मन्दिर अति मंजुल, शोभा लखि न बड़े।
ललित ध्वजा चहुँ ओर, कंचन कलश धरे॥
जय श्री राणी सती मैया।

घण्टा घनन घड़ावल बाजत, शंख मृदंग घुरे।
किन्नर गायन करते, वेद ध्वनि उचरे॥
जय श्री राणी सती मैया।

सप्त मातृका करें आरती, सुरगम ध्यान धरे।
विविध प्रकार के व्यंजन, श्री फल भेंट धरे॥
जय श्री राणी सती मैया।

संकट विकट विदारणी, नाशनी हो कुमति।
सेवक जन ह्रदय पटले, मृदुल करन सुमति॥
जय श्री राणी सती मैया।

अमल कमल दल लोचनी, मोचनी त्रय तापा।
दास आयो शरण आपकी, लाज रखो माता॥
जय श्री राणी सती मैया।

श्री राणी सती मैयाजी की आरती जो कोई नर गावे
सदनसिद्धि नवनिधि, मनवांछित फल पावे॥
जय श्री राणी सती मैया।