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श्री कल्लाजी राठौड़ आरती - वीर लोकदेवता की गौरवशाली स्तुति

वीर कल्लाजी राठौड़ की आरती भक्तों को अदम्य साहस प्रदान करती है। वे राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता और शेषनाग के अवतार माने जाते हैं। आराधना पोर्टल पर वीर कल्लाजी की पावन आरती संकलित है। इस आरती का नियमित गान करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की विपत्तियाँ दूर होती हैं।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 3752
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परिचय

श्री कल्लाजी राठौड़ लोक‑परंपरा व राजपूत रीतियों में पूजनीय एक वीर‑देवता हैं। वे रणभूमि के रक्षक, परिश्रम और पराक्रम के प्रतीक माने जाते हैं और विशेषकर राठौड़ कुल एवं राजस्थान के कई स्थानों पर श्रद्धा‑भाव से पूजे जाते हैं। उनकी आराधना में साहस, परिवार की रक्षा, कुल‑सम्मान तथा संकटमोचन की प्रार्थना शामिल रहती है — इसलिए उनकी आरती, भजन‑कीर्तन और मेले/भंडारे लोक‑आस्था के अभिन्न अंग हैं। साधारण पूजन में दीप, पुष्प, चंदन, भोग और बढती हुई कथा‑गाथा का पाठ किया जाता है; श्रद्धा के साथ आरती करने से भक्तों को आत्मबल, ऐक्य और आध्यात्मिक सांत्वना का अनुभव होता है। नीचे आरती को पठनीय, दोहा‑शैली में व्यवस्थित किया गया है — श्रद्धा व निष्ठा से पढ़ें या गायें

आरती श्री कल्लाजी राठौड़ (Aarti of Shri Kallaji Rathore)

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॥ कला जी राठौड़ आरती — श्री कल्लाजी राठौड़ ॥

जय राठौड़ कला, स्वामी जय राठौड़ कला।
विघ्न हरण कल्याणी, गौरी शंभू लला ।।जय।।

क्षत्रिय पदम दिवाकर, करुणा निधि प्यारे ।
मेदपाट मणि भूषण, मरुधर उजियारे ।।जय।।

अच्चल शस्त्र धनी पितु, श्वेत कुंवर माता ।
ईष्ट अम्ब प्रतिपालक, गुरु भैरव ज्ञाता ।।जय।।

कर आयुध शिशु काले, रण सम्पन्न भयो ।
देश हिते तज तोरण, अरि पे कूच कियो ।।जय।।

कृष्णा मांग अपूरण, तुम पर बलिहारी ।
जीवन सर्व समर्पण, कीन्हा रह क्वांरी ।।जय।।

तो लख विक्रम भुजबल, राणा सनमान्यो ।
लाखो शत्रु संहारे, अकबर अकुलानो ।।जय।।

जयमल भुजा उठायो, पंगु जबै पायो ।
अनुपम रूप चतुर्भुज, शत्रुन पे छायो ।।जय।।

काट्यो शीश चढ़ायो, जगदम्बा चरणे ।
कमधज होय लड़्यो धड़, का विधि यश वरणे ।।जय।।

तृषित कम्धज जबे तब, हे भारत प्रहरी ।
द्रवि हों हृदय शमी तरु, झरझर नीर झरी ।।जय।।

दी तन चौबीस आहुति, कृष्णा तोय चिता ।
धन्य सती माँ जिनका, त्याग अकथ अमिता ।।जय।।

करे आरती तिहरी, फैलायें पल्ला ।
रक्षा करो अपनाओ, कृपा सिन्धु कल्ला ।।जय।।

जय हो जय भय हारी, पवन रूप शेषा ।
आओ हृदय बिराजो, मेटो मम् क्लेषा ।।जय।।

सिद्ध जपे बहु साधक, सुर नर मुनि ध्यावे ।
'शील' जोय शरणागत, सुख संपत्ति पावे ।।जय।।

जय राठौड़ कला, स्वामी जय राठौड़ कला।
विघ्न हरण कल्याणी, गौरी शंभू लला ।।जय।।

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