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सोमवार आरती (Monday Aarti)

सोमवार की आरती महादेव भोलेनाथ की असीम कृपा पाने का सरल मार्ग है। शिव भक्ति से मन के क्लेश दूर होते हैं और शांति मिलती है। आराधना पोर्टल पर शिवजी की यह आरती शुद्ध हिंदी में उपलब्ध है। पूरी श्रद्धा से सोमवार के दिन यह आरती करने पर महादेव भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

Aarti Saptwar Aarti Collection
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परिचय

सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। श्रद्धा‑भाव से शिवजी की आरती और व्रत करने से भक्ति, शांति, कष्ट निवारण और मनोकामना‑सिद्धि की प्रार्थना की जाती है। नीचे आरती दोहा‑शैली में दी जा रही है — श्रद्धा और एकाग्रचित्त से पढ़िए या गायिए।

सोमवार आरती (Monday Aarti)

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॥ आरती — श्री शिवजी की ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंगा बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥