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श्री जाहरवीर आरती (Shri Jaharveer Aarti)

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परिचय

श्री जाहरवीर जी की आरती भक्तों में श्रद्धा, धर्म और सेवा‑भाव जगाती है। यह आरती जाहरवीर के पराक्रम, तप और भक्तों के प्रति उनके करुणा‑स्वभाव का स्मरण कराती है; श्रद्धा‑भाव से पढ़ने या गाने पर मन को शांति और आशिर्वाद का अनुभव होता है।

श्री जाहरवीर आरती (Shri Jaharveer Aarti)

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॥ आरती — श्री जाहरवीर जी की ॥

जय जय जाहरवीर हरे, जय जय गूगा वीर हरे।
धरती पर आ करके, भक्तों के दुख दूर करे॥
जय जय जाहरवीर हरे॥

जो कोई भक्ति करे प्रेम से, हाँ जी करे प्रेम से।
भागे दुख परे विघ्न हरे, मंगल के दाता तन का कष्ट हरे॥
जय जय जाहरवीर हरे॥

जेवर राव के पुत्र कहाये, रानी बाछल माता।
बागड़ जन्म लिया वीर ने, जय‑जयकार करे माता॥
जय जय जाहरवीर हरे॥

धर्म की बेल बढ़ाई निश‑दिन, तपस्या रोज करे।
दुष्ट जनों को दण्ड दिया, जग में रहे आप खरे॥
जय जय जाहरवीर हरे॥

सत्य‑अहिंसा का व्रत धारा, झूठ से आप डरे।
वचन‑भंग को बुरा समझकर, धरती से आप निकरे॥
जय जय जाहरवीर हरे॥

माड़ी में तुम करी तपस्या, अचरज सभी करे।
चारों दिशा में भक्त आ रहे, आशा लिए उतरे॥
जय जय जाहरवीर हरे॥

भवन पधारो अटल क्षत्र कह, भक्तों की सेवा करे।
प्रेम से सेवा करे जो कोई, धन के भण्डार भरे॥
जय जय जाहरवीर हरे॥

तन‑मन‑धन अर्पण करके, भक्ति प्राप्त करे।
भादों कृष्ण नौमी के दिन, पूजन‑भक्ति करे॥
जय जय जाहरवीर हरे॥