श्री गणेश आरती (Shree Ganesh Aarti)
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणे...
पढ़ें →आरती हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा का पवित्र अंग है जिसे दीपक या कपूर की लौ से किया जाता है। प्रात:काल और संध्याकाल की आरती का विशेष महत्व है। आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और नकारात्मकता दूर होती है। यहां विभिन्न देवी-देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणे...
पढ़ें →॥ आरती — श्री लक्ष्मीजी की ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि‑विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ ...
पढ़ें →॥ आरती — कुंजबिहारी की (श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी) ॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्ती माला, बजावै मुर...
पढ़ें →॥ श्री खाटू श्यामजी की आरती ॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ रतन जड़...
पढ़ें →॥ आरती — जय अम्बे गौरी ॥ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि‑ब्रह्मा‑शिवरी॥ जय अम्बे गौरी॥ मांग सिंदूर व...
पढ़ें →॥ श्री गायत्रीजी की आरती ॥ जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मार्ग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥ जयति जय गायत्री माता॥ ...
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