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श्री साईं बाबा आरती (Shri Sai Baba Aarti)

शिरडी के श्री साईं बाबा की आरती श्रद्धा, सबूरी और मानवता का संदेश देती है। साईं बाबा की आराधना से मन को शांति, धैर्य और संकटों से उबरने की शक्ति मिलती है। जो भक्त सच्चे भाव से उनकी आरती करता है, उसके जीवन में विश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है।

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परिचय

श्री साईं बाबा — शिरडी के अवधूत व गुरुदेव — सभी धर्मों के अनुयायियों के प्रिय थे। उनकी शिक्षाएँ प्रेम, समता और समर्पण पर आधारित हैं। श्रद्धा‑भाव से उनकी आरती करने से मन को शांति, रक्षा और आशीर्वाद की अनुभूति होती है।

श्री साईं बाबा आरती (Shri Sai Baba Aarti)

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॥ आरती — श्री साईं बाबा जी की (दोहा‑शैली) ॥

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।
जा की कृपा विपुल सुखकारी, दुःख शोक, संकट, भयहारी॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।

शिरडी में अवतार रचाया, चमत्कार से तत्व दिखाया।
कितने भक्त चरण पर आये, वे सुख शान्ति चिरंतन पाये॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।

भाव धरै जो मन में जैसा, पावत अनुभव वो ही वैसा।
गुरु की उदी लगावे तन को, समाधान लाभत उस मन को॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।

साईं नाम सदा जो गावे, सो फल जग में शाश्वत पावे।
गुरुवासर करि पूजा‑सेवा, उस पर कृपा करत गुरुदेवा॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।

राम, कृष्ण, हनुमान रूप में, दे दर्शन जानत जो मन में।
विविध धर्म के सेवक आते, दर्शन कर इच्छित फल पाते॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।

जय बोलो साईं बाबा की, जय बोलो अवधूत गुरु की।
"साईंदास" आरती को गावै, घर में बसि सुख, मंगल पावे॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की।