होम / Aarti / शनिवार आरती (Saturday Aarti)

शनिवार आरती - शनि देव के प्रकोप से शांति और न्याय की वंदना

शनिवार के दिन भगवान शनि देव की आरती करने से शनि दोष और कष्टों में राहत मिलती है। शनि देव कर्मों के अनुसार फल देते हैं। आराधना पर शनि आरती के साथ उन्हें प्रसन्न करने के सरल उपाय भी दिए गए हैं। पूरी श्रद्धा से यह पाठ करने पर जीवन में अनुशासन, स्थिरता और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

📅 21 Oct, 2025 📖 Aarti 👁️ Views: 4644
📖

परिचय

शनिवार का दिन भगवान शनि (शनिदेव) को समर्पित माना जाता है। शनि न्याय का प्रतीक हैं — वे कर्मफल देने वाले ग्रह हैं जो उचित परिणाम प्रदान करते हैं। शनि की कृपा से जीवन में अनुशासन, धैर्य, कर्तव्यनिष्ठा और दीर्घकालिक सफलता मिलती है; परंतु शनि की प्रकोप से व्यवधान, बाधाएँ और कठिनाइयाँ भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए शनि की आराधना में सत्य, संयम और परिश्रम का महत्व बताया गया है। पारंपरिक उपायों में शनिवार व्रत, तेल/तिल का दान, काले वस्त्र/काले तिल का अर्पण, शनिदेव की सेवा और शनिवार के दिन मंदिर जाकर आरती‑पूजा करना प्रमुख हैं। शनिदेव की आराधना करने से भय, कष्ट और कर्ज‑दोष कम होते हैं तथा जीवन में संतुलन व स्थिरता आती है। आरती सादगी और श्रद्धा से पढ़ें — मन में अभ्यर्थना और आत्मनिरीक्षण रखें, और यदि व्रत रखते हैं तो स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाएँ।

शनिवार आरती (Saturday Aarti)

PDF

॥ आरती — श्री शनि देव की ॥

जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा।
अखिल सृष्टि में कोटि‑कोटि जन करें तुम्हारी सेवा।
जय शनि देवा…॥

जा पर कुपित होऊं तुम स्वामी, घोर कष्ट वह पाए।
धन वैभव और मान‑कीर्ति, सब पलभर में मिट जाए।
राजा नल को लगी शनि दशा, राजपाट हर लेवा।
जय शनि देवा…॥

जा पर प्रसन्न होऊं तुम स्वामी, सकल सिद्धि वह पावे।
तुम्हारी कृपा रहे तो, उसको जग में कौन सतावे।
तांबा, तेल और तिल से जो, करें भक्तजन सेवा।
जय शनि देवा…॥

हर शनिवार तुम्हारी, जय‑जय कार जगत में होवे।
कलियुग में शनिदेव महात्तम, दुःख दरिद्रता धोवे।
करूँ आरती भक्ति भाव से, भेंट चढ़ाऊँ मेवा।
जय शनि देवा…॥

📢 शेयर करें