परिचय
शनिवार आरती (Saturday Aarti)
॥ आरती — श्री शनि देव की ॥
जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा।
अखिल सृष्टि में कोटि‑कोटि जन करें तुम्हारी सेवा।
जय शनि देवा…॥
जा पर कुपित होऊं तुम स्वामी, घोर कष्ट वह पाए।
धन वैभव और मान‑कीर्ति, सब पलभर में मिट जाए।
राजा नल को लगी शनि दशा, राजपाट हर लेवा।
जय शनि देवा…॥
जा पर प्रसन्न होऊं तुम स्वामी, सकल सिद्धि वह पावे।
तुम्हारी कृपा रहे तो, उसको जग में कौन सतावे।
तांबा, तेल और तिल से जो, करें भक्तजन सेवा।
जय शनि देवा…॥
हर शनिवार तुम्हारी, जय‑जय कार जगत में होवे।
कलियुग में शनिदेव महात्तम, दुःख दरिद्रता धोवे।
करूँ आरती भक्ति भाव से, भेंट चढ़ाऊँ मेवा।
जय शनि देवा…॥