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रविवार आरती (Sunday Aarti)

Aarti Saptwar Aarti Collection
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परिचय

रविवार प्रभु सूर्यदेव को समर्पित है। श्रद्धा‑भाव से श्री सूर्यजी की आरती करने से स्वास्थ्य, दीप्ति, नेत्रदृष्टि और मनोबल बढ़ने की प्रार्थना की जाती है। नीचे आरती को दोहा/दोहा‑जैसी शैली में प्रस्तुत किया गया है — श्रद्धा के साथ पढ़िए या गायिए।

रविवार आरती (Sunday Aarti)

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॥ आरती — श्री सूर्य जी की ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥

सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥

सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥

सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥

कमल-समूह-विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरत, अति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥

नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥