परिचय
होली के दिन सुबह स्नान करके सबसे पहले घर के देवी-देवताओं, विशेषकर राधा-कृष्ण को गुलाल अर्पित किया जाता है, फिर बड़ों के पैरों पर गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिया जाता है। कई घरों में पिछली रात की होलिका की राख का तिलक भी लगाया जाता है। इसके बाद दिन भर रंग-गुलाल, गुजिया और मिलने-जुलने का उत्सव चलता है।
नीचे होली की पूजा की सामग्री, घर पर प्राकृतिक रंग बनाने का तरीका, सुबह की पूजा विधि और सुरक्षित होली के नियम दिए गए हैं।
होली का महत्व
होली 2027 कब है?
वर्ष 2027 में रंगवाली होली (धुलेंडी / धुलंडी) सोमवार, 22 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। इससे एक दिन पहले रविवार, 21 मार्च 2027 की रात फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होगा।
- होलाष्टक प्रारंभ: 16 मार्च 2027 (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी)
- आमलकी (रंगभरी) एकादशी: 18 मार्च 2027
- होलिका दहन: 21 मार्च 2027, रविवार की रात
- फाल्गुन पूर्णिमा तिथि: 21 मार्च शाम लगभग 06:21 से 22 मार्च शाम लगभग 04:13 तक
- रंगवाली होली (धुलेंडी): 22 मार्च 2027, सोमवार
- रंग पंचमी: होली के बाद चैत्र कृष्ण पंचमी को (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि में)
होलिका दहन के मुहूर्त और 2027 में भद्रा की पूरी जानकारी के लिए होलिका दहन का पेज देखें।
होली का महत्व
- बुराई पर अच्छाई की जीत: होली भक्त प्रह्लाद की भक्ति की जीत और होलिका के अंत की खुशी में मनाई जाती है। रात में होलिका दहन और अगले दिन रंगों का उत्सव — दोनों मिलकर पूरा होली पर्व बनाते हैं।
- राधा-कृष्ण का प्रेम: ब्रज में होली भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम और लीलाओं का उत्सव है। इसीलिए मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
- वसंत और नई फसल का स्वागत: होली वसंत ऋतु के पूरे खिलने और रबी की नई फसल के तैयार होने का उत्सव है। प्राचीन ग्रंथों में इसे "वसंतोत्सव" और "मदनोत्सव" भी कहा गया है।
- भाईचारा और मेल-मिलाप: होली के दिन छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है। लोग पुराने झगड़े भूलकर गले मिलते हैं। "बुरा न मानो होली है" — यही इस पर्व की भावना है।
- नव वर्ष की ओर: होली फाल्गुन मास के अंत और चैत्र मास की शुरुआत पर आती है, जिससे हिंदू नव वर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) का आगमन होता है।
होली की कथाएं
1. श्रीकृष्ण और राधा रानी की होली
लोक कथाओं के अनुसार बालक कृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर उदास होकर माता यशोदा से पूछते थे — "राधा इतनी गोरी क्यों है और मैं इतना काला क्यों हूँ?" माता यशोदा ने हंसकर कहा — "जाओ, राधा के चेहरे पर भी अपनी पसंद का रंग लगा दो।" नटखट कान्हा अपने सखाओं के साथ बरसाना गए और राधा रानी तथा गोपियों पर रंग डाल दिया। गोपियों ने भी लाठियां लेकर ग्वालों को भगाया।
तभी से ब्रज में रंगों की होली और लट्ठमार होली की परंपरा चली आ रही है। आज भी नंदगांव के हुरियारे (पुरुष) बरसाना जाते हैं और बरसाना की हुरियारिनें (महिलाएं) उन पर प्रेम से लाठियां बरसाती हैं, जबकि पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। अगले दिन यही उत्सव नंदगांव में होता है।
2. भक्त प्रह्लाद और होलिका
असुर राजा हिरण्यकशिपु ने अपने विष्णु भक्त पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, पर भगवान की कृपा से होलिका जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गया। प्रह्लाद के बचने की खुशी में अगले दिन लोगों ने एक-दूसरे पर रंग और गुलाल डालकर उत्सव मनाया। पूरी कथा होलिका दहन के पेज पर दी गई है।
3. कामदेव और भगवान शिव
एक अन्य कथा के अनुसार माता पार्वती चाहती थीं कि भगवान शिव का ध्यान भंग हो और वे उनसे विवाह करें। देवताओं के कहने पर कामदेव ने शिव जी पर पुष्प बाण चलाया। ध्यान भंग होने पर क्रोधित शिव जी ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में रति की प्रार्थना पर शिव जी ने कामदेव को बिना शरीर (अनंग) के जीवित रहने का वरदान दिया। दक्षिण भारत में इस प्रसंग को कामदहन के रूप में होली के समय मनाया जाता है।
देश भर में होली की परंपराएं
ब्रज की होली
- लड्डू होली (बरसाना): श्री राधा रानी मंदिर में भक्तों पर लड्डू बरसाए जाते हैं।
- लट्ठमार होली (बरसाना और नंदगांव): होली से लगभग एक सप्ताह पहले, फाल्गुन शुक्ल नवमी और दशमी को।
- फूलों की होली (वृंदावन): बांके बिहारी मंदिर में रंगभरी एकादशी के आसपास रंगों की जगह फूलों की वर्षा।
- विधवा होली (वृंदावन): गोपीनाथ मंदिर में विधवा माताएं भी गुलाल और फूलों से होली खेलती हैं।
- दाऊजी का हुरंगा (बलदेव): होली के अगले दिन, जिसमें महिलाएं पुरुषों के कपड़े फाड़कर उनसे कोड़े बनाती हैं।
ब्रज के उत्सवों की सटीक तारीखें हर साल मंदिर प्रशासन तय करता है, इसलिए यात्रा से पहले मंदिर से पुष्टि कर लें।
अन्य राज्यों की होली
- रंगभरी एकादशी (काशी): बाबा विश्वनाथ के गौना और गुलाल के साथ काशी में होली की शुरुआत। मणिकर्णिका घाट पर मसान की होली भी प्रसिद्ध है।
- डोल जात्रा / डोल पूर्णिमा (बंगाल, ओडिशा): राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को झूले (डोल) पर बैठाकर नगर में घुमाया जाता है। शांतिनिकेतन का बसंत उत्सव भी इसी दिन होता है।
- होला मोहल्ला (पंजाब): होली के अगले दिन आनंदपुर साहिब में सिख परंपरा का यह पर्व गुरु गोबिंद सिंह जी ने शुरू किया था, जिसमें गतका, घुड़सवारी और शौर्य प्रदर्शन होते हैं।
- रंग पंचमी (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र): होली के पांचवें दिन इंदौर की गेर (रंगों का जुलूस) बहुत प्रसिद्ध है।
- शिमगा (कोंकण) और फगुआ (बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश): पालकी, लोक नृत्य और फाग गीतों के साथ होली।
- मंजल कुली (केरल): हल्दी के पानी से होली खेलने की परंपरा।
- कुमाऊंनी होली (उत्तराखंड): बैठकी और खड़ी होली — शास्त्रीय रागों पर आधारित होली गायन।
होली के पारंपरिक पकवान
- गुजिया: खोया, सूजी, मेवे और चीनी से भरी होली की सबसे खास मिठाई।
- ठंडाई: दूध, बादाम, सौंफ, खसखस, काली मिर्च, इलायची और गुलाब से बना ठंडा पेय।
- दही भल्ले, कांजी वड़ा, पापड़ी चाट
- मालपुआ, पूरनपोली (महाराष्ट्र), नमकपारे, शक्करपारे
- पापड़ और चिप्स — जो होली से पहले घरों में मिलकर बनाए जाते हैं।
पूजा सामग्री
होली की सुबह की पूजा के लिए
- भगवान के लिए हर्बल गुलाल — लाल, पीला, हरा, गुलाबी (अलग पात्र में)
- फूल और फूलों की पंखुड़ियां (गुलाब, गेंदा)
- घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती
- रोली, अक्षत, चंदन
- पिछली रात की होलिका की राख (तिलक के लिए)
- भोग के लिए गुजिया, मालपुआ, ठंडाई और मौसमी फल
- तुलसी दल (श्रीकृष्ण के भोग के लिए)
घर पर प्राकृतिक रंग बनाने की सामग्री
- पीला: हल्दी + बेसन (2:1 अनुपात), या गेंदे के फूल की सूखी पंखुड़ियों का पाउडर
- केसरिया/नारंगी (गीला): टेसू (पलाश) के फूल रात भर पानी में भिगोकर या उबालकर
- लाल/गुलाबी: सूखे गुड़हल या गुलाब की पंखुड़ियों का पाउडर, लाल चंदन; गीले गुलाबी रंग के लिए चुकंदर का रस
- हरा: मेहंदी पाउडर + आटा, या सूखी पालक/धनिया/नीम की पत्तियों का पाउडर
- बैंगनी (गीला): काले गाजर या चुकंदर को उबालकर
- सूखे रंग का बेस बनाने के लिए अरारोट, कॉर्नफ्लोर या आटा
त्वचा और बालों की सुरक्षा के लिए
- नारियल या सरसों का तेल (रंग खेलने से पहले लगाने के लिए)
- सनस्क्रीन, लिप बाम
- पूरी बाजू के पुराने सूती कपड़े, धूप का चश्मा
- रंग छुड़ाने के लिए बेसन, दही, नींबू (हल्का), माइल्ड साबुन
पूजा विधि
चरण 1: एक रात पहले — होलिका दहन (21 मार्च)
- 21 मार्च की रात शुभ मुहूर्त में होलिका पूजन और दहन करें। पूरी विधि होलिका दहन के पेज पर दी गई है।
- होलिका की थोड़ी राख अगली सुबह के लिए ठंडी होने पर घर ले आएं।
चरण 2: होली की सुबह — स्नान और भस्म तिलक (22 मार्च)
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- होलिका की राख (भस्म) का माथे पर तिलक लगाएं। मान्यता है कि इससे पूरे वर्ष रोग और नकारात्मकता दूर रहती है।
- साफ़ वस्त्र पहनकर पूजा स्थान पर दीपक जलाएं।
चरण 3: भगवान को गुलाल अर्पित करें
- सबसे पहले श्री गणेश को गुलाल और फूल अर्पित करें — ॐ गं गणपतये नमः
- फिर राधा-कृष्ण (या लड्डू गोपाल) को गुलाल अर्पित करें, फूलों की पंखुड़ियां बरसाएं और झूला झुलाएं।
- भगवान विष्णु / नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए प्रह्लाद जी की रक्षा के लिए धन्यवाद दें।
- मंत्र जाप — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या श्री राधा कृष्णाय नमः (11 या 108 बार)।
- गुजिया, मालपुआ, ठंडाई और फलों का भोग लगाएं (श्रीकृष्ण के भोग में तुलसी दल अवश्य रखें)।
- आरती करें — "आरती कुंजबिहारी की" या "ॐ जय जगदीश हरे"।
चरण 4: बड़ों का आशीर्वाद और पितरों का स्मरण
- घर के बड़ों के पैरों पर गुलाल लगाकर उनका आशीर्वाद लें।
- छोटों के माथे पर गुलाल का टीका लगाकर उन्हें आशीर्वाद दें।
- कई परिवारों में इस दिन पितरों के नाम पर भी थोड़ा गुलाल और भोग अर्पित करने की परंपरा है।
चरण 5: रंगों का उत्सव
- रंग खेलने से पहले त्वचा और बालों पर नारियल या सरसों का तेल लगा लें।
- प्राकृतिक या हर्बल रंगों से ही होली खेलें।
- दोपहर तक रंग खेलना पूरा करें, फिर स्नान करके नए या साफ़ कपड़े पहनें।
चरण 6: शाम को मिलन
- शाम को रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के घर जाकर गुलाल का टीका लगाएं, गले मिलें और मिठाई खिलाएं।
- पुराने मनमुटाव भुलाकर रिश्तों में मिठास घोलें — यही होली का असली संदेश है।
घर पर प्राकृतिक रंग कैसे बनाएं
- पीला गुलाल: 2 चम्मच बेसन में 1 चम्मच हल्दी अच्छी तरह मिलाएं। गेंदे की सूखी पंखुड़ियों का पाउडर मिलाने से रंग और चमकदार होगा।
- टेसू का केसरिया रंग: मुट्ठी भर सूखे टेसू (पलाश) के फूल 2 लीटर पानी में रात भर भिगोएं या 15-20 मिनट उबालें, ठंडा करके छान लें। यह ब्रज की पारंपरिक होली का रंग है।
- गुलाबी रंग: 1 चुकंदर कद्दूकस करके 1 लीटर पानी में उबालें और छान लें। सूखे रंग के लिए इसका रस अरारोट में मिलाकर धूप में सुखा लें।
- हरा गुलाल: मेहंदी पाउडर को बराबर मात्रा में आटे के साथ मिलाएं (सूखा ही प्रयोग करें — गीली मेहंदी त्वचा पर रंग छोड़ देती है)।
- लाल गुलाल: सूखे गुड़हल या लाल गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर आटे या अरारोट के साथ मिलाएं।
व्रत के नियम
✅ होली पर क्या करें
- सुबह सबसे पहले भगवान को गुलाल अर्पित करें, फिर बड़ों का आशीर्वाद लें।
- प्राकृतिक या हर्बल रंगों से ही होली खेलें।
- रंग खेलने से पहले शरीर और बालों पर तेल, चेहरे पर सनस्क्रीन और होंठों पर लिप बाम लगाएं।
- पूरी बाजू के सूती कपड़े पहनें और आँखों के लिए धूप का चश्मा लगाएं।
- खूब पानी पिएं — धूप और भाग-दौड़ में शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
- जो व्यक्ति रंग न लगवाना चाहे, उसकी इच्छा का सम्मान करें।
- पानी बचाएं — सूखी होली (गुलाल) खेलना बेहतर है।
- बच्चों पर नज़र रखें और उन्हें सड़क पर अकेले न खेलने दें।
❌ होली पर क्या न करें
- केमिकल वाले पक्के रंग, पेंट, ग्रीस, सिल्वर-गोल्डन पेंट, कीचड़ या अंडे का प्रयोग न करें — इनसे त्वचा, आँखों और बालों को गंभीर नुकसान होता है।
- किसी की आँख, कान या मुंह में रंग न डालें। आँख में रंग जाए तो साफ़ ठंडे पानी से धोएं और ज़रूरत हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
- पानी के गुब्बारे किसी पर दूर से न फेंकें — इनसे चोट लग सकती है।
- पशु-पक्षियों पर रंग न डालें — रंग उनके लिए ज़हरीला हो सकता है।
- किसी पर ज़बरदस्ती रंग न डालें — महिलाओं, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों की इच्छा का विशेष ध्यान रखें।
- भांग या शराब पीकर वाहन न चलाएं। भांग का अधिक सेवन बेचैनी, घबराहट और तबीयत बिगड़ने का कारण बन सकता है।
- रंग छुड़ाने के लिए केरोसीन, स्पिरिट या कपड़े धोने का साबुन प्रयोग न करें — बेसन-दही या माइल्ड साबुन लें।
- अस्थमा या त्वचा की एलर्जी वाले लोग सूखे पाउडर रंगों से दूर रहें।
- होली के दिन किसी से झगड़ा या अपशब्द न कहें — यह मेल-मिलाप का पर्व है।
होली — व्रत कथा
होली — आरती
होली — चालीसा
Hinglish
Holi 2027 kab hai? Rangwali Holi (Dhulandi) Somvar, 22 March 2027 ko hai. Holika Dahan ek din pehle Ravivar, 21 March ki raat hoga.
Holi kyu manate hain? Bhakt Prahlad ke bachne aur Holika ke ant ki khushi mein, aur Radha-Krishna ke prem ki yaad mein. Ye vasant aur nayi fasal ka utsav bhi hai.
Subah ki puja: Snaan karke Holika ki raakh ka tilak lagayein. Ganesh ji aur Radha-Krishna ko gulaal aur phool arpit karein, gujiya-thandai ka bhog lagayein aur aarti karein. Phir badon ke pairon par gulaal lagakar aashirwad lein.
Natural rang: Peela — haldi + besan; kesariya — tesu ke phool bhigokar; gulabi — chukandar ka ras; hara — mehendi + aata.
Dhyan rakhein: Chemical rang, paint aur greese na lagayein. Aankh-munh mein rang na daalein, janwaron par rang na daalein, aur bhang pee kar gaadi na chalayein.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
होली 2027 कब है?
रंगवाली होली (धुलेंडी) 2027 में सोमवार, 22 मार्च को है।
होलिका दहन 2027 कब है?
होलिका दहन होली से एक दिन पहले, रविवार 21 मार्च 2027 की रात फाल्गुन पूर्णिमा पर है।
होली किस तिथि को मनाई जाती है?
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात होता है और रंगवाली होली अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को खेली जाती है।
होली क्यों मनाई जाती है?
होली भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के अंत की खुशी में, राधा-कृष्ण के प्रेम की याद में और वसंत ऋतु तथा नई फसल के स्वागत में मनाई जाती है।
होली की सुबह क्या करना चाहिए?
स्नान करके होलिका की राख का तिलक लगाएं, भगवान को गुलाल अर्पित करें, भोग लगाकर आरती करें और फिर बड़ों के पैरों पर गुलाल लगाकर आशीर्वाद लें।
होलाष्टक 2027 कब से है?
होलाष्टक 16 मार्च 2027 (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी) से शुरू होकर होलिका दहन के साथ समाप्त होगा।
लट्ठमार होली कब और कहां होती है?
लट्ठमार होली बरसाना और नंदगांव में होली से लगभग एक सप्ताह पहले फाल्गुन शुक्ल नवमी और दशमी को होती है। सटीक तारीख मंदिर प्रशासन घोषित करता है।
घर पर प्राकृतिक रंग कैसे बनाएं?
पीले के लिए हल्दी और बेसन, केसरिया के लिए टेसू के फूल भिगोकर, गुलाबी के लिए चुकंदर का रस और हरे के लिए मेहंदी पाउडर में आटा मिलाकर रंग बनाए जा सकते हैं।
होली का रंग कैसे छुड़ाएं?
पहले सूखा रंग झाड़ लें, फिर बेसन और दही का लेप लगाकर गुनगुने पानी और माइल्ड साबुन से धोएं। केरोसीन या कपड़े धोने का साबुन न लगाएं।
रंग पंचमी कब मनाई जाती है?
रंग पंचमी होली के पांचवें दिन चैत्र कृष्ण पंचमी को मनाई जाती है। यह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
होली का प्रमुख पकवान क्या है?
गुजिया होली की सबसे प्रसिद्ध मिठाई है। साथ में ठंडाई, दही भल्ले, मालपुआ, कांजी वड़ा और पूरनपोली भी बनाए जाते हैं।