परिचय
अन्नपूर्णा माता आरती | Annapurna Aarti
॥ आरती — अन्नपूर्णा माता ॥
जय अन्नपूर्णा माता, जग के दाता सुखदाई।
भोजन का जो रूप धरे, करुणा की मूरत आई॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥
कमलासन सजी तेरी, मुकुट मणि शोभित भारी।
दीन-दुखियों के कूल बनो, भवसागर के तरनकारी॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥
अन्न भंडार तेरे चरण, दान कर तुम अनमोल।
भूखे को जो तेरा नाम ले, पावे भोजन, पावे शोल।॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥
करुणा की जो फुँकार तुझसे अनुग्रह बरसाए।
घर-घर में जो तेरा भजन हो, सुख-समृद्धि आए॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥
तेरे आशीष से पेट भरे, भूखों का उद्धार हो।
तेरे प्रसाद से जीवन बने, संकट हर दुख विकार हो॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥
अन्नपूर्णा की आरती से, कल्याण हो जग सारा।
जो तेरा चरण स्मरण करे, पावें भक्तों को किनारा॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥
भोजन दान का संदेशा, तूने दिया जग को प्यारा।
श्रद्धा से जो आरती गावे, उसे मिलें अनंत सहारा॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥
जय अन्नपूर्णा माता, करुणा त्रिपुर सुजाई।
हमें सर्वदा अपने चरणों में, रखो सदा आशीर्वाई॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥