होम / Aarti / अन्नपूर्णा माता आरती | Annapurna Aarti

अन्नपूर्णा माता आरती | Annapurna Aarti

Aarti Goddesses Aarti Shakti Peeth ( शक्ति‑पीठ )
📖

परिचय

अन्नपूर्णा माता का प्रसिद्ध मंदिर वाराणसी (काशी) में स्थित है और माता को अन्न और पोषण की देवी के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय कथा के अनुसार यह मंदिर माता पार्वती के दातृत्व‑स्वरूप का प्रतीक है जो संसार को अन्न और खाद्य‑संपन्नता प्रदान करती हैं। कुछ परंपराओं में अन्नपूर्णा स्थान को शक्तिपीठों या प्रमुख शक्ति‑स्थलों के निकट माना जाता है और काशी के धार्मिक जीवन में इसका विशेष स्थान है — यहाँ भक्त भोजन की उपलब्धि, गृहस्थ सुख और भोग‑विरुद्ध आध्यात्मिक संतुलन की कामना लेकर आते हैं। मंदिर की परंपरा में भक्षण‑वितरण, प्रसाद और दान का बड़ा महत्व है; आरती के समय दीप, पुष्प और प्रसाद को विशेष श्रद्धा से अर्पित किया जाता है और भक्त माता से जीवन में समृद्धि व आश्रय की प्रार्थना करते हैं।

अन्नपूर्णा माता आरती | Annapurna Aarti

PDF

॥ आरती — अन्नपूर्णा माता ॥

जय अन्नपूर्णा माता, जग के दाता सुखदाई।
भोजन का जो रूप धरे, करुणा की मूरत आई॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥

कमलासन सजी तेरी, मुकुट मणि शोभित भारी।
दीन-दुखियों के कूल बनो, भवसागर के तरनकारी॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥

अन्न भंडार तेरे चरण, दान कर तुम अनमोल।
भूखे को जो तेरा नाम ले, पावे भोजन, पावे शोल।॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥

करुणा की जो फुँकार तुझसे अनुग्रह बरसाए।
घर-घर में जो तेरा भजन हो, सुख-समृद्धि आए॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥

तेरे आशीष से पेट भरे, भूखों का उद्धार हो।
तेरे प्रसाद से जीवन बने, संकट हर दुख विकार हो॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥

अन्नपूर्णा की आरती से, कल्याण हो जग सारा।
जो तेरा चरण स्मरण करे, पावें भक्तों को किनारा॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥

भोजन दान का संदेशा, तूने दिया जग को प्यारा।
श्रद्धा से जो आरती गावे, उसे मिलें अनंत सहारा॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥

जय अन्नपूर्णा माता, करुणा त्रिपुर सुजाई।
हमें सर्वदा अपने चरणों में, रखो सदा आशीर्वाई॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥