परिचय
Tara Tarini Temple is situated on Kumari Hill in Ganjam district of Odisha. It holds the third place among the 4 Adi Shaktipeeths where Goddess Sati's both breasts fell. Two sister goddesses Tara and Tarini are worshipped together here and it is the biggest center of faith in South Odisha.
तारा तारिणी - आदि शक्तिपीठ गंजाम ओडिशा | ऋषिकुल्या नदी की अधिष्ठात्री देवी
तारा तारिणी - दो बहन देवियों का दिव्य शक्तिपीठ
तारा तारिणी मंदिर ओडिशा राज्य के गंजाम जिले में ब्रह्मपुर शहर से 30 किमी दूर कुमारी पहाड़ी पर स्थित है। यह 52 शक्तिपीठों में से एक और 4 आदि शक्तिपीठों में तृतीय स्थान रखता है। यहाँ माँ सती के दोनों स्तन गिरे थे इसीलिए यहाँ दो देवियाँ तारा और तारिणी एक साथ पूजी जाती हैं।
तारा तारिणी ओडिशा की सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली देवियाँ मानी जाती हैं। इन्हें जगत की माता और सृष्टि की पालनहार कहा जाता है। नाविक समुदाय इन्हें अपनी कुलदेवी मानता है और समुद्री यात्रा से पहले यहाँ पूजा करता है।
तारा तारिणी मंदिर का इतिहास
तारा तारिणी मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। गंग वंश और गजपति राजाओं ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। मंदिर की वास्तुकला में ओडिशा की कलिंग शैली का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है।
तारा तारिणी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. तारा तारिणी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ तारा और माँ तारिणी की दो प्रतिमाएँ एक साथ विराजमान हैं। दोनों देवियाँ सोने के आभूषणों और रंगीन वस्त्रों से सुसज्जित हैं। यहाँ माँ को नारियल, फूल और सिंदूर चढ़ाया जाता है।
2. तारा तारिणी पहाड़ी
जिस पहाड़ी पर मंदिर स्थित है उसे कुमारी पहाड़ी कहते हैं। यहाँ से ऋषिकुल्या नदी और आसपास के क्षेत्र का अत्यंत सुंदर दृश्य दिखता है। पहाड़ी की प्राकृतिक सुंदरता मन को मोह लेती है।
3. ऋषिकुल्या नदी
मंदिर के नीचे ऋषिकुल्या नदी बहती है जिसमें स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। नदी के तट पर बने घाटों पर श्रद्धालु स्नान करके माँ के दर्शन करते हैं।
4. भैरव मंदिर
तारा तारिणी शक्तिपीठ के भैरव त्रिपुरांतक हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ पूजा अनिवार्य मानी जाती है।
5. रोपवे
तारा तारिणी पहाड़ी तक पहुँचने के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है जो यात्रा को सुखद और आसान बनाती है। पहाड़ी की चढ़ाई के लिए सीढ़ियाँ भी बनी हैं।
तारा तारिणी मेला
प्रतिवर्ष चैत्र माह में तारा तारिणी मेला लगता है जो ओडिशा का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस समय लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि के समय भी यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
तारा तारिणी कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो ब्रह्मपुर से 170 किमी दूर है।
रेलमार्ग: ब्रह्मपुर रेलवे स्टेशन मंदिर से 30 किमी दूर है और देशभर से जुड़ा हुआ है।
सड़कमार्ग: ब्रह्मपुर से 30 किमी, भुवनेश्वर से 170 किमी, पुरी से 220 किमी।
तारा तारिणी दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। चैत्र मेला, नवरात्रि और मकर संक्रांति के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। सुबह जल्दी दर्शन करने से भीड़ कम मिलती है और माँ का अद्भुत श्रृंगार देखने को मिलता है।
तारा तारिणी का धार्मिक महत्व
तारा तारिणी को ओडिशा की कुलदेवी माना जाता है। यह एकमात्र शक्तिपीठ है जहाँ दो देवियाँ एक साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि माँ तारा और माँ तारिणी के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। समुद्री यात्री और नाविक आज भी यात्रा से पहले यहाँ आकर माँ से सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।