परिचय
Khatu Shyam Ji is famous temple of Rajasthan. In Khatu village, Sikar district. Dedicated to Barbarik (Bhima's grandson). Donated head in Mahabharata. Krishna gave boon - worship in Khatu in Kaliyuga. Only head worshipped. Falgun Mela famous. Lakhs visit. Khatu Naresh. Flag offering tradition. Jai Shyam Baba.
खाटू श्याम जी मंदिर | बर्बरीक का शीश दान और स्थापना कथा
**खाटू श्याम जी का परिचय:**
खाटू श्याम जी का मंदिर **बर्बरीक** (भीम के पोते) को समर्पित है। उन्हें **श्याम बाबा** या **खाटू नरेश** कहते हैं।
**स्थान:**
- **राज्य:** राजस्थान
- **जिला:** सीकर
- **गांव:** खाटू (रीणगस)
- **जयपुर से:** 80 किमी
- **दिल्ली से:** 250 किमी
**बर्बरीक की कथा:**
**बर्बरीक कौन थे:**
**बर्बरीक** महाभारत के महान योद्धा थे:
- **पिता:** घटोत्कच (भीम का पुत्र)
- **माता:** मौरवी (नागकन्या)
- **दादा:** भीम (पांडव)
- **परदादा:** पांडु
**बर्बरीक की शक्ति:**
बर्बरीक के पास **तीन दिव्य बाण** थे। ये बाण अचूक थे:
- **पहला बाण:** शत्रुओं को चिह्नित करता
- **दूसरा बाण:** मित्रों को चिह्नित करता
- **तीसरा बाण:** सभी चिह्नित शत्रुओं को मार देता
बर्बरीक **एक ही बाण** से पूरी सेना को मार सकते थे।
**महाभारत युद्ध:**
जब महाभारत युद्ध होने वाला था, बर्बरीक युद्ध देखने आए।
**कृष्ण का प्रश्न:**
भगवान **कृष्ण** (ब्राह्मण वेश में) ने बर्बरीक से पूछा:
"तुम किसकी ओर से लड़ोगे?"
बर्बरीक ने कहा:
"मैं **हारने वाले पक्ष** की तरफ से लड़ूंगा।"
**कृष्ण की चिंता:**
कृष्ण समझ गए कि बर्बरीक की शक्ति अत्यधिक है। यदि वह युद्ध में शामिल हुआ:
- पहले पांडव हार रहे होंगे → बर्बरीक उनकी तरफ से लड़ेगा
- फिर कौरव हार रहे होंगे → बर्बरीक उनकी तरफ से लड़ेगा
- यह क्रम चलता रहेगा
- युद्ध कभी खत्म नहीं होगा
**शीश का दान:**
कृष्ण ने कहा:
"हे वीर! युद्ध में सबसे बड़ा दान **शीश (सिर) का दान** है। क्या तुम यह दान दे सकते हो?"
बर्बरीक तुरंत तैयार हो गए। उन्होंने अपनी **तलवार** से अपना **शीश काट** दिया और कृष्ण को अर्पित कर दिया।
**कृष्ण का वरदान:**
कृष्ण अपने असली रूप में आए। उन्होंने बर्बरीक से कहा:
"हे वीर! तुम्हारा बलिदान अद्वितीय है। मैं तुम्हें वरदान देता हूं:
१. तुम्हारा **शीश** युद्ध देखता रहेगा
२. **कलियुग** में तुम्हारा शीश **खाटू** में स्थापित होगा
३. तुम **श्याम** नाम से पूजे जाओगे
४. तुम्हारी पूजा **मुझसे पहले** होगी"
**शीश का स्थापित होना:**
महाभारत युद्ध के बाद बर्बरीक का शीश **रूपवती नदी** में बह गया।
**कलियुग में खोज:**
कलियुग में एक गाय **खाटू** गांव में रोज एक स्थान पर जाती और अपना दूध वहीं गिरा देती।
ग्रामीणों ने खुदाई की तो **बर्बरीक का शीश** मिला। शीश से **दिव्य प्रकाश** निकल रहा था।
**रोपण साधु:**
एक साधु को स्वप्न आया कि यह **बर्बरीक का शीश** है। इसे यहीं स्थापित करो।
**संवत 1027 (970 ई.)** में शीश को खाटू में स्थापित किया गया।
**मंदिर की विशेषताएं:**
**1. केवल शीश की पूजा:**
खाटू श्याम जी में केवल **शीश (सिर)** की पूजा होती है। पूरी मूर्ति नहीं है।
**2. श्याम नाम:**
बर्बरीक को **श्याम** नाम से पुकारा जाता है क्योंकि:
- वे कृष्ण के भक्त थे
- कृष्ण ने यही नाम दिया था
**3. खाटू नरेश:**
भक्त श्याम बाबा को **खाटू नरेश** (खाटू के राजा) कहते हैं।
**4. झंडा परंपरा:**
मन्नत पूरी होने पर भक्त **झंडा** चढ़ाते हैं।
**फाल्गुन मेला:**
**फाल्गुन** (फरवरी-मार्च) में विशाल मेला लगता है:
- **12 दिनों** का मेला
- **लाखों** श्रद्धालु
- **शक्कर पारे** (प्रसाद) बांटे जाते हैं
**आरती समय:**
- प्रातः आरती: 5:30 AM
- संध्या आरती: 7:00 PM
**विशेष दिन:**
- **फाल्गुन शुक्ल एकादशी** - मुख्य दिन
- **फाल्गुन मेला** (12 दिन)
**खाटू कैसे पहुंचें:**
**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **जयपुर** (80 किमी)
**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **रींगस** (17 किमी)
**सड़क मार्ग:**
- जयपुर से: 80 किमी
- दिल्ली से: 250 किमी
- अच्छी सड़क, बस/टैक्सी
**ठहरने की व्यवस्था:**
- धर्मशालाएं
- होटल
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- बर्बरीक (भीम के पोते) का मंदिर
- महाभारत में शीश दान
- कृष्ण ने वरदान दिया
- केवल शीश की पूजा
- 970 ई. में स्थापना
- खाटू नरेश/श्याम बाबा
- फाल्गुन मेला प्रसिद्ध
- झंडा चढ़ाने की परंपरा
🙏 श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम 🙏
🙏 जय खाटू नरेश 🙏