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खाटू श्याम जी - बर्बरीक महाबली का शीश मंदिर

खाटू श्याम जी राजस्थान का प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर है। यह सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है। मंदिर बर्बरीक (भीम के पोते) को समर्पित है जिन्हें श्याम बाबा कहते हैं। महाभारत में बर्बरीक ने अपना शीश कृष्ण को दान कर दिया था। कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में बर्बरीक का शीश खाटू में स्थापित होगा और वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे। मंदिर में केवल शीश (सिर) की पूजा होती है। फाल्गुन मेला अत्यंत प्रसिद्ध है। लाखों श्रद्धालु आते हैं। श्याम बाबा को खाटू नरेश कहते हैं। भक्त झंडा चढ़ाते हैं।

प्रसिद्ध मंदिर
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परिचय

खाटू श्याम जी राजस्थान का प्रसिद्ध मंदिर। सीकर जिले के खाटू गांव में। बर्बरीक (भीम के पोते) को समर्पित। महाभारत में शीश दान किया। कृष्ण ने वरदान दिया - कलियुग में खाटू में पूजा। केवल शीश की पूजा। फाल्गुन मेला प्रसिद्ध। लाखों श्रद्धालु। खाटू नरेश। झंडा चढ़ाने की परंपरा। श्याम बाबा की जय।

Khatu Shyam Ji is famous temple of Rajasthan. In Khatu village, Sikar district. Dedicated to Barbarik (Bhima's grandson). Donated head in Mahabharata. Krishna gave boon - worship in Khatu in Kaliyuga. Only head worshipped. Falgun Mela famous. Lakhs visit. Khatu Naresh. Flag offering tradition. Jai Shyam Baba.

खाटू श्याम जी मंदिर | बर्बरीक का शीश दान और स्थापना कथा

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🙏 खाटू श्याम जी मंदिर 🙏

**खाटू श्याम जी का परिचय:**

खाटू श्याम जी का मंदिर **बर्बरीक** (भीम के पोते) को समर्पित है। उन्हें **श्याम बाबा** या **खाटू नरेश** कहते हैं।

**स्थान:**
- **राज्य:** राजस्थान
- **जिला:** सीकर
- **गांव:** खाटू (रीणगस)
- **जयपुर से:** 80 किमी
- **दिल्ली से:** 250 किमी

**बर्बरीक की कथा:**

**बर्बरीक कौन थे:**

**बर्बरीक** महाभारत के महान योद्धा थे:
- **पिता:** घटोत्कच (भीम का पुत्र)
- **माता:** मौरवी (नागकन्या)
- **दादा:** भीम (पांडव)
- **परदादा:** पांडु

**बर्बरीक की शक्ति:**

बर्बरीक के पास **तीन दिव्य बाण** थे। ये बाण अचूक थे:
- **पहला बाण:** शत्रुओं को चिह्नित करता
- **दूसरा बाण:** मित्रों को चिह्नित करता
- **तीसरा बाण:** सभी चिह्नित शत्रुओं को मार देता

बर्बरीक **एक ही बाण** से पूरी सेना को मार सकते थे।

**महाभारत युद्ध:**

जब महाभारत युद्ध होने वाला था, बर्बरीक युद्ध देखने आए।

**कृष्ण का प्रश्न:**

भगवान **कृष्ण** (ब्राह्मण वेश में) ने बर्बरीक से पूछा:

"तुम किसकी ओर से लड़ोगे?"

बर्बरीक ने कहा:

"मैं **हारने वाले पक्ष** की तरफ से लड़ूंगा।"

**कृष्ण की चिंता:**

कृष्ण समझ गए कि बर्बरीक की शक्ति अत्यधिक है। यदि वह युद्ध में शामिल हुआ:
- पहले पांडव हार रहे होंगे → बर्बरीक उनकी तरफ से लड़ेगा
- फिर कौरव हार रहे होंगे → बर्बरीक उनकी तरफ से लड़ेगा
- यह क्रम चलता रहेगा
- युद्ध कभी खत्म नहीं होगा

**शीश का दान:**

कृष्ण ने कहा:

"हे वीर! युद्ध में सबसे बड़ा दान **शीश (सिर) का दान** है। क्या तुम यह दान दे सकते हो?"

बर्बरीक तुरंत तैयार हो गए। उन्होंने अपनी **तलवार** से अपना **शीश काट** दिया और कृष्ण को अर्पित कर दिया।

**कृष्ण का वरदान:**

कृष्ण अपने असली रूप में आए। उन्होंने बर्बरीक से कहा:

"हे वीर! तुम्हारा बलिदान अद्वितीय है। मैं तुम्हें वरदान देता हूं:

१. तुम्हारा **शीश** युद्ध देखता रहेगा
२. **कलियुग** में तुम्हारा शीश **खाटू** में स्थापित होगा
३. तुम **श्याम** नाम से पूजे जाओगे
४. तुम्हारी पूजा **मुझसे पहले** होगी"

**शीश का स्थापित होना:**

महाभारत युद्ध के बाद बर्बरीक का शीश **रूपवती नदी** में बह गया।

**कलियुग में खोज:**

कलियुग में एक गाय **खाटू** गांव में रोज एक स्थान पर जाती और अपना दूध वहीं गिरा देती।

ग्रामीणों ने खुदाई की तो **बर्बरीक का शीश** मिला। शीश से **दिव्य प्रकाश** निकल रहा था।

**रोपण साधु:**

एक साधु को स्वप्न आया कि यह **बर्बरीक का शीश** है। इसे यहीं स्थापित करो।

**संवत 1027 (970 ई.)** में शीश को खाटू में स्थापित किया गया।

**मंदिर की विशेषताएं:**

**1. केवल शीश की पूजा:**

खाटू श्याम जी में केवल **शीश (सिर)** की पूजा होती है। पूरी मूर्ति नहीं है।

**2. श्याम नाम:**

बर्बरीक को **श्याम** नाम से पुकारा जाता है क्योंकि:
- वे कृष्ण के भक्त थे
- कृष्ण ने यही नाम दिया था

**3. खाटू नरेश:**

भक्त श्याम बाबा को **खाटू नरेश** (खाटू के राजा) कहते हैं।

**4. झंडा परंपरा:**

मन्नत पूरी होने पर भक्त **झंडा** चढ़ाते हैं।

**फाल्गुन मेला:**

**फाल्गुन** (फरवरी-मार्च) में विशाल मेला लगता है:
- **12 दिनों** का मेला
- **लाखों** श्रद्धालु
- **शक्कर पारे** (प्रसाद) बांटे जाते हैं

**आरती समय:**

- प्रातः आरती: 5:30 AM
- संध्या आरती: 7:00 PM

**विशेष दिन:**

- **फाल्गुन शुक्ल एकादशी** - मुख्य दिन
- **फाल्गुन मेला** (12 दिन)

**खाटू कैसे पहुंचें:**

**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **जयपुर** (80 किमी)

**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **रींगस** (17 किमी)

**सड़क मार्ग:**
- जयपुर से: 80 किमी
- दिल्ली से: 250 किमी
- अच्छी सड़क, बस/टैक्सी

**ठहरने की व्यवस्था:**
- धर्मशालाएं
- होटल

**महत्वपूर्ण तथ्य:**

- बर्बरीक (भीम के पोते) का मंदिर
- महाभारत में शीश दान
- कृष्ण ने वरदान दिया
- केवल शीश की पूजा
- 970 ई. में स्थापना
- खाटू नरेश/श्याम बाबा
- फाल्गुन मेला प्रसिद्ध
- झंडा चढ़ाने की परंपरा

🙏 श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम 🙏
🙏 जय खाटू नरेश 🙏