परिचय
Kalmadhav Shaktipeeth is situated on the banks of Shon river near Amarkantak in Shahdol district of Madhya Pradesh. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's right hip fell. Maa Kali is enshrined here and Bhairav is worshipped as Asitanga.
कालमाधव शक्तिपीठ - मध्य प्रदेश | माँ सती के दाहिने कूल्हे का पवित्र शक्तिपीठ
कालमाधव शक्तिपीठ - शोण नदी की दिव्य शक्तिपीठ
कालमाधव शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अमरकंटक के समीप शोण नदी के तट पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का दाहिना कूल्हा गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
कालमाधव का अर्थ है काल के माधव अर्थात भगवान विष्णु और माँ काली का संयुक्त स्थान। माँ काली रूप में यहाँ विराजमान हैं। अमरकंटक के समीप होने से यह शक्तिपीठ नर्मदा और शोण दोनों नदियों के उद्गम क्षेत्र में स्थित है जो इसे अत्यंत विशेष बनाता है।
कालमाधव शक्तिपीठ का इतिहास
कालमाधव शक्तिपीठ का उल्लेख प्राचीन तंत्र ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है। अमरकंटक क्षेत्र को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है और यहाँ कालमाधव शक्तिपीठ की उपस्थिति इस क्षेत्र को और भी पवित्र बनाती है।
कालमाधव शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. माँ काली गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ काली की अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली प्रतिमा विराजमान है। माँ का स्वरूप उग्र और दिव्य है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. शोण नदी उद्गम
कालमाधव शक्तिपीठ के समीप शोण नदी का उद्गम स्थल है। शोण नदी को सोन नदी भी कहते हैं जो गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। यहाँ स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
3. नर्मदा उद्गम कुंड
अमरकंटक में नर्मदा नदी का पवित्र उद्गम कुंड भी स्थित है जो इस क्षेत्र को अत्यंत पवित्र बनाता है।
4. भैरव मंदिर
कालमाधव शक्तिपीठ के भैरव असितांग रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
5. कपिलधारा जलप्रपात
अमरकंटक के समीप कपिलधारा जलप्रपात स्थित है जहाँ नर्मदा नदी पहली बार एक भव्य झरने के रूप में गिरती है। यह दृश्य अत्यंत मनोरम और दिव्य होता है।
6. माई की बगिया
अमरकंटक में माई की बगिया नामक प्राचीन वन है जहाँ दुर्लभ औषधीय पौधे पाए जाते हैं।
कालमाधव शक्तिपीठ की पूजा विधि
माँ काली की पूजा में लाल और काले फूल काले तिल सिंदूर और नारियल का विशेष महत्व है। महाकाली स्तोत्र दुर्गा सप्तशती और काली कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि अमावस्या और नर्मदा जयंती के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
कालमाधव शक्तिपीठ कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: जबलपुर हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो अमरकंटक से 220 किमी दूर है।
रेलमार्ग: पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो अमरकंटक से 17 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: जबलपुर से 220 किमी बिलासपुर से 175 किमी शहडोल से 90 किमी।
कालमाधव शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि नर्मदा जयंती और मकर संक्रांति के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। अमरकंटक यात्रा के दौरान कालमाधव शक्तिपीठ और माधवेश्वरी शक्तिपीठ दोनों के दर्शन अवश्य करें।
कालमाधव शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
कालमाधव शक्तिपीठ अमरकंटक के तीर्थ क्षेत्र में स्थित है जो तीर्थों का तीर्थ कहलाता है। नर्मदा और शोण दोनों नदियों के उद्गम क्षेत्र में माँ काली की उपस्थिति इस स्थान को अत्यंत शक्तिशाली बनाती है। माँ काली की कृपा से भक्तों के सभी भय और कष्ट दूर होते हैं। यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।