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रामगिरि शक्तिपीठ चित्रकूट - माँ शिवानी की दिव्य पवित्र शक्तिपीठ

रामगिरि शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पावन तट पर विराजमान 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का दाहिना स्तन गिरा था। माँ शिवानी रूप में यहाँ विराजमान हैं। भगवान राम की वनवास भूमि चित्रकूट में माँ के दर्शन और मंदाकिनी स्नान से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

51 शक्तिपीठ
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परिचय

रामगिरि शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ सती का दाहिना स्तन गिरा था। माँ शिवानी रूप में यहाँ विराजमान हैं। भगवान राम की वनवास भूमि चित्रकूट में यह शक्तिपीठ अत्यंत पवित्र और दिव्य है।

Ramgiri Shaktipeeth is situated on the banks of Mandakini river in Chitrakoot, Uttar Pradesh. It is one of the 51 Shaktipeeths where Goddess Sati's right breast fell. Maa Shivani is enshrined here. This Shaktipeeth situated in Chitrakoot the exile land of Lord Ram is extremely sacred and divine.

रामगिरि शक्तिपीठ - उत्तर प्रदेश | माँ सती के दाहिने स्तन का पवित्र शक्तिपीठ

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रामगिरि शक्तिपीठ - चित्रकूट की दिव्य शक्तिपीठ

रामगिरि शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का दाहिना स्तन गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

माँ शिवानी रूप में यहाँ विराजमान हैं। शिवानी का अर्थ है भगवान शिव की प्रिय अर्थात माँ पार्वती। चित्रकूट वह पावन भूमि है जहाँ भगवान राम ने अपने वनवास का प्रमुख समय बिताया था। इस पावन भूमि में माँ शिवानी शक्तिपीठ की उपस्थिति चित्रकूट को और भी विशेष बनाती है।

रामगिरि शक्तिपीठ का इतिहास

रामगिरि शक्तिपीठ का उल्लेख प्राचीन तंत्र ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। चित्रकूट का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। यहाँ भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के समय निवास किया था। इस पावन भूमि में माँ शिवानी शक्तिपीठ की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।

रामगिरि शक्तिपीठ के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. माँ शिवानी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ शिवानी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का श्रृंगार लाल वस्त्र और सोने के आभूषणों से होता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।

2. कामदगिरि पर्वत
चित्रकूट में कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा अत्यंत पुण्यकारी मानी जाती है। इस पर्वत की 5 किमी की परिक्रमा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। रामगिरि पर्वत भी यहीं स्थित है।

3. मंदाकिनी नदी
मंदाकिनी नदी के घाटों पर स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। रामघाट पर प्रतिदिन शाम को मंदाकिनी आरती होती है जो अत्यंत दिव्य होती है।

4. भैरव मंदिर
रामगिरि शक्तिपीठ के भैरव चंड रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।

5. राम दर्शन
चित्रकूट में अनेक स्थल भगवान राम से जुड़े हैं जैसे रामघाट जानकी कुंड भरत मिलाप स्थल गुप्त गोदावरी और हनुमान धारा।

6. स्फटिक शिला
मंदाकिनी नदी के तट पर स्फटिक शिला स्थित है जहाँ भगवान राम और माता सीता बैठते थे।

रामगिरि शक्तिपीठ की पूजा विधि

माँ शिवानी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। दुर्गा सप्तशती शिवानी स्तोत्र और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि रामनवमी और अष्टमी के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।

रामगिरि शक्तिपीठ कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: प्रयागराज हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो चित्रकूट से 120 किमी दूर है।
रेलमार्ग: चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन मंदिर से 8 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: प्रयागराज से 120 किमी बाँदा से 80 किमी दिल्ली से 650 किमी।

रामगिरि शक्तिपीठ दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि रामनवमी और दीपावली के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। रामनवमी पर चित्रकूट में लाखों भक्त भगवान राम और माँ शिवानी के दर्शन के लिए आते हैं।

रामगिरि शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व

रामगिरि शक्तिपीठ भगवान राम की वनवास भूमि चित्रकूट में स्थित है। यहाँ माँ शिवानी के दर्शन और मंदाकिनी स्नान से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है। कामदगिरि परिक्रमा और रामगिरि शक्तिपीठ दर्शन एक साथ करने से दोगुना पुण्य मिलता है। माँ की कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।