परिचय
Bhimashankar Jyotirlinga is located on the Sahyadri mountain range in Pune district of Maharashtra. It is the sixth Jyotirlinga of Lord Shiva. This is the origin of Bhima river which later merges with Krishna river. According to mythology, Bhima, the son of Kumbhakarna, a demon, performed penance and gained powers and started troubling the gods. On the prayer of the gods, Lord Shiva appeared as Bhimashankar, killed the demon Bhima and established himself as Jyotirlinga here. The temple is built in Nagar architectural style and is located amidst dense forests.
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र | भीमा नदी उद्गम और कथा
**भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का परिचय:**
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में छठा ज्योतिर्लिंग है। यह महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला पर स्थित है।
"भीमाशंकर" का अर्थ है "भीम रूप में प्रकट होने वाले शंकर" - जहां भीम का अर्थ है विशाल, भयंकर या प्रचंड और शंकर का अर्थ है भगवान शिव।
**विशेष महत्व:**
- **भीमा नदी का उद्गम स्थल** - यहीं से भीमा नदी निकलती है
- **सह्याद्रि की गोद में** - पश्चिमी घाट पर स्थित
- **वन्यजीव अभयारण्य** - भीमाशंकर अभयारण्य का हिस्सा
- **नागर वास्तुकला** - सुंदर मंदिर संरचना
**भौगोलिक स्थिति:**
- **राज्य:** महाराष्ट्र
- **जिला:** पुणे
- **पर्वत:** सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला (पश्चिमी घाट)
- **नदी:** भीमा नदी (उद्गम स्थल)
- **ऊंचाई:** समुद्र तल से लगभग 1034 मीटर
- **निकटतम शहर:** खेड (45 किमी)
- **पुणे से दूरी:** 110 किमी
- **मुंबई से दूरी:** 220 किमी
**भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की स्थापना कथा:**
**कुंभकर्ण का पुत्र भीम:**
प्राचीन काल की बात है। रावण का भाई कुंभकर्ण था जो अपनी लंबी नींद के लिए प्रसिद्ध था। कुंभकर्ण का एक पुत्र था जिसका नाम **भीम** या **भीमासुर** था।
भीम बहुत ही शक्तिशाली और क्रूर राक्षस था। जब रावण और कुंभकर्ण का वध हुआ तो भीम अत्यंत क्रोधित हुआ।
**भीम की तपस्या:**
भीम ने अपने पिता और चाचा की मृत्यु का बदला लेने का निर्णय किया। उसने सोचा कि पहले उसे अपार शक्ति प्राप्त करनी होगी।
भीम ने सह्याद्रि पर्वत पर जाकर भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या शुरू कर दी। उसने कई वर्षों तक घोर तपस्या की।
भगवान ब्रह्मा उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और प्रकट हुए। उन्होंने भीम से वरदान मांगने को कहा।
**वरदान प्राप्ति:**
भीम ने ब्रह्मा जी से कहा:
"हे ब्रह्मदेव! मुझे अपार शक्ति दें। मैं अजेय बनना चाहता हूं। कोई भी मुझे पराजित न कर सके।"
ब्रह्मा जी ने उसे शक्ति का वरदान दे दिया। लेकिन साथ ही कहा:
"तुम्हें अपार शक्ति मिलेगी, लेकिन अहंकार मत करना। यदि तुमने अहंकार किया तो तुम्हारा विनाश निश्चित है।"
लेकिन भीम ने ब्रह्मा जी की बात नहीं सुनी।
**भीम का अत्याचार:**
वरदान पाकर भीम अत्यंत शक्तिशाली हो गया। उसके अहंकार की कोई सीमा नहीं रही।
भीम ने सह्याद्रि पर्वत पर अपनी राजधानी स्थापित की। वह कामरूप नामक स्थान पर रहने लगा।
भीम ने देवताओं, ऋषियों और सभी धर्मात्माओं को सताना शुरू कर दिया। उसने स्वर्ग पर आक्रमण किया। देवता भी उससे भयभीत थे।
भीम राक्षस ने घोषणा की:
"मैं सबसे शक्तिशाली हूं। सभी मेरी पूजा करें। जो मेरी पूजा नहीं करेगा, उसे मैं मार डालूंगा।"
**देवताओं की प्रार्थना:**
देवता, ऋषि-मुनि सभी बहुत परेशान हो गए। वे भगवान शिव की शरण में गए।
देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की:
"हे महादेव! भीम राक्षस अत्यंत अहंकारी और क्रूर है। वह सबको सता रहा है। कृपया हमारी रक्षा करें। उसका वध केवल आप ही कर सकते हैं।"
भगवान शिव देवताओं की पीड़ा देखकर द्रवित हो गए। उन्होंने भीम राक्षस का वध करने का निर्णय लिया।
**भीमाशंकर का प्रकट होना:**
भगवान शिव **भीमाशंकर** के भयंकर रूप में प्रकट हुए। उनका रूप अत्यंत विकराल था। वे महाकाल की तरह भयानक दिख रहे थे।
भीमाशंकर ने भीम राक्षस को युद्ध के लिए ललकारा।
**भीम राक्षस का वध:**
भीम राक्षस अपने अहंकार में चूर होकर युद्ध के लिए आया। उसने सोचा कि वह भी शिव को पराजित कर देगा।
लेकिन भीम राक्षस भगवान शिव के भीमाशंकर रूप के सामने टिक नहीं सका। भीमाशंकर ने अपने त्रिशूल से भीम राक्षस का वध कर दिया।
भीम राक्षस मरते समय अपनी गलती समझ गया। उसने भगवान शिव से क्षमा मांगी।
भगवान शिव ने उसे क्षमा करते हुए कहा:
"तुमने तपस्या की थी लेकिन अहंकार में आ गए। अहंकार सबसे बड़ा शत्रु है।"
**ज्योतिर्लिंग की स्थापना:**
देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की:
"हे प्रभु! आपने हमें भीम राक्षस से मुक्ति दिलाई। कृपया आप यहीं सदा के लिए निवास करें।"
भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और कहा:
"मैं यहां **भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग** के रूप में सदा विराजमान रहूंगा। जो भी भक्त यहां आकर मेरी पूजा करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे।"
तभी से भगवान शिव भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां विराजमान हो गए।
**भीमा नदी की उत्पत्ति:**
कहा जाता है कि भगवान शिव के पसीने या युद्ध के बाद उनके शरीर से बहने वाले जल से **भीमा नदी** का उद्गम हुआ। यह नदी यहीं से निकलकर आगे बढ़ती है और कृष्णा नदी में मिल जाती है।
**मंदिर का इतिहास:**
भीमाशंकर मंदिर अत्यंत प्राचीन है।
**प्राचीन काल:**
- मूल मंदिर का निर्माण काल अज्ञात
- 13वीं शताब्दी के शिलालेख मिले हैं
**पेशवा काल (18वीं शताब्दी):**
- नाना फड़नवीस ने 1786-87 में वर्तमान मंदिर का निर्माण करवाया
- शिवशाही वास्तुकला शैली
- छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशजों का संरक्षण
**आधुनिक काल:**
- निरंतर जीर्णोद्धार
- सरकारी संरक्षण
**मंदिर की वास्तुकला:**
भीमाशंकर मंदिर नागर स्थापत्य शैली में बना है।
**संरचना:**
- काले पत्थर से निर्मित
- शिवशाही वास्तुकला
- भव्य शिखर
- विशाल सभा मंडप
**गर्भगृह:**
- मुख्य शिवलिंग
- स्वयंभू ज्योतिर्लिंग
**विशेष वास्तु:**
- सुंदर नक्काशीदार स्तंभ
- देवी-देवताओं की मूर्तियां
- जटिल पत्थर की नक्काशी
- ऊंचा कलश
**अन्य मंदिर:**
- शनीश्वर मंदिर
- कमलजा देवी मंदिर (शक्तिपीठ)
- नंदी मंडप
**भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की महिमा:**
१. **भीमा नदी का उद्गम** - पवित्र नदी का जन्म स्थल
२. **सह्याद्रि की गोद में** - प्राकृतिक सुंदरता
३. **भीम राक्षस वध** - अहंकार का विनाश
४. **शक्तिपीठ भी** - कमलजा देवी मंदिर
५. **वन्यजीव अभयारण्य** - प्रकृति का आशीर्वाद
**पूजा और दर्शन का समय:**
**मंदिर खुलने का समय:**
- **सुबह:** 5:00 AM से दोपहर 1:00 PM
- **शाम:** 3:00 PM से रात 9:00 PM
**आरती समय:**
- प्रातः आरती: 6:00 AM
- मध्याह्न आरती: 12:00 PM
- संध्या आरती: 7:00 PM
**विशेष पूजा:**
- रुद्राभिषेक
- महारुद्राभिषेक
- लघुरुद्राभिषेक
**प्रमुख त्योहार:**
- **महाशिवरात्रि** - विशाल उत्सव
- **श्रावण मास** - विशेष पूजा
- **कार्तिक पूर्णिमा** - दीपावली
**भीमाशंकर कैसे पहुंचें:**
**हवाई मार्ग:**
- निकटतम हवाई अड्डा: **पुणे** (120 किमी)
- दूसरा विकल्प: **मुंबई** (220 किमी)
**रेल मार्ग:**
- निकटतम स्टेशन: **पुणे जंक्शन** (110 किमी)
- स्टेशन से टैक्सी/बस
**सड़क मार्ग:**
- पुणे से: 110 किमी (3-4 घंटे)
- मुंबई से: 220 किमी (5-6 घंटे)
- खेड़ होकर भीमाशंकर
- नियमित बस सेवा (MSRTC)
**ठहरने की व्यवस्था:**
- मंदिर ट्रस्ट के गेस्ट हाउस
- भीमाशंकर में होटल
- MTDC गेस्ट हाउस
- धर्मशालाएं
- निजी लॉज
**भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य:**
भीमाशंकर मंदिर एक समृद्ध वन्यजीव अभयारण्य के बीच स्थित है।
**प्रमुख जीव:**
- **भारतीय विशाल गिलहरी** (Indian Giant Squirrel)
- तेंदुआ
- हिरण
- जंगली सूअर
- विभिन्न पक्षी प्रजातियां
**वनस्पति:**
- घने जंगल
- औषधीय पौधे
- दुर्लभ प्रजातियां
**ट्रेकिंग:**
- कई ट्रेकिंग मार्ग
- नागफनी पॉइंट
- गुप्त भीमाशंकर
- हनुमान झील
**आसपास के दर्शनीय स्थल:**
१. **कमलजा देवी मंदिर** - शक्तिपीठ
२. **शनीश्वर मंदिर**
३. **मोकशाकुंडा तीर्थ**
४. **सरितास झरना**
५. **नागफनी पॉइंट** - सूर्यास्त दृश्य
६. **गुप्त भीमाशंकर** - प्राचीन गुफा मंदिर
७. **हनुमान झील**
८. **भोर गंगा**
**विशेष जानकारी:**
- पहाड़ी क्षेत्र - ट्रेकिंग शूज आवश्यक
- मॉनसून में बहुत बारिश
- वन्यजीव क्षेत्र - सावधानी
- उचित पोशाक अनिवार्य
- प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें
- कैमरा ले जा सकते हैं
**यात्रा का सर्वोत्तम समय:**
- **अक्टूबर से फरवरी** - मौसम अच्छा
- **जून-सितंबर** - मॉनसून (सुंदर लेकिन फिसलन)
- **महाशिवरात्रि** - विशेष दर्शन
- **गर्मियों में** गर्मी अधिक
**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- छठा ज्योतिर्लिंग
- भीमा नदी का उद्गम स्थल
- सह्याद्रि पर्वत पर स्थित
- वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा
- शक्तिपीठ भी (कमलजा देवी)
- पेशवा कालीन वास्तुकला
🙏 हर हर महादेव 🙏
🙏 जय भीमाशंकर 🙏
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏