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कामाख्या देवी - तांत्रिक शक्ति का सर्वोच्च आदि शक्तिपीठ

कामाख्या देवी असम के गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत पर विराजमान हैं। 52 शक्तिपीठों में सर्वश्रेष्ठ यह आदि शक्तिपीठ तांत्रिक साधना का सर्वोच्च केंद्र है। यहाँ माँ सती की योनि गिरी थी और दस महाविद्याओं का वास है। अंबुवाची मेले के समय लाखों साधक और भक्त माँ की कृपा प्राप्त करने यहाँ आते हैं।

4 आदि शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठ महाशक्तिपीठ
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परिचय

कामाख्या देवी मंदिर असम के गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत पर स्थित है। यह 52 शक्तिपीठों में सर्वश्रेष्ठ आदि शक्तिपीठ है जहाँ माँ सती की योनि गिरी थी। तांत्रिक साधना का यह सर्वोच्च केंद्र दस महाविद्याओं का धाम भी है।

Kamakhya Devi Temple is situated on Nilachal Hill in Guwahati, Assam. It is the supreme among 52 Shaktipeeths and the first among 4 Adi Shaktipeeths where Goddess Sati's womb fell. This is the highest center of Tantric worship and the abode of Ten Mahavidyas.

कामाख्या देवी - आदि शक्तिपीठ असम | 52 शक्तिपीठों में सर्वश्रेष्ठ महाशक्तिपीठ

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कामाख्या देवी - तांत्रिक शक्ति का सर्वोच्च पीठ

कामाख्या देवी मंदिर असम राज्य की राजधानी गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत पर स्थित है। यह 52 शक्तिपीठों में सर्वश्रेष्ठ और 4 आदि शक्तिपीठों में प्रथम स्थान रखता है। यहाँ माँ सती की योनि गिरी थी इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और सिद्ध माना जाता है।

कामाख्या देवी को तांत्रिक साधना की सबसे बड़ी देवी माना जाता है। देश-विदेश से तांत्रिक साधक, अघोरी और भक्त यहाँ माँ की कृपा प्राप्त करने आते हैं। यह मंदिर दस महाविद्याओं का केंद्र भी है।

कामाख्या मंदिर का इतिहास

कामाख्या मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में कूच बिहार के राजा नर नारायण ने करवाया था। इससे पहले के मंदिर को मुस्लिम आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया था। मंदिर की वास्तुकला में असमिया, बंगाली और राजपूत शैलियों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

कामाख्या के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. कामाख्या देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है। यहाँ एक पत्थर की योनि आकृति है जिसमें से प्राकृतिक जलधारा बहती रहती है। इस पर लाल वस्त्र चढ़ाया जाता है। यही माँ कामाख्या का स्वरूप है।

2. दस महाविद्या मंदिर
कामाख्या मंदिर परिसर में दस महाविद्याओं के अलग-अलग मंदिर हैं जिनमें काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा होती है।

3. भैरव मंदिर
प्रत्येक शक्तिपीठ के साथ भैरव का मंदिर होता है। कामाख्या के भैरव उमानंद हैं जिनका मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के बीच एक द्वीप पर स्थित है।

4. नीलाचल पर्वत
जिस पर्वत पर कामाख्या मंदिर स्थित है उसे नीलाचल पर्वत कहते हैं। यहाँ से गुवाहाटी शहर और ब्रह्मपुत्र नदी का अद्भुत दृश्य दिखता है।

अंबुवाची मेला

प्रतिवर्ष जून माह में अंबुवाची मेला आयोजित होता है जो कामाख्या का सबसे बड़ा उत्सव है। मान्यता है कि इन दिनों माँ कामाख्या रजस्वला होती हैं। तीन दिन मंदिर बंद रहता है और चौथे दिन खुलने पर भक्तों को लाल वस्त्र प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इस समय लाखों तांत्रिक साधक और श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होते हैं।

कामाख्या कैसे पहुँचें

वायुमार्ग: गुवाहाटी का लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से 20 किमी दूर है।
रेलमार्ग: कामाख्या रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 6 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: गुवाहाटी शहर से मंदिर तक ऑटो, टैक्सी और बस आसानी से मिलती है।

कामाख्या दर्शन का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से अप्रैल का समय कामाख्या यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। अंबुवाची मेला (जून), नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। सुबह जल्दी दर्शन करने से भीड़ कम मिलती है।

कामाख्या का धार्मिक महत्व

कामाख्या देवी को सृष्टि की शक्ति का मूल स्रोत माना जाता है। तांत्रिक मान्यता के अनुसार जो साधक यहाँ सच्चे मन से साधना करता है उसे सिद्धि अवश्य प्राप्त होती है। यह पीठ इच्छाओं की पूर्ति करने वाली माँ कामाख्या का धाम है। यहाँ दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।