परिचय
Madhaveshwari Devi Temple is situated near the origin of river Narmada in Amarkantak, Madhya Pradesh. It is one of the 21 Mahashaktipeeths where Goddess Sati's right hip fell. Maa Madhaveshwari is the presiding deity of river Narmada and Amarkantak is called the Tirtha of Tirthas.
माधवेश्वरी देवी - महाशक्तिपीठ मध्य प्रदेश | अमरकंटक की अधिष्ठात्री देवी
माधवेश्वरी देवी - नर्मदा उद्गम की दिव्य महाशक्तिपीठ
माधवेश्वरी देवी मंदिर मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में अमरकंटक नामक स्थान पर विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के संगम पर स्थित है। यह 21 महाशक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र और सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ सती का दायाँ नितंब गिरा था इसीलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
अमरकंटक वह पवित्र स्थान है जहाँ से नर्मदा नदी का उद्गम होता है। माँ माधवेश्वरी नर्मदा नदी की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। अमरकंटक को तीर्थों का तीर्थ और भारत का हृदय स्थल भी कहा जाता है।
माधवेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास
माधवेश्वरी देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख पुराणों और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। कलचुरी वंश के राजाओं ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर की वास्तुकला में उत्तर भारतीय नागर शैली का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है।
माधवेश्वरी देवी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. माधवेश्वरी देवी गर्भगृह
मंदिर के गर्भगृह में माँ माधवेश्वरी की अत्यंत भव्य और दिव्य प्रतिमा विराजमान है। माँ का श्रृंगार फूल और आभूषणों से होता है। यहाँ माँ को लाल फूल सिंदूर और नारियल चढ़ाया जाता है।
2. नर्मदा उद्गम कुंड
अमरकंटक में नर्मदा नदी का उद्गम स्थल स्थित है जिसे नर्मदा कुंड कहते हैं। यह अत्यंत पवित्र स्थान है जहाँ स्नान करना लाखों तीर्थों के बराबर माना जाता है।
3. कपिलधारा जलप्रपात
अमरकंटक से 6 किमी दूर कपिलधारा जलप्रपात स्थित है जहाँ नर्मदा नदी पहली बार एक भव्य झरने के रूप में गिरती है। यह दृश्य अत्यंत मनोरम और दिव्य होता है।
4. भैरव मंदिर
माधवेश्वरी शक्तिपीठ के भैरव भव्यानंद रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर में भैरव मंदिर भी स्थित है जहाँ दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
5. सोनमुड़ा
अमरकंटक में सोनमुड़ा वह स्थान है जहाँ से सोन नदी का उद्गम होता है। एक ही स्थान से नर्मदा और सोन दो नदियों का उद्गम होना अत्यंत दुर्लभ है।
6. माई की बगिया
अमरकंटक में माई की बगिया एक प्राचीन वन है जहाँ माँ नर्मदा बचपन में खेलती थीं ऐसी मान्यता है। यहाँ अनेक दुर्लभ औषधीय पौधे पाए जाते हैं।
माधवेश्वरी देवी की पूजा विधि
माँ माधवेश्वरी की पूजा में लाल फूल सिंदूर लाल वस्त्र और नारियल का विशेष महत्व है। नर्मदा अष्टक दुर्गा सप्तशती और देवी कवच का पाठ माँ को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि मकर संक्रांति और नर्मदा जयंती के समय यहाँ विशेष पूजा और उत्सव होता है।
माधवेश्वरी देवी कैसे पहुँचें
वायुमार्ग: जबलपुर हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जो अमरकंटक से 220 किमी दूर है।
रेलमार्ग: पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो अमरकंटक से 17 किमी दूर है।
सड़कमार्ग: जबलपुर से 220 किमी, बिलासपुर से 175 किमी, शहडोल से 90 किमी।
माधवेश्वरी देवी दर्शन का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। नवरात्रि नर्मदा जयंती और मकर संक्रांति के समय यहाँ विशेष उत्सव होते हैं। नर्मदा जयंती पर लाखों श्रद्धालु नर्मदा उद्गम पर स्नान और पूजा के लिए आते हैं।
माधवेश्वरी देवी का धार्मिक महत्व
अमरकंटक को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है। यहाँ माँ माधवेश्वरी शक्तिपीठ नर्मदा उद्गम और अनेक प्राचीन मंदिरों का अद्भुत संगम है। माँ माधवेश्वरी की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। नर्मदा स्नान और माँ माधवेश्वरी के दर्शन से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।